{"_id":"5a3fc9464f1c1b3c3d8bfb48","slug":"91514129734-kullu-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"मौसम की बेरूखी से सेब चिलिंग ऑवर्स पर संकट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मौसम की बेरूखी से सेब चिलिंग ऑवर्स पर संकट
Updated Sun, 24 Dec 2017 09:31 PM IST
विज्ञापन
apple
- फोटो : amarujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
खराहल (कुल्लू)। मौसम की बेरुखी के कारण अब सेब के लिए जरूरी चिलिंग ऑवर्स पर संकट मंडरा रहा है। पर्याप्त चिलिंग ऑवर्स पूरे नहीं होने पर सेब की पैदावार पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। मौसम में परिवर्तन होने के कारण एक रिपोर्ट के अनुसार हर वर्ष छह घंटे चिलिंग ऑवर्स कम हो रहे है। इसका मुख्य कारण समय पर बर्फबारी और बारिश न होना बताया जा रहा है। वहीं, जंगलों की तादाद भी कम हो रही है। इसका असर अब मौसम के परिवर्तन के तौर पर देखा जा रहा हैं। ऐसे में कृषि और बागवानी भी इसके कारण प्रभावित हो रही है।
बागवानी विभाग के विशेषज्ञों के अनुसार सेब की बेहतर पैदावार के लिए 1200 से 1600 घंटे चिलिंग ऑवर्स का होना लाजिमी है। कुछ सालों में बर्फबारी असमय पर होने के कारण चिलिंग ऑवर्स भी पर्याप्त कम हो रहे है। इससे सबसे ज्यादा विपरित असर सेब की पैदावार पर पड़ रहा है। पहले दिसंबर और जनवरी में माह में पर्याप्त हिमपात सेब उत्पादित क्षेत्रों में होता था। ऐसे में सेब का गुणवत्ता भी उम्दा दर्ज की होती थी। इस संबंध में इलाके के बागवान अमित, चमन, अशोक ठाकुर, राम चंद, कर्मचंद, ज्ञान ठाकुर, कैलाश ठाकुर, महेश शर्मा, सुंदर श्याम, चुनी लाल तथा रामनाथ ठाकुर आदि का कहना है कि समय पर बर्फबारी नहीं होने से चिलिंग ऑवर्स भी समय पर पूरे नहीं हो पाने से सेब पैदावार पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। ऐसे में सेब उत्पादन पर भी असर हो सकता है।
बागवानी विभाग के उपनिदेशक डॉ. आरके शर्मा कहते हैं कि बर्फबारी की संभावना मार्च तक है। जनवरी, फरवरी और मार्च में बर्फबारी बेहतर होती है तो निश्चित तौर पर चिलिंग ऑवर्स पूरे हो जाएंगे। सेब पौधों के लिए सर्दियों में सात डिग्री तापमान 1200 से 1600 घंटे रहना जरूरी है। इससे सेब की पैदावार उम्दा हो जाती है।
विज्ञापन
विज्ञापन
बागवानी विभाग के विशेषज्ञों के अनुसार सेब की बेहतर पैदावार के लिए 1200 से 1600 घंटे चिलिंग ऑवर्स का होना लाजिमी है। कुछ सालों में बर्फबारी असमय पर होने के कारण चिलिंग ऑवर्स भी पर्याप्त कम हो रहे है। इससे सबसे ज्यादा विपरित असर सेब की पैदावार पर पड़ रहा है। पहले दिसंबर और जनवरी में माह में पर्याप्त हिमपात सेब उत्पादित क्षेत्रों में होता था। ऐसे में सेब का गुणवत्ता भी उम्दा दर्ज की होती थी। इस संबंध में इलाके के बागवान अमित, चमन, अशोक ठाकुर, राम चंद, कर्मचंद, ज्ञान ठाकुर, कैलाश ठाकुर, महेश शर्मा, सुंदर श्याम, चुनी लाल तथा रामनाथ ठाकुर आदि का कहना है कि समय पर बर्फबारी नहीं होने से चिलिंग ऑवर्स भी समय पर पूरे नहीं हो पाने से सेब पैदावार पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। ऐसे में सेब उत्पादन पर भी असर हो सकता है।
विज्ञापन
बागवानी विभाग के उपनिदेशक डॉ. आरके शर्मा कहते हैं कि बर्फबारी की संभावना मार्च तक है। जनवरी, फरवरी और मार्च में बर्फबारी बेहतर होती है तो निश्चित तौर पर चिलिंग ऑवर्स पूरे हो जाएंगे। सेब पौधों के लिए सर्दियों में सात डिग्री तापमान 1200 से 1600 घंटे रहना जरूरी है। इससे सेब की पैदावार उम्दा हो जाती है।
विज्ञापन