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Kullu News: सेब के पेड़ों के पत्ते सूख कर झड़ रहे, बागवान चिंतित
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कुल्लू। जिले में सेब के पेड़ों के पत्ते सूख कर झड़ने लगे हैं। पेड़ों के ऊपरी हिस्से से यह रोग शुरू हो रहा है। इससे न केवल सेब की फसल को नुकसान हो रहा है बल्कि पेड़ों के सूखने का खतरा बढ़ गया है। पेड़ों में लगी बीमारी से बागवानों की चिंता बढ़ गई है। जिले में कई जगहों पर सेब के पेड़ों में यह बीमारी देखी जा रही है।
बागवानों ने बीमारी को रोकने के लिए कई तरह की दवाइयों का छिड़काव किया है, मगर कोई राहत नहीं मिल रही है। बागवान मेहर चंद, कुमार सिंह, तिलक राज और किशोरी लाल ने कहा कि कई जगह सेब के पेड़ों में यह बीमारी तेजी से पनप रही है। सेब के ऊपरी भाग से पत्ते सूखने के बाद झड़ रहे हैं। बाद में टहनी के साथ पेड़ भी सूख रहा है।
इस बीमारी से बागवान खासे चिंतित हैं। कहा कि फनौटी पंचायत में सेब के कई बगीचों में पत्तों के सूखने तथा कैंकर रोग की शिकायत है। उन्होंने कहा कि 15 से 20 साल के पेड़ों में यह शिकायत अधिक है। फ्लावरिंग के समय इन पेड़ों में भारी फूल आए थे और अब पत्ते सूख रहे हैं। मेहर चंद और किशोरी लाल ने कहा कि समझ नहीं आ रहा है कि इसे कैसे रोका जाएगा। उन्होंने बागवानी विशेषज्ञों से बगीचों का दौरा कर इसकी रोकथाम के लिए उपयुक्त दवाइयां बताने की मांग की है। संवाद
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बागवान प्रति 100 लीटर पानी में 100 ग्राम कार्बेन्डाजिम दवाई का छिड़काव करें। अगर बागवान उचित समय पर दवाइयों की स्प्रे करते हैं तो सेब में इस तरह के लक्षणों को रोकने में मदद मिलेगी।
-डाॅ. शालिनी वर्मा, विशेषज्ञ बागवानी एवं कृषि विश्वविद्यालय नौणी सोलन
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बागवानों ने बीमारी को रोकने के लिए कई तरह की दवाइयों का छिड़काव किया है, मगर कोई राहत नहीं मिल रही है। बागवान मेहर चंद, कुमार सिंह, तिलक राज और किशोरी लाल ने कहा कि कई जगह सेब के पेड़ों में यह बीमारी तेजी से पनप रही है। सेब के ऊपरी भाग से पत्ते सूखने के बाद झड़ रहे हैं। बाद में टहनी के साथ पेड़ भी सूख रहा है।
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इस बीमारी से बागवान खासे चिंतित हैं। कहा कि फनौटी पंचायत में सेब के कई बगीचों में पत्तों के सूखने तथा कैंकर रोग की शिकायत है। उन्होंने कहा कि 15 से 20 साल के पेड़ों में यह शिकायत अधिक है। फ्लावरिंग के समय इन पेड़ों में भारी फूल आए थे और अब पत्ते सूख रहे हैं। मेहर चंद और किशोरी लाल ने कहा कि समझ नहीं आ रहा है कि इसे कैसे रोका जाएगा। उन्होंने बागवानी विशेषज्ञों से बगीचों का दौरा कर इसकी रोकथाम के लिए उपयुक्त दवाइयां बताने की मांग की है। संवाद
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बागवान प्रति 100 लीटर पानी में 100 ग्राम कार्बेन्डाजिम दवाई का छिड़काव करें। अगर बागवान उचित समय पर दवाइयों की स्प्रे करते हैं तो सेब में इस तरह के लक्षणों को रोकने में मदद मिलेगी।
-डाॅ. शालिनी वर्मा, विशेषज्ञ बागवानी एवं कृषि विश्वविद्यालय नौणी सोलन