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Kullu News: बर्फ पिघलते ही पांच माह बाद खेतीबाड़ी में जुटे किसान
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सिंदवाड़ी और डेल्डा गांवों में मटर बिजाई का कार्य शुरू
वर्षभर में किसान निकाल पाते हैं महज एक ही फसल
संवाद न्यूज एजेंसी
केलांग/उदयपुर (लाहौल-स्पीति)। उपमंडल उदयपुर के तहत सिंदवाड़ी और डेल्डा गांवों में खेतों से बर्फ पिघलते ही यहां के किसान अब खेतीबाड़ी में जुट गए हैं। यहां पर किसानों ने मटर बिजाई का कार्य शुरू कर दिया है। इसके बाद समूची घाटी में यह क्रम शुरू हो जाएगा। करीब पांच माह बाद (अक्तूबर से लेकर मार्च तक) घाटी में खेतीबाड़ी नहीं हो पाई है। खेतों में बर्फ पिघलने के बाद अब समूची घाटी में इन दिनों किसान फूलगोभी सहित अन्य सब्जियों की पनीरी तैयार रहे हैं। लाहौल के किसान पिछले कई सालों से मटर और आलू की खेती कर अपनी आर्थिकी को मजबूत कर रहे हैं। घाटी में 4,500 के करीब किसान परिवार हैं, जिनमें 80 फीसदी से अधिक किसानों का जीवनयापन कृषि एवं बागवानी पर ही निर्भर है।
घाटी के किसान राम लाल, वीर सिंह और चमन लाल ने कहा कि लाहौल घाटी के किसान साल में एक ही फसल लेते हैं। इसके लिए उन्हें खूब मेहनत करनी पड़ती है। करीब पांच माह बाद किसान खेतों की ओर मुड़े हैं। सिंदवाड़ी और डेल्डा गांव से मटर बिजाई का कार्य शुरू हुआ है। किसानों को इस बार घाटी में अच्छी फसल होने की उम्मीद है। इस संबंध में जिला कृषि अधिकारी डाॅ. गगन प्रदीप ने बताया कि पिछले कई वर्षों से लाहौल घाटी में मटर और आलू की खेती कम हो गई है। उन्होंने कहा कि अब लाहौल घाटी के किसान बड़े पैमाने पर विभिन्न किस्मों के सब्जियां तैयार कर अच्छी आय अर्जित कर रहे हैं।
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वर्षभर में किसान निकाल पाते हैं महज एक ही फसल
संवाद न्यूज एजेंसी
केलांग/उदयपुर (लाहौल-स्पीति)। उपमंडल उदयपुर के तहत सिंदवाड़ी और डेल्डा गांवों में खेतों से बर्फ पिघलते ही यहां के किसान अब खेतीबाड़ी में जुट गए हैं। यहां पर किसानों ने मटर बिजाई का कार्य शुरू कर दिया है। इसके बाद समूची घाटी में यह क्रम शुरू हो जाएगा। करीब पांच माह बाद (अक्तूबर से लेकर मार्च तक) घाटी में खेतीबाड़ी नहीं हो पाई है। खेतों में बर्फ पिघलने के बाद अब समूची घाटी में इन दिनों किसान फूलगोभी सहित अन्य सब्जियों की पनीरी तैयार रहे हैं। लाहौल के किसान पिछले कई सालों से मटर और आलू की खेती कर अपनी आर्थिकी को मजबूत कर रहे हैं। घाटी में 4,500 के करीब किसान परिवार हैं, जिनमें 80 फीसदी से अधिक किसानों का जीवनयापन कृषि एवं बागवानी पर ही निर्भर है।
घाटी के किसान राम लाल, वीर सिंह और चमन लाल ने कहा कि लाहौल घाटी के किसान साल में एक ही फसल लेते हैं। इसके लिए उन्हें खूब मेहनत करनी पड़ती है। करीब पांच माह बाद किसान खेतों की ओर मुड़े हैं। सिंदवाड़ी और डेल्डा गांव से मटर बिजाई का कार्य शुरू हुआ है। किसानों को इस बार घाटी में अच्छी फसल होने की उम्मीद है। इस संबंध में जिला कृषि अधिकारी डाॅ. गगन प्रदीप ने बताया कि पिछले कई वर्षों से लाहौल घाटी में मटर और आलू की खेती कम हो गई है। उन्होंने कहा कि अब लाहौल घाटी के किसान बड़े पैमाने पर विभिन्न किस्मों के सब्जियां तैयार कर अच्छी आय अर्जित कर रहे हैं।
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