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सेब कार्टन के बाद अब 10 रुपये महंगी हुई लकड़ी की पेटी
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कुल्लू। कोरोना के बीच सूबे के बागवानों को एक और झटका लगा है। सेब कार्टन के बाद अब लकड़ी का वारदाना भी महंगा हो गया है। 20 किलो पैकिंग वाली लकड़ी की पेटी के दाम अब बढ़कर 46 रुपये तक हो गए हैं। पिछले साल लकड़ी की यह पेटी 36 रुपये तक बिक रही थी। 10 किलो की पैकिंग वाला लकड़ी का डिब्बा भी 40 से बढ़कर 45 रुपये हो गया है। बागवान दिल्ली की आजादपुर सब्जी मंडी सेब व नाशपाती भेजने के लिए लकड़ी की पेटी और डिब्बे का इस्तेमाल करते हैं। लकड़ी का वारदाना महंगा होने से बागवानों पर अब मार पड़ेगी।
नाशपाती का सीजन शुरू हो चुका है। ऐसे में छोटे साइज की नाशपाती सेब की पेटी में ही पैक की जा रही है। दिल्ली से कई कमीशन एजेंटों ने कुल्लू में वारदाना की गाड़ियां पहुंचा दी हैं। पेटियों को दिल्ली की आजादपुर सब्जी के कमीशन एजेंट सीधे तौर पर भी बागवानों को दे रहे हैं। कई बागवान स्थानीय विक्रेताओं से भी लकड़ी की पेटी व डिब्बे खरीद रहे हैं। गौर रहे कि लकड़ी की पेटी में खर्चा काफी अधिक पड़ता है। पेटी को बनाने के बाद रद्दी, घास, पैकिंग सहित दिल्ली का किराया वहन करता पड़ता है। स्थानीय मंडियों में सेब खुली पैकिंग में ही बिकता है। बागवान नरोत्तम ठाकुर, दीप लाल भारद्वाज, मनु, दिले राम और जोगिंद्र ने कहा कि लकड़ी की पेटी के दाम बढ़ने से बागवानों पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। कुल्लू में थोक विक्रेता ज्ञान चंद ठाकुर ने कहा कि लकड़ी की पेटी के दस रुपये जबकि 10 किलो के डिब्बे के पांच रुपये तक दाम बढ़े हैं।
दिल्ली की आजादपुर सब्जी मंडी में एसडीटी कंपनी के जिला प्रतिनिधि नरेश ठाकुर ने कहा कि डिमांड के अनुसार पेटियां उपलब्ध करवाई जा रही हैं।
पेटियों में पैक होता है 50 फीसदी से अधिक सेब
कुल्लू में 50 फीसदी से अधिक सेब पेटियों में पैक होकर दिल्ली की आजादपुर सब्जी मंडी में पहुंचता है। ट्रक यूनियन भुंतर, कुल्लू और मनाली के माध्यम से सेब पेटियां दिल्ली जाती हैं। कोरोना में बागवान सेब दिल्ली भेजने से कतरा रहे हैं। इससे पहले कमीशन एजेंटों के माध्यम से बागवान अपने सेब बेचते रहे हैं। 20 किलो की पेटी में एक्ट्रा लार्ज, लार्ज, मीडियम, स्मॉल और एक्ट्रा स्मॉल ग्रेड की पैकिंग होती है।
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नाशपाती का सीजन शुरू हो चुका है। ऐसे में छोटे साइज की नाशपाती सेब की पेटी में ही पैक की जा रही है। दिल्ली से कई कमीशन एजेंटों ने कुल्लू में वारदाना की गाड़ियां पहुंचा दी हैं। पेटियों को दिल्ली की आजादपुर सब्जी के कमीशन एजेंट सीधे तौर पर भी बागवानों को दे रहे हैं। कई बागवान स्थानीय विक्रेताओं से भी लकड़ी की पेटी व डिब्बे खरीद रहे हैं। गौर रहे कि लकड़ी की पेटी में खर्चा काफी अधिक पड़ता है। पेटी को बनाने के बाद रद्दी, घास, पैकिंग सहित दिल्ली का किराया वहन करता पड़ता है। स्थानीय मंडियों में सेब खुली पैकिंग में ही बिकता है। बागवान नरोत्तम ठाकुर, दीप लाल भारद्वाज, मनु, दिले राम और जोगिंद्र ने कहा कि लकड़ी की पेटी के दाम बढ़ने से बागवानों पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। कुल्लू में थोक विक्रेता ज्ञान चंद ठाकुर ने कहा कि लकड़ी की पेटी के दस रुपये जबकि 10 किलो के डिब्बे के पांच रुपये तक दाम बढ़े हैं।
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दिल्ली की आजादपुर सब्जी मंडी में एसडीटी कंपनी के जिला प्रतिनिधि नरेश ठाकुर ने कहा कि डिमांड के अनुसार पेटियां उपलब्ध करवाई जा रही हैं।
पेटियों में पैक होता है 50 फीसदी से अधिक सेब
कुल्लू में 50 फीसदी से अधिक सेब पेटियों में पैक होकर दिल्ली की आजादपुर सब्जी मंडी में पहुंचता है। ट्रक यूनियन भुंतर, कुल्लू और मनाली के माध्यम से सेब पेटियां दिल्ली जाती हैं। कोरोना में बागवान सेब दिल्ली भेजने से कतरा रहे हैं। इससे पहले कमीशन एजेंटों के माध्यम से बागवान अपने सेब बेचते रहे हैं। 20 किलो की पेटी में एक्ट्रा लार्ज, लार्ज, मीडियम, स्मॉल और एक्ट्रा स्मॉल ग्रेड की पैकिंग होती है।
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