अनार की खेती में नोट ही नोट

Kullu Updated Thu, 17 May 2012 12:00 PM IST
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कुल्लू। मौसम में आए बदलाव से लोअर कुल्लू के बागवानों के लिए अनार की खेती, सेब का बेहतर विकल्प बन गई है। सरकार की तरफ से मिल रही सुविधाओं से अनार की खेती से बागवान अच्छी खासी आय अर्जित करने लगे हैं। पंचायत नरेश के गांव रूआड़ के सुंदर सिंह ने अपनी दस बीघा जमीन में सिंदूरी अनार के 800 पौधे लगाए हैं। इससे वह 1 से दस लाख रुपये सालाना कमा रहे हैं। कहा कि यहां की जलवायु अनार की खेती के अनुकूल है। बागवानी विभाग भी समय-समय पर बीमारियों तथा उपचार के बारे में सुझाव देता है। सुंदर सिंह का कहना है कि उन्होंने विभाग के सहयोग से फव्वारा सिंचाई की व्यवस्था कर रखी है।
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पिपलागे के रहने वाले बागवान कंवर अजय, हरि सिंह, नारायण सिंह और रामनंद भी कंधारी तथा सिधुंरी किस्म के अनार उगाकर अपनी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ कर रहे हैं। बागवानों का कहना है कि सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से सिंचाई योजनाओं तथा बागवानी विभाग से मिल रही सुविधाओं से अनार की फसल आय का मुख्य साधन बन गई हैं। सब्जी मंडियों के निर्माण से विपणन की समस्या भी हल हो गई है। घर के नजदीक ही फसल बिक जाती है। इससे खर्चा कम आता है तथा दाम सही मिल जाते हैं।
उद्यान विभाग के उपनिदेशक बीसी राणा ने कहा कि जिला के कम ऊंचाई वाले क्षेत्रों की जलवायु अनार की फसल के लिए उपयुक्त है। जिला में 900 हेक्टेयर क्षेत्र में अनार की खेती की जा रही है। 3 हजार से 35 सौ मीट्रिक टन पैदावार हो रही है। उन्होंने कहा कि उद्यान तकनीकी मिशन तथा राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत बागवानों को लाभान्वित किया जा रहा है।
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