{"_id":"68431c53925f1c167b0f7a50","slug":"after-bathing-lord-raghunath-is-adorned-kullu-news-c-89-1-klu1002-149328-2025-06-06","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kullu News: स्नान के बाद भगवान रघुनाथ का शृंगार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kullu News: स्नान के बाद भगवान रघुनाथ का शृंगार
Fri, 06 Jun 2025 10:20 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Fri, 06 Jun 2025 10:20 PM IST
विज्ञापन
भोग लगाने के बाद दिए श्रद्धालुओं को दर्शन, घुनाथपुर में मनाया जल विहार उत्सव
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। भगवान रघुनाथ के मंदिर सुल्तानपुर में जल विहार उत्सव मनाया गया। इस दौरान भगवान रघुनाथ ने कुंड में स्नान किया। उसके बाद लोगों को दर्शन दिए।
शुक्रवार को सुबह पहले मंदिर में रघुनाथ की पूजा-अर्चना की गई। इसके बाद उन्हें भोग लगाया गया। उसके बाद रघुनाथ को ढोल-नगाड़ों की थाप पर मंदिर से बाहर कुंड तक लाया गया। यहां सैंकड़ों लोगों की मौजूदगी में देव परंपरा के अनुसार स्नान करवाया। यहां पहले पुजारियों ने रघुनाथ की पूजा की और साथ में स्नान करवाया। इसके बाद रघुनाथ को कुंड से बाहर निकालते ही बच्चों ने स्नान किया। लोगों ने इससे पहले अपने घर ले जाने के लिए भी पानी भरा। इस दौरान भगवान रघुनाथ के मुख्य छड़ीबरदार महेश्वर सिंह ने भी परंपरा निभाई। महिलाओं ने इस दौरान भजन कीर्तन गाकर माहौल को पूरी तरह से भक्तिमय बना दिया। इस मौके पर भगवान रघुनाथ के साथ हनुमान, शालीग्राम सहित अन्य सभी मूर्तियों को स्नान कर उनका शृंगार किया गया।
भगवान रघुनाथ के छड़ीबरदार महेश्वर सिंह ने बताया कि भगवान रघुनाथ के मंदिर में जल विहार भी एक मुख्य उत्सवों में शामिल है। इसके अलावा भगवान रघुनाथ के मंदिर में दशहरा, बसंत, अन्नकूट, वन विहार भी मुख्य उत्सवों की तरह बनाए जाते हैं। भगवान रघुनाथ को जल विहार उत्सव के दिन उन्हें गर्भगृह से बाहर निकाला जाता है और जल विहार में स्नान करने के बाद भगवान रघुनाथ वापस अपने गर्भगृह में विराजमान हुए।
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। भगवान रघुनाथ के मंदिर सुल्तानपुर में जल विहार उत्सव मनाया गया। इस दौरान भगवान रघुनाथ ने कुंड में स्नान किया। उसके बाद लोगों को दर्शन दिए।
शुक्रवार को सुबह पहले मंदिर में रघुनाथ की पूजा-अर्चना की गई। इसके बाद उन्हें भोग लगाया गया। उसके बाद रघुनाथ को ढोल-नगाड़ों की थाप पर मंदिर से बाहर कुंड तक लाया गया। यहां सैंकड़ों लोगों की मौजूदगी में देव परंपरा के अनुसार स्नान करवाया। यहां पहले पुजारियों ने रघुनाथ की पूजा की और साथ में स्नान करवाया। इसके बाद रघुनाथ को कुंड से बाहर निकालते ही बच्चों ने स्नान किया। लोगों ने इससे पहले अपने घर ले जाने के लिए भी पानी भरा। इस दौरान भगवान रघुनाथ के मुख्य छड़ीबरदार महेश्वर सिंह ने भी परंपरा निभाई। महिलाओं ने इस दौरान भजन कीर्तन गाकर माहौल को पूरी तरह से भक्तिमय बना दिया। इस मौके पर भगवान रघुनाथ के साथ हनुमान, शालीग्राम सहित अन्य सभी मूर्तियों को स्नान कर उनका शृंगार किया गया।
भगवान रघुनाथ के छड़ीबरदार महेश्वर सिंह ने बताया कि भगवान रघुनाथ के मंदिर में जल विहार भी एक मुख्य उत्सवों में शामिल है। इसके अलावा भगवान रघुनाथ के मंदिर में दशहरा, बसंत, अन्नकूट, वन विहार भी मुख्य उत्सवों की तरह बनाए जाते हैं। भगवान रघुनाथ को जल विहार उत्सव के दिन उन्हें गर्भगृह से बाहर निकाला जाता है और जल विहार में स्नान करने के बाद भगवान रघुनाथ वापस अपने गर्भगृह में विराजमान हुए।
विज्ञापन