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Kullu News: लो वेंटिलेशन वाले कमरे में ज्यादा न देर न ठहरें
Fri, 30 Jan 2026 10:36 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Fri, 30 Jan 2026 10:36 PM IST
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एक घंटे के अंतराल में खोलते रहें कमरे की खिड़कियां और दरवाजे
विशेषज्ञों का दावा, सर्दी के मौसम में बढ़ जाती है क्षय रोगियों की संख्या
राजीव नैय्यर
कुल्लू। लो-वेंटिलेशन (कम हवा का संचार) वाले कमरे में ज्यादा देर तक न ठहरें। यदि कमरे में लोगों की संख्या अधिक है तो कमरे की खिड़कियों और दरवाजे को एक से डेढ़ घंटे के अंतराल में अवश्य खोलते रहें ताकि बाहर की ताजा हवा कमरे में आती रहे। ऐसा करने से क्षय रोग की चपेट में आने का खतरा कम हो सकता है।
विशेषज्ञ चिकित्सकों की मानें तो सर्दी के मौसम में क्षय रोग के मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी हो जाती है। इसका एक मुख्य कारण इकट्ठे एक कमरे में तीन-चार से अधिक लोगों के बैठने से भी हो सकता है।
सर्दी के मौसम में तंदूर या हीटर के पास सभी साथ बैठते हैं। कमरे में कम वेंटिलेशन होने से ताजा हवा अंदर नहीं आ पाती। ऐसे में यदि एक व्यक्ति में भी क्षय रोग के लक्षण हों तो वह दूसरे में फैलने का खतरा अधिक रहता है। ऐसे में एहतियात बरतने की आवश्यकता है। हालांकि, मामलों की रोकथाम और क्षय रोग उन्मूलन के लिए स्वास्थ्य विभाग ने एडवाइजरी जारी कर दी है। विभाग ने लोगों से वेंटिलेशन वाले कमरों में रहने और अधिक संख्या में एक स्थान पर ज्यादा लोगों के साथ रहने से बचने की सलाह दी है। उधर, इस संबंध में जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. सुरेश ने कहा कि क्षय रोग के मरीजों को मास्क का प्रयोग करना चाहिए। साथ ही अपने बलगम का डिस्पोजल सही से करना चाहिए। सर्दी के दिनों में क्षय, दमा, अस्थमा और सांस संबंधी बीमारियों के मरीजों की परेशानी बढ़ती है। क्षय रोगियों को विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है। अगर सावधानी नहीं बरती गई तो यह जानलेवा भी हो सकती है।
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सर्दी में एहतियात बरतना जरूरी
सर्द हवा और इसमें मिश्रित प्रदूषण के कण फेफड़ों में पहुंचकर क्षय रोग को और जटिल बना देते हैं। इससे क्षय रोग के मरीजों को सांस लेने में भी दिक्कत हो सकती है। इसलिए इस मौसम में सावधान रहने की आवश्यकता है। इस मौसम में ठंड लगने से खांसी जुकाम हो जाता है लेकिन अगर आपको लंबे समय तक खांसी हो और खांसी के साथ बलगम या खून आए तो यह क्षय रोग होने के संकेत हो सकते हैं। -डॉ. रणजीत ठाकुर, मुख्य चिकित्सा अधिकारी
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विशेषज्ञों का दावा, सर्दी के मौसम में बढ़ जाती है क्षय रोगियों की संख्या
राजीव नैय्यर
कुल्लू। लो-वेंटिलेशन (कम हवा का संचार) वाले कमरे में ज्यादा देर तक न ठहरें। यदि कमरे में लोगों की संख्या अधिक है तो कमरे की खिड़कियों और दरवाजे को एक से डेढ़ घंटे के अंतराल में अवश्य खोलते रहें ताकि बाहर की ताजा हवा कमरे में आती रहे। ऐसा करने से क्षय रोग की चपेट में आने का खतरा कम हो सकता है।
विशेषज्ञ चिकित्सकों की मानें तो सर्दी के मौसम में क्षय रोग के मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी हो जाती है। इसका एक मुख्य कारण इकट्ठे एक कमरे में तीन-चार से अधिक लोगों के बैठने से भी हो सकता है।
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सर्दी के मौसम में तंदूर या हीटर के पास सभी साथ बैठते हैं। कमरे में कम वेंटिलेशन होने से ताजा हवा अंदर नहीं आ पाती। ऐसे में यदि एक व्यक्ति में भी क्षय रोग के लक्षण हों तो वह दूसरे में फैलने का खतरा अधिक रहता है। ऐसे में एहतियात बरतने की आवश्यकता है। हालांकि, मामलों की रोकथाम और क्षय रोग उन्मूलन के लिए स्वास्थ्य विभाग ने एडवाइजरी जारी कर दी है। विभाग ने लोगों से वेंटिलेशन वाले कमरों में रहने और अधिक संख्या में एक स्थान पर ज्यादा लोगों के साथ रहने से बचने की सलाह दी है। उधर, इस संबंध में जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. सुरेश ने कहा कि क्षय रोग के मरीजों को मास्क का प्रयोग करना चाहिए। साथ ही अपने बलगम का डिस्पोजल सही से करना चाहिए। सर्दी के दिनों में क्षय, दमा, अस्थमा और सांस संबंधी बीमारियों के मरीजों की परेशानी बढ़ती है। क्षय रोगियों को विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है। अगर सावधानी नहीं बरती गई तो यह जानलेवा भी हो सकती है।
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सर्दी में एहतियात बरतना जरूरी
सर्द हवा और इसमें मिश्रित प्रदूषण के कण फेफड़ों में पहुंचकर क्षय रोग को और जटिल बना देते हैं। इससे क्षय रोग के मरीजों को सांस लेने में भी दिक्कत हो सकती है। इसलिए इस मौसम में सावधान रहने की आवश्यकता है। इस मौसम में ठंड लगने से खांसी जुकाम हो जाता है लेकिन अगर आपको लंबे समय तक खांसी हो और खांसी के साथ बलगम या खून आए तो यह क्षय रोग होने के संकेत हो सकते हैं। -डॉ. रणजीत ठाकुर, मुख्य चिकित्सा अधिकारी