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Kullu News: डायनासौर झील में 20 भादो के पवित्र स्नान पर पांबदी
Thu, 31 Aug 2023 06:05 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Thu, 31 Aug 2023 06:05 AM IST
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लगघाटी की पवित्र झील डायनासौर, जहां 20 भादों स्नान की मनाही रहेगी
कुल्लू। लगघाटी और मंडी जिला की चौहार, छोटा भंगाल क्षेत्र की अधिष्ठात्री माता फूंगणी की पवित्र डायनासौर झील में इस बार 20 भादों के स्नान पर पाबंदी रहेगी। लगघाटी, चौहार, बरोट और छोटा भंगाल के देवी-देवताओं ने झील की अपवित्रता को लेकर नाराजगी जताई है।
डायनासौर झील में कई लोग जाकर गंदगी फैला रहे हैं। इससे यह धार्मिक स्थल अपवित्र हो रहा है। ऐसे में अब माता फूंगणी के कारदार की ओर से सभी लोगों और श्रद्धालुओं से अपील की गई है कि कोई भी श्रद्धालु 20 भादों को डायनासौर झील में न जाएं। गौर रहे कि डायनासौर झील की लोगों में काफी मान्यता है।
दंत कथाओं के अनुसार भगवान शिव और पार्वती चंद्रताल, सूरजताल झील होते हुए जब मणिमहेश के लिए जाते थे तो डायनासौर नामक जगह पर रुकते थे। इस स्थान पर एक डायन का कब्जा था। शिव और पार्वती जब यहां पर रुके तो आधी रात डायन ने भगवान शिव को युद्ध के लिए ललकारा। इसके बाद भगवान शिव ने उसे मारा डाला। इसके बाद इस जगह का नाम डायनासौर पड़ा है।
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माता फूंगणी के कारदार रामलाल ठाकुर ने कहा कि देवस्थलों को देवस्थल ही रहने दिया जाए। इनमें किसी तरह की छेड़छाड़ नहीं की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि पहले कोरोना का मुश्किल दौर आया तब भी देवी-देवताओं ने हमारी रक्षा की। अब आपदा में फिर से देवी-देवता हमारा आसरा बने हैं। उन्होंने कहा कि देवी-देवताओं के आदेश के मुताबिक 20 भादों का स्नान डायनासौर में नहीं होगा। श्रद्धालु भी 20 भादों पर डायनासौर में न जाएं, आदेश न मानने वालों को दंडित किया जाएगा।
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डायनासौर झील में कई लोग जाकर गंदगी फैला रहे हैं। इससे यह धार्मिक स्थल अपवित्र हो रहा है। ऐसे में अब माता फूंगणी के कारदार की ओर से सभी लोगों और श्रद्धालुओं से अपील की गई है कि कोई भी श्रद्धालु 20 भादों को डायनासौर झील में न जाएं। गौर रहे कि डायनासौर झील की लोगों में काफी मान्यता है।
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दंत कथाओं के अनुसार भगवान शिव और पार्वती चंद्रताल, सूरजताल झील होते हुए जब मणिमहेश के लिए जाते थे तो डायनासौर नामक जगह पर रुकते थे। इस स्थान पर एक डायन का कब्जा था। शिव और पार्वती जब यहां पर रुके तो आधी रात डायन ने भगवान शिव को युद्ध के लिए ललकारा। इसके बाद भगवान शिव ने उसे मारा डाला। इसके बाद इस जगह का नाम डायनासौर पड़ा है।
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माता फूंगणी के कारदार रामलाल ठाकुर ने कहा कि देवस्थलों को देवस्थल ही रहने दिया जाए। इनमें किसी तरह की छेड़छाड़ नहीं की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि पहले कोरोना का मुश्किल दौर आया तब भी देवी-देवताओं ने हमारी रक्षा की। अब आपदा में फिर से देवी-देवता हमारा आसरा बने हैं। उन्होंने कहा कि देवी-देवताओं के आदेश के मुताबिक 20 भादों का स्नान डायनासौर में नहीं होगा। श्रद्धालु भी 20 भादों पर डायनासौर में न जाएं, आदेश न मानने वालों को दंडित किया जाएगा।