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ब्यास व गौमती संगम पर मार्कंडेय ऋषि ने किया स्नान
Updated Sat, 14 Apr 2018 10:12 PM IST
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ब्यास और गौमती संगम पर
मार्कंडेय ऋषि ने किया स्नान
देवता ने माता धरती के सीने से लगकर पिया दूध
ऋषि संग सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भी लगाई डुबकी
अमर उजाला ब्यूरो
कुल्लू। जिला कुल्लू के मकराहड़ में शनिवार को ब्यास और गौमती नदी संगम स्थल पर अधिष्ठाता देव मार्कंडेय ऋषि ने शाही स्नान किया। शाही स्नान में देवता मार्कंडेय ऋषि के साथ सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भी आस्था की डुबकी लगाई। बैसाख पर्व पर देवता के रथ को शाही स्नान से पूर्व विशेष रूप से सजाया गया।
ढोल-नगाड़ों और नरसिंगों के साथ देवता पूरे लाव लश्कर के साथ मकराहड़ के लिए रवाना हुए। शनिवार दोपहर देव रथ ब्यास और गौमती नदी तट पर पहुंचे। जहां पर देवता ने शाही स्नान की रस्म को निभाया और बाद देवता मार्कंडेय ऋषि उस जगह की ओर गए जहां सैकड़ों साल पहले बैसाखी के दिन देवता का मोहरा मिला था। यहां परंपरा के निर्वहन करते हुए ऋषि ने धरती मां का दूध पीया।
देवता कमेटी के अध्यक्ष पृथी सिंह, कारदार जीवन शर्मा तथा नवल नेगी ने कहा कि देवता मार्कंडेय ऋषि ने बैसाख मेले के दौरान सैकड़ों हारियानों के साथ ब्यास और गौमती नदी संगम स्थल मकराहड़ में स्नान किया। सैकड़ों साल पहले बैसाखी के ही दिन खेत से देवता का मोहरा मिला था। जिसके बाद देवता मार्कंडेय ऋषि की यहां स्थापना हुई थी। मान्यता के अनुसार आज भी खेत से दूध की धार निकलती है। देवता के गूर को आज भी यहां दूध की धारा निकलती नजर आती है। संगम स्थल में स्नान करने से कई कष्टों से मुक्ति मिलती है।
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टील और शांघड़ में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
बंजार/न्यूली (कुल्लू) उपमंडल बंजार के टील पंचायत और शांघड पंचायत के आराध्य देवता शंगचूल महादेव के देवालय में बैसाख संक्रांति पर दर्शनों के लिए भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी। टील पंचायत में देवता से आशीर्वाद लेने के लिए शनिवार सुबह से लोगों को तांता लगा रहा। देवता शंगचूल शांघड के पुजारी देवेंद्र शर्मा, पुजारी टील शंगचूल महादेव मोहन लाल, राम लाल और कारदार गोपी चौहान का कहना है कि बैसाख संक्रांति को देवता में शक्तियों का संचार होता है। ऐसे में लोग देवता के पास अपने दुखों को दूर करने के लिए पहुंचते हैं।
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मार्कंडेय ऋषि ने किया स्नान
देवता ने माता धरती के सीने से लगकर पिया दूध
ऋषि संग सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भी लगाई डुबकी
अमर उजाला ब्यूरो
कुल्लू। जिला कुल्लू के मकराहड़ में शनिवार को ब्यास और गौमती नदी संगम स्थल पर अधिष्ठाता देव मार्कंडेय ऋषि ने शाही स्नान किया। शाही स्नान में देवता मार्कंडेय ऋषि के साथ सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भी आस्था की डुबकी लगाई। बैसाख पर्व पर देवता के रथ को शाही स्नान से पूर्व विशेष रूप से सजाया गया।
ढोल-नगाड़ों और नरसिंगों के साथ देवता पूरे लाव लश्कर के साथ मकराहड़ के लिए रवाना हुए। शनिवार दोपहर देव रथ ब्यास और गौमती नदी तट पर पहुंचे। जहां पर देवता ने शाही स्नान की रस्म को निभाया और बाद देवता मार्कंडेय ऋषि उस जगह की ओर गए जहां सैकड़ों साल पहले बैसाखी के दिन देवता का मोहरा मिला था। यहां परंपरा के निर्वहन करते हुए ऋषि ने धरती मां का दूध पीया।
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देवता कमेटी के अध्यक्ष पृथी सिंह, कारदार जीवन शर्मा तथा नवल नेगी ने कहा कि देवता मार्कंडेय ऋषि ने बैसाख मेले के दौरान सैकड़ों हारियानों के साथ ब्यास और गौमती नदी संगम स्थल मकराहड़ में स्नान किया। सैकड़ों साल पहले बैसाखी के ही दिन खेत से देवता का मोहरा मिला था। जिसके बाद देवता मार्कंडेय ऋषि की यहां स्थापना हुई थी। मान्यता के अनुसार आज भी खेत से दूध की धार निकलती है। देवता के गूर को आज भी यहां दूध की धारा निकलती नजर आती है। संगम स्थल में स्नान करने से कई कष्टों से मुक्ति मिलती है।
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टील और शांघड़ में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
बंजार/न्यूली (कुल्लू) उपमंडल बंजार के टील पंचायत और शांघड पंचायत के आराध्य देवता शंगचूल महादेव के देवालय में बैसाख संक्रांति पर दर्शनों के लिए भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी। टील पंचायत में देवता से आशीर्वाद लेने के लिए शनिवार सुबह से लोगों को तांता लगा रहा। देवता शंगचूल शांघड के पुजारी देवेंद्र शर्मा, पुजारी टील शंगचूल महादेव मोहन लाल, राम लाल और कारदार गोपी चौहान का कहना है कि बैसाख संक्रांति को देवता में शक्तियों का संचार होता है। ऐसे में लोग देवता के पास अपने दुखों को दूर करने के लिए पहुंचते हैं।