{"_id":"6814f6c33e76c3de4609a43e","slug":"administration-should-soon-mark-the-border-of-kullu-and-lahaul-at-rohtang-pass-markanda-kullu-news-c-89-1-klu1002-146725-2025-05-02","type":"story","status":"publish","title_hn":"रोहतांग दर्रा पर कुल्लू और लाहौल की सीमा की जल्द निशानदेही करे प्रशासन : मारकंडा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
रोहतांग दर्रा पर कुल्लू और लाहौल की सीमा की जल्द निशानदेही करे प्रशासन : मारकंडा
Fri, 02 May 2025 10:15 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Fri, 02 May 2025 10:15 PM IST
विज्ञापन
कहा- घाटी की कोकसर पंचायत के युवाओं ने किया है सीमा तय करने का आवेदन
बोले: पर्यटन कारोबार करने में दिक्कत न आए, इसके लिए सीमा रेखांकित होना जरूरी
संवाद न्यूज एजेंसी
सिस्सू (लाहौल-स्पीति)। समुद्रतल से 13050 फीट की ऊंचाई पर मशहूर पर्यटन स्थल रोहतांग दर्रा पर लाहौल-स्पीति और कुल्लू की सीमा को लेकर पूर्व मंत्री मारकंडा ने कहा कि प्रशासन और सरकार जल्द लाहौल और कुल्लू जिले के अंतर्गत पड़ने वाली सीमा को रेखांकित करें।
उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन और सरकार को जल्द सौहदपूर्ण तरीके से विवाद सुलझाना चाहिए।
उधर, पूर्व समिति सदस्य सुनील कुमार ने कहा कि अटल टनल खुलने के बाद कोकसर में पर्यटन कारोबार फल-फूल रहा है, लेकिन कोकसर पंचायत के दायरे में आने वाले रोहतांग दर्रा की सीमा कहां तक है, यह अभी तक पता नहीं चला है। युवाओं ने जिला प्रशासन को लाहौल की सीमा चिह्नित करने के लिए प्रार्थना पत्र दिए हैं, लेकिन अभी तक प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। डॉ. रामलाल मारकंडा ने कहा कि सरकार को चाहिए कि राजस्व विभाग मनाली और केलांग के राजस्व विभाग आपस में मिलकर कोकसर पंचायत के अंतर्गत आने वाली सीमा को के मामले को जल्द चिह्नित कर सुलझाएं।
उन्होंने कहा कि अटल टनल रोहतांग खुलने से पहले कोकसर और लाहौल के युवा ही पर्यटन गतिविधि चलाने रोहतांग तक जाते थे। कोकसर की तरफ बर्फ काफी समय तक रहती है, लेकिन अधिकतर मनाली के कारोबारी इन क्षेत्रों में साहसिक गतिविधियां चलाते हैं, इसलिए सीमा चिह्नित करना आवश्यक है। वह उपायुक्त से जल्द मिलकर इस और मुद्दे का समाधान करने की बात रखेंगे।
विज्ञापन
उन्होंने कोकसर में बिजली की समस्या को लेकर कहा कि कोकसर से तेलिंग तक 8 किलोमीटर में बिछी भूमिगत केबल 40 साल से अधिक पुरानी हो चुकी है। इसमें 100 से अधिक जॉइंट हैं। इनमें हर वक्त फॉल्ट रहता है। इसे ठीक किया जाना चाहिए।
--
विज्ञापन
बोले: पर्यटन कारोबार करने में दिक्कत न आए, इसके लिए सीमा रेखांकित होना जरूरी
संवाद न्यूज एजेंसी
सिस्सू (लाहौल-स्पीति)। समुद्रतल से 13050 फीट की ऊंचाई पर मशहूर पर्यटन स्थल रोहतांग दर्रा पर लाहौल-स्पीति और कुल्लू की सीमा को लेकर पूर्व मंत्री मारकंडा ने कहा कि प्रशासन और सरकार जल्द लाहौल और कुल्लू जिले के अंतर्गत पड़ने वाली सीमा को रेखांकित करें।
उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन और सरकार को जल्द सौहदपूर्ण तरीके से विवाद सुलझाना चाहिए।
उधर, पूर्व समिति सदस्य सुनील कुमार ने कहा कि अटल टनल खुलने के बाद कोकसर में पर्यटन कारोबार फल-फूल रहा है, लेकिन कोकसर पंचायत के दायरे में आने वाले रोहतांग दर्रा की सीमा कहां तक है, यह अभी तक पता नहीं चला है। युवाओं ने जिला प्रशासन को लाहौल की सीमा चिह्नित करने के लिए प्रार्थना पत्र दिए हैं, लेकिन अभी तक प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। डॉ. रामलाल मारकंडा ने कहा कि सरकार को चाहिए कि राजस्व विभाग मनाली और केलांग के राजस्व विभाग आपस में मिलकर कोकसर पंचायत के अंतर्गत आने वाली सीमा को के मामले को जल्द चिह्नित कर सुलझाएं।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि अटल टनल रोहतांग खुलने से पहले कोकसर और लाहौल के युवा ही पर्यटन गतिविधि चलाने रोहतांग तक जाते थे। कोकसर की तरफ बर्फ काफी समय तक रहती है, लेकिन अधिकतर मनाली के कारोबारी इन क्षेत्रों में साहसिक गतिविधियां चलाते हैं, इसलिए सीमा चिह्नित करना आवश्यक है। वह उपायुक्त से जल्द मिलकर इस और मुद्दे का समाधान करने की बात रखेंगे।
विज्ञापन
उन्होंने कोकसर में बिजली की समस्या को लेकर कहा कि कोकसर से तेलिंग तक 8 किलोमीटर में बिछी भूमिगत केबल 40 साल से अधिक पुरानी हो चुकी है। इसमें 100 से अधिक जॉइंट हैं। इनमें हर वक्त फॉल्ट रहता है। इसे ठीक किया जाना चाहिए।