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600 देवी-देवता आज से जप-तप में होंगे लीन
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कुल्लू। कुल्लू-मंडी जिले के 600 से अधिक देवी-देवता पोष माह की संक्रांति से एक से तीन माह के लिए जप-तप में लीन होने के लिए स्वर्ग प्रवास पर जाएंगे। गढ़पति ईश्वर महादेव के कपाट पांच और बिजली महादेव के कपाट तीन माह तक बंद रहेंगे। एक माह तक शादी-विवाह और अन्य शुभ कार्यों पर विराम लग जाएगा। देवी-देवताओं के नरोल में जाने से देवरथों की पूजा-अर्चना भी नहीं होगी। मंदिरों के कपाट भी एक से तीन माह के लिए बंद हो जाएंगे।
माना जाता है कि पोष माह के दौरान देवता तपस्या में लीन होकर घाटी की खुशहाली और सुख-समद्धि के लिए शक्तियां अर्जित करते हैं। देवता के सभी पुजारी और कारदार देवरथ को लाल वस्त्र से ढकते हैं। मंदिरों के कपाट भी बंद कर दिए जाते हैं। कुछ क्षेत्रों में देवताओं के निशानों की पूजा की जाती है। जिला देवी-देवता कारदार संघ केे अध्यक्ष दोतराम ठाकुर ने कहा कि पोष संक्रांति के चलते जिला कुल्लू के सैकड़ों देवी-देवता एक से तीन माह तक स्वर्ग प्रवास पर जाएंगे।
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ये देवी-देवता जाएंगे स्वर्ग प्रवास पर
गढ़पति ईश्वर महादेव, बिजली महादेव, खुडीजल, बुंगडू महादेव, चार छमाहूं, शंचूल महादेव, शृंगा ऋषि, बालू नाग, शेष नाग, माता काली, शैटीनाग, लक्ष्मी नारायण, ऋषि मार्कंडेय, लक्ष्मीनारायण, तुंगासी, लोमश ऋषि, गाड़ा दुर्गा, पंचालिका, अंबिका, काढ़ेनाग, विठ्ठु नारायण, पुंरडरिक ऋषि, शंगचूल महादेव, नारायण सहित अन्य सैकड़ों देवी-देवता देवालयों को छोड़कर अपनी तपस्या में लीन होंगे।
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ये देवता नहीं जाते नरोल में
जिले में कुछ ऐसे में देवी-देवता जो अपनी तपस्या में लीन नहीं होते हैं, ये देवता सदैव नरोल से बाहर ही रहते हैं। इनमें देव विभूषण, बड़ा देव मतलोड़ा, चुंजवाला महादेव, विठ्ठू नारायण, घटोत्कछ, दैत्य, भैरव सहित अन्य देवी-देवता शामिल हैं।
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पांच माह बाद लौटेंगे ईश्वर महादेव
उपमंडल बंजार के पलाईच घाटी के गढ़पति ईश्वर महादेव का पांच माह का सबसे लंबा नरोल होता है। देवता अब अप्रैल माह की मकर संक्रांति को अपने देवालय लौटेंगे। मंडी-कुल्लू जिले में ईश्वर महादेव का लंबा नरोल है। जो पांच माह तक तपस्या में लीन रहते हैं।
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माना जाता है कि पोष माह के दौरान देवता तपस्या में लीन होकर घाटी की खुशहाली और सुख-समद्धि के लिए शक्तियां अर्जित करते हैं। देवता के सभी पुजारी और कारदार देवरथ को लाल वस्त्र से ढकते हैं। मंदिरों के कपाट भी बंद कर दिए जाते हैं। कुछ क्षेत्रों में देवताओं के निशानों की पूजा की जाती है। जिला देवी-देवता कारदार संघ केे अध्यक्ष दोतराम ठाकुर ने कहा कि पोष संक्रांति के चलते जिला कुल्लू के सैकड़ों देवी-देवता एक से तीन माह तक स्वर्ग प्रवास पर जाएंगे।
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ये देवी-देवता जाएंगे स्वर्ग प्रवास पर
गढ़पति ईश्वर महादेव, बिजली महादेव, खुडीजल, बुंगडू महादेव, चार छमाहूं, शंचूल महादेव, शृंगा ऋषि, बालू नाग, शेष नाग, माता काली, शैटीनाग, लक्ष्मी नारायण, ऋषि मार्कंडेय, लक्ष्मीनारायण, तुंगासी, लोमश ऋषि, गाड़ा दुर्गा, पंचालिका, अंबिका, काढ़ेनाग, विठ्ठु नारायण, पुंरडरिक ऋषि, शंगचूल महादेव, नारायण सहित अन्य सैकड़ों देवी-देवता देवालयों को छोड़कर अपनी तपस्या में लीन होंगे।
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ये देवता नहीं जाते नरोल में
जिले में कुछ ऐसे में देवी-देवता जो अपनी तपस्या में लीन नहीं होते हैं, ये देवता सदैव नरोल से बाहर ही रहते हैं। इनमें देव विभूषण, बड़ा देव मतलोड़ा, चुंजवाला महादेव, विठ्ठू नारायण, घटोत्कछ, दैत्य, भैरव सहित अन्य देवी-देवता शामिल हैं।
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पांच माह बाद लौटेंगे ईश्वर महादेव
उपमंडल बंजार के पलाईच घाटी के गढ़पति ईश्वर महादेव का पांच माह का सबसे लंबा नरोल होता है। देवता अब अप्रैल माह की मकर संक्रांति को अपने देवालय लौटेंगे। मंडी-कुल्लू जिले में ईश्वर महादेव का लंबा नरोल है। जो पांच माह तक तपस्या में लीन रहते हैं।
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