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परंपरागत तरीके से हुई शिव की पूजा अर्चना
Updated Tue, 13 Feb 2018 10:33 PM IST
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कुल्लू में धूमधाम से मनाई शिवरात्रि
कुल्लू। उपमंडल बंजार में शिवरात्रि पारंपरिक अंदाज में मनाई गई। मंदिर गौशाला के देवता बुंगडू महादेव, माता दुआला शिव मंदिर, ईश्वर महादेव आदि मंदिरों में सुबह से ही भक्तों की भीड़ रही। वहीं उपमंडल के देवालयों में भी भगवान शिव की पूजा करने तथा दर्शनों के लिए लोगों की भीड़ लगी रही। मंदिरों में भजन कीर्तन के साथ ही श्रद्धालुओं में प्रसाद भी बांटा गया।
हारियान रोशन लाल, अमर चंद, नानक, उदय शर्मा और कविता के अनुसार शिवरात्रि की बेला पर यहां पर निभाई जाने वाली परंपरा भी शुरू हो गई है। बंजार में शिवरात्रि के दिन सभी गांववासी उन्हीं घरों में जा कर शिवरात्रि पर्व को मनाते हैं। घर मालिक द्वारा शिवरात्रि के दिन समस्त गांववासियों को धाम दी जाती है। पूरी रात उस घर में शिव महिमा में गीत गाए जाते हैं। शिवरात्रि के दिन उक्त घरों में पाजों नामक पेड़ तथा नईर के फुल से सांई अर्थात शिव जी स्वरूप बनाया जाता है। इसमें केमटू नामक फल लगाया जाता है। सुबह के चार बजे साईं को घर से बाहर गीत गाते हुए निकाला जाता है।
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कुल्लू। उपमंडल बंजार में शिवरात्रि पारंपरिक अंदाज में मनाई गई। मंदिर गौशाला के देवता बुंगडू महादेव, माता दुआला शिव मंदिर, ईश्वर महादेव आदि मंदिरों में सुबह से ही भक्तों की भीड़ रही। वहीं उपमंडल के देवालयों में भी भगवान शिव की पूजा करने तथा दर्शनों के लिए लोगों की भीड़ लगी रही। मंदिरों में भजन कीर्तन के साथ ही श्रद्धालुओं में प्रसाद भी बांटा गया।
हारियान रोशन लाल, अमर चंद, नानक, उदय शर्मा और कविता के अनुसार शिवरात्रि की बेला पर यहां पर निभाई जाने वाली परंपरा भी शुरू हो गई है। बंजार में शिवरात्रि के दिन सभी गांववासी उन्हीं घरों में जा कर शिवरात्रि पर्व को मनाते हैं। घर मालिक द्वारा शिवरात्रि के दिन समस्त गांववासियों को धाम दी जाती है। पूरी रात उस घर में शिव महिमा में गीत गाए जाते हैं। शिवरात्रि के दिन उक्त घरों में पाजों नामक पेड़ तथा नईर के फुल से सांई अर्थात शिव जी स्वरूप बनाया जाता है। इसमें केमटू नामक फल लगाया जाता है। सुबह के चार बजे साईं को घर से बाहर गीत गाते हुए निकाला जाता है।
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