खराहल (कुल्लू)। जिला कुल्लू के विभिन्न क्षेत्रों में खेतों में पर्याप्त नमी के अभाव के कारण नकदी फसल लहसुन की बिजाई अटकी है। हालांकि सिंचित इलाके में 20 प्रतिशत लहसुन की बिजाई का काम हो चुका है, लेकिन असिंचित क्षेत्रों में नमी की कमी के चलते अभी इसका कार्य रूका हुआ हैं। ऐसे में किसान अपनी फसल के प्रति काफी चिंतित नजर आ रहा है। जिला कुल्लू में लहसुन की खेती करीब 1200 हेक्टेयर भूमि पर हो रही है। कुछ सालों लहसुन की खेती की ओर किसानों का रूझान काफी बढ़ गया है, लेकिन मौसम की बेरूखी के चलते फिलहाल बिजाई रूकी पड़ी है। लहसुन की बिजाई के लिए अक्तूबर माह का दूसरा पखवाड़ा बेहतर माना जाता है। आने वाले दिनों में बारिश नहीं हुई तो इसकी पैदावार पर प्रतिकूल असर होने की आशंका जाहिर की जा रही है। इस संबंध में घाटी के किसान अमित, चमन कुमार, मोहर सिंह, अनूप राम, रोशन लाल, देवराज, सुरेश, योग राज, छवींद्र, लाल चंद, प्रताप, प्रेम चंद, मुनीष भंडारी तथा संजीव आदि के अनुसार बारिश समय पर नहीं होने के कारण खेतों में नमी न के बराबर है। ऐसे में नकदी फसल लहसुन का काम लटका है। समय पर कार्य न होने के कारण आगामी फसल के उत्पादन पर भी असर हो सकता है। वहीं कृषि विकास अधिकारी मनोज गौतम के अनुसार बारिश न होने के कारण खेतों नमी का अभाव है। ऐसे में नकदी फसल लहसुन सहित अन्य फसलों की बिजाई रूकी हुई है। लहसुन बिजाई का बेहतरीन समय अक्तूबर माह का अंतिम सप्ताह है। लिहाजा सिंचित क्षेत्रों में किसानों को इसकी बिजाई करनी चाहिए।