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प्याज की तीस फीसदी फसल चौपट
Kullu
Updated Thu, 03 May 2012 12:00 PM IST
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खराहल (कुल्लू)। जिला कुल्लू की लोअर बेल्ट में सैकड़ों बीघा भूमि पर बीजी प्याज की फसल पर थ्रीप्स रोग ने कहर बरपाना शुरू कर दिया है। इस बीमारी से जिला में करीब तीस फीसदी फसल प्रभावित हुई है।
थ्रीप्स एक ऐसा कीट है जो फसल के फूल और शाखाओं का रस चूसकर पौधों को भारी क्षति पहुंचाता है। इस कारण फसल की पैदावार पर विपरीत असर पड़ता है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि मौसम के बदलते मिजाज के चलते प्याज की फसल को थ्रीप्स ने जकड़ा है। वैज्ञानिकों ने थ्रीप्स की रोकथाम के लिए किसानों को साईप्रोमेथरिन तथा डायथेन, वेवस्टीन दवाइयों का छिड़काव करने सलाह दी है। किसानों को एक बीघा भूमि पर प्याज की बिजाई से करीब 20 हजार की आमदनी होती है और लोअर बेल्ट में प्याज की फसल को नगदी फसल के रूप में तरजीह दी जाने लगी है।
प्याज उत्पादक रोशन ठाकुर, रूम सिंह, सुशील भंडारी, सतीश ठाकुर, संजीव शर्मा, गीता, निर्मला, ज्ञान ठाकुर, कर्मचंद, मोहर सिंह, वीर सिंह ध्यान चंद, राजकुमार, चुनी लाल और रामनाथ ने बताया कि तापमान में एकाएक वृद्धि और गिरावट के चलते प्याज की फसल पर थ्रीप्स का कहर बढ़ गया है। इस बीमारी से प्याज की करीब 30 फीसदी फसल प्रभावित हुई है। प्याज बीज उत्पादक कंपनी के प्रबंधक डा. सीपी सिंह ने कहा कि किसानों को साईप्रोमेथिन और डायथेन, वेवस्टिन की स्प्रे समय रहते करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जिन खेतों में बीमारी का प्रकोप अधिक है वहां पंद्रह दिन के अंतराल के बाद इन दवाइयों का छिड़काव दोबारा करें।
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कृषि विभाग के उपनिदेशक ज्ञान चंद ठाकुर ने कहा कि बारिश के बाद एकाएक गर्मी और फिर ठंड के कारण फसलों को नुकसान पहुंच रहा है। अब प्याज की फसल पर थ्रीप्स का कहर बरपा है, लेकिन विभाग के पास बीमारी पर अंकुश लगाने के लिए तमाम दवाइयां मौजूद हैं।
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थ्रीप्स एक ऐसा कीट है जो फसल के फूल और शाखाओं का रस चूसकर पौधों को भारी क्षति पहुंचाता है। इस कारण फसल की पैदावार पर विपरीत असर पड़ता है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि मौसम के बदलते मिजाज के चलते प्याज की फसल को थ्रीप्स ने जकड़ा है। वैज्ञानिकों ने थ्रीप्स की रोकथाम के लिए किसानों को साईप्रोमेथरिन तथा डायथेन, वेवस्टीन दवाइयों का छिड़काव करने सलाह दी है। किसानों को एक बीघा भूमि पर प्याज की बिजाई से करीब 20 हजार की आमदनी होती है और लोअर बेल्ट में प्याज की फसल को नगदी फसल के रूप में तरजीह दी जाने लगी है।
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प्याज उत्पादक रोशन ठाकुर, रूम सिंह, सुशील भंडारी, सतीश ठाकुर, संजीव शर्मा, गीता, निर्मला, ज्ञान ठाकुर, कर्मचंद, मोहर सिंह, वीर सिंह ध्यान चंद, राजकुमार, चुनी लाल और रामनाथ ने बताया कि तापमान में एकाएक वृद्धि और गिरावट के चलते प्याज की फसल पर थ्रीप्स का कहर बढ़ गया है। इस बीमारी से प्याज की करीब 30 फीसदी फसल प्रभावित हुई है। प्याज बीज उत्पादक कंपनी के प्रबंधक डा. सीपी सिंह ने कहा कि किसानों को साईप्रोमेथिन और डायथेन, वेवस्टिन की स्प्रे समय रहते करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जिन खेतों में बीमारी का प्रकोप अधिक है वहां पंद्रह दिन के अंतराल के बाद इन दवाइयों का छिड़काव दोबारा करें।
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कृषि विभाग के उपनिदेशक ज्ञान चंद ठाकुर ने कहा कि बारिश के बाद एकाएक गर्मी और फिर ठंड के कारण फसलों को नुकसान पहुंच रहा है। अब प्याज की फसल पर थ्रीप्स का कहर बरपा है, लेकिन विभाग के पास बीमारी पर अंकुश लगाने के लिए तमाम दवाइयां मौजूद हैं।