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एडवांस सेलरी बहाली को नई सरकार पर टिकी नजरें
Updated Sat, 23 Dec 2017 06:52 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
केलांग (लाहौल-स्पीति)। जनजातीय क्षेत्रों में एडवांस सैलरी की व्यवस्था पुन: बहाल करने की मांग को लेकर कर्मचारी संघों ने मोर्चा खोल दिया है। हालांकि, चुनाव से पहले तीनों जनजातीय हलकों के भाजपा प्रत्याशी कर्मचारियों को अपना समर्थन जता चुके हैं। कर्मचारियों को उम्मीद है कि नई सरकार उनके व्यापक हित को ध्यान में रखते हुए जनजातीय इलाकों में एडवांस सैलरी की व्यवस्था फिर से बहाल करेगी। लाहौल-स्पीति कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष मेघ चंद प्रभुजी, महासचिव राजेश गौतम और किन्नौर के अध्यक्ष दोरजे ने कहा कि एडवांस सैलरी व्यवस्था बंद करने से कर्मचारियों ओर अधिकारियों को भारी आर्थिक संकट के दौर से गुजरना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों को आज भी सर्दियों के लिए छह महीने का राशन, बालन लकड़ी समेत अन्य जरूरी सामान एकमुश्त खरीदना पड़ रहा है। मासिक वेतन पर यह कर पाना संभव नहीं है। प्रभुजी ने कहा कि एडवांस सैलरी की व्यवस्था बंद होने के बाद जनजातीय क्षेत्रों से बाहर के कर्मचारी इन क्षेत्रों में सेवाएं देने से कतराएंगे। जनजातीय कर्मचारी महासंघ के जिला अध्यक्ष प्रेम ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने एडवांस सैलरी व्यवस्था पर रोक लगा कर हजारों कर्मचारियों के हितों पर कुठाराघात किया है। तीनों जनजातीय क्षेत्रों में करीब छह हजार अधिकारी और कर्मचारी तैनात हैं। महासंघ ने कहा कि पुरानी व्यवस्था को फिर से बहाल नहीं किया गया तो कर्मचारियों को मजबूरन आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगा। लाहौल-स्पीति से नवनिर्वाचित भाजपा विधायक डॉ. रामलाल मार्कंडेय और भरमौर के विधायक जिया लाल कपूर ने कहा कि विधानसभा में कर्मचारियों के इस मसले को प्रमुखता से उठाया जाएगा।
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केलांग (लाहौल-स्पीति)। जनजातीय क्षेत्रों में एडवांस सैलरी की व्यवस्था पुन: बहाल करने की मांग को लेकर कर्मचारी संघों ने मोर्चा खोल दिया है। हालांकि, चुनाव से पहले तीनों जनजातीय हलकों के भाजपा प्रत्याशी कर्मचारियों को अपना समर्थन जता चुके हैं। कर्मचारियों को उम्मीद है कि नई सरकार उनके व्यापक हित को ध्यान में रखते हुए जनजातीय इलाकों में एडवांस सैलरी की व्यवस्था फिर से बहाल करेगी। लाहौल-स्पीति कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष मेघ चंद प्रभुजी, महासचिव राजेश गौतम और किन्नौर के अध्यक्ष दोरजे ने कहा कि एडवांस सैलरी व्यवस्था बंद करने से कर्मचारियों ओर अधिकारियों को भारी आर्थिक संकट के दौर से गुजरना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों को आज भी सर्दियों के लिए छह महीने का राशन, बालन लकड़ी समेत अन्य जरूरी सामान एकमुश्त खरीदना पड़ रहा है। मासिक वेतन पर यह कर पाना संभव नहीं है। प्रभुजी ने कहा कि एडवांस सैलरी की व्यवस्था बंद होने के बाद जनजातीय क्षेत्रों से बाहर के कर्मचारी इन क्षेत्रों में सेवाएं देने से कतराएंगे। जनजातीय कर्मचारी महासंघ के जिला अध्यक्ष प्रेम ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने एडवांस सैलरी व्यवस्था पर रोक लगा कर हजारों कर्मचारियों के हितों पर कुठाराघात किया है। तीनों जनजातीय क्षेत्रों में करीब छह हजार अधिकारी और कर्मचारी तैनात हैं। महासंघ ने कहा कि पुरानी व्यवस्था को फिर से बहाल नहीं किया गया तो कर्मचारियों को मजबूरन आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगा। लाहौल-स्पीति से नवनिर्वाचित भाजपा विधायक डॉ. रामलाल मार्कंडेय और भरमौर के विधायक जिया लाल कपूर ने कहा कि विधानसभा में कर्मचारियों के इस मसले को प्रमुखता से उठाया जाएगा।