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Kullu News: बेड़ियों में बागन...पहले घर टूटे, अब उम्मीद भी टूटने लगी
Wed, 03 Sep 2025 11:10 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Wed, 03 Sep 2025 11:10 PM IST
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कुल्लू के बागन में लगातार हो रही बारिश के चलते मकान गिरने के कगार पर।-संवाद
भूस्खलन के डर से कुछ और परिवारों ने छोड़ा घर, राशन का भी गहराया संकट
एक हफ्ते से स्कूल में ठहरे हैं 27 परिवार, पहाड़ी से गिरतीं चट्टानों ने बढ़ाई चिंता
प्रभावित बोले- गांव के चारों ओर पहाड़ी से गिर रहे पत्थर, बड़ी हो गईं घरों की दरारें
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। बागन गांव के सैकड़ों ग्रामीण आज अपनी ही धरती पर असुरक्षित हैं। लगातार भूस्खलन और भूमि कटाव ने उनके घरों को दरारों में बदल दिया है- पेयजल, बिजली और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाएं कट गई हैं।
अब राशन की कमी ने उनकी परेशानियों को दोगुना कर दिया है। आशियानों को छोड़कर बचाव के लिए केवल सरकारी स्कूल ही उनका सहारा बना है जहां परिवार उम्मीद की एक आखिरी किरण के तौर पर आश्रय लिए हुए हैं।
पहाड़ी से चट्टानें गिर रही हैं। घरों में दरारें बढ़ती जा रही हैं। बिजली-पानी, गांव को जोड़ने वाले पैदल रास्ते और सड़क बंद होने के बाद अब राशन की समस्या भी सताने लगी है। प्रभावितों के लिए राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय का भवन ही आसरा है। 27 परिवार घर छोड़कर एक सप्ताह से स्कूल में रह रहे हैं। बीते मंगलवार को भी कुछ परिवारों ने अपने घर छोड़कर रिश्तेदारों के घर में शरण ली।
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ताश के पत्तों की तरह ढह गया निर्माणाधीन मकान
भारी बारिश के कारण 27 अगस्त से बागन गांव के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है। घरों में दरारें आने से लोग सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन कर रहे हैं। एक सप्ताह से पलायन जारी है। बुधवार को भी गांव में निर्माणाधीन भवन ताश के पत्तों की तरह ढह गया। गांव के लिए खतरा बनी विशालकाय चट्टान भी अपनी जगह से करीब 12 फीट तक खिसक गई है। भूमि कटाव और पहाड़ी से चट्टानें गिरने से प्रभावित डर के साये में जीने को विवश है। उधर, उपमंडल अधिकारी निशांत कुमार ने कहा कि गांव के लिए फौरी तौर पर राशन भेजा था। जिन परिवारों को राशन नहीं मिला है, उनके लिए व्यवस्था की जाएगी।
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गांव के चारों ओर पहाड़ी से भूस्खलन हो रहा है। पत्थर और मलबा गांव की ओर आ रहा है। नाले के कारण भूमि कटाव जारी है। घरों में दरारें बढ़ रही हैं। गांव के पीछे चट्टान भी अपनी जगह से खिसक गई है। जान बचाने के लिए घर छोड़ने पड़ रहे हैं। -मोनिका
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सड़क, रास्ते, बिजली और पानी की समस्या पहले से है। भारी बारिश और लगातार हो रहे भूस्खलन के कारण ग्रामीण कहीं आ-जा नहीं पा रहे हैं। इससे ग्रामीणों को अब जान बचाने के साथ-साथ पेट भरने के लिए राशन की चिंता भी सताने लगी है। -संदीप
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एक हफ्ते से स्कूल में ठहरे हैं 27 परिवार, पहाड़ी से गिरतीं चट्टानों ने बढ़ाई चिंता
प्रभावित बोले- गांव के चारों ओर पहाड़ी से गिर रहे पत्थर, बड़ी हो गईं घरों की दरारें
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। बागन गांव के सैकड़ों ग्रामीण आज अपनी ही धरती पर असुरक्षित हैं। लगातार भूस्खलन और भूमि कटाव ने उनके घरों को दरारों में बदल दिया है- पेयजल, बिजली और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाएं कट गई हैं।
अब राशन की कमी ने उनकी परेशानियों को दोगुना कर दिया है। आशियानों को छोड़कर बचाव के लिए केवल सरकारी स्कूल ही उनका सहारा बना है जहां परिवार उम्मीद की एक आखिरी किरण के तौर पर आश्रय लिए हुए हैं।
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पहाड़ी से चट्टानें गिर रही हैं। घरों में दरारें बढ़ती जा रही हैं। बिजली-पानी, गांव को जोड़ने वाले पैदल रास्ते और सड़क बंद होने के बाद अब राशन की समस्या भी सताने लगी है। प्रभावितों के लिए राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय का भवन ही आसरा है। 27 परिवार घर छोड़कर एक सप्ताह से स्कूल में रह रहे हैं। बीते मंगलवार को भी कुछ परिवारों ने अपने घर छोड़कर रिश्तेदारों के घर में शरण ली।
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ताश के पत्तों की तरह ढह गया निर्माणाधीन मकान
भारी बारिश के कारण 27 अगस्त से बागन गांव के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है। घरों में दरारें आने से लोग सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन कर रहे हैं। एक सप्ताह से पलायन जारी है। बुधवार को भी गांव में निर्माणाधीन भवन ताश के पत्तों की तरह ढह गया। गांव के लिए खतरा बनी विशालकाय चट्टान भी अपनी जगह से करीब 12 फीट तक खिसक गई है। भूमि कटाव और पहाड़ी से चट्टानें गिरने से प्रभावित डर के साये में जीने को विवश है। उधर, उपमंडल अधिकारी निशांत कुमार ने कहा कि गांव के लिए फौरी तौर पर राशन भेजा था। जिन परिवारों को राशन नहीं मिला है, उनके लिए व्यवस्था की जाएगी।
गांव के चारों ओर पहाड़ी से भूस्खलन हो रहा है। पत्थर और मलबा गांव की ओर आ रहा है। नाले के कारण भूमि कटाव जारी है। घरों में दरारें बढ़ रही हैं। गांव के पीछे चट्टान भी अपनी जगह से खिसक गई है। जान बचाने के लिए घर छोड़ने पड़ रहे हैं। -मोनिका
सड़क, रास्ते, बिजली और पानी की समस्या पहले से है। भारी बारिश और लगातार हो रहे भूस्खलन के कारण ग्रामीण कहीं आ-जा नहीं पा रहे हैं। इससे ग्रामीणों को अब जान बचाने के साथ-साथ पेट भरने के लिए राशन की चिंता भी सताने लगी है। -संदीप