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लाहौल में होगी हिमालिनी प्रजाति के बीज आलू की पैदावार

Tue, 10 Apr 2018 10:24 PM IST
Updated Tue, 10 Apr 2018 10:24 PM IST
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लाहौल में होगी हिमालिनी प्रजाति के बीज आलू की पैदावार
लाहौल में हिमालिनी प्रजाति के बीज आलू तैयार
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वैज्ञानिकों का दावा, कुफरी ज्योति बीज आलू के मुकाबले बेहतर
सफल परीक्षण के बाद बड़े स्तर पर हो रही उत्पादन की तैयारी
दिनेश जस्पा
उदयपुर (लाहौल-स्पीति)। प्रदेश के जनजातीय क्षेत्र लाहौल घाटी में अब बीज आलू की नई प्रजाति हिमालिनी की पैदावारी होगी। इस बीज की खासियत यह है कि इसमें आलू की पैदावारी अधिक और लेट ब्लाइट की शिकायत भी न के बराबर होगी। कृषि वैज्ञानिक यहां 48 सालों से उत्पादित कुफरी ज्योति बीज आलू की जगह हिमालिनी वैरायटी के बीज आलू का परीक्षण करने में जुटे हैं। इसके सकारात्मक परिणाम भी सामने आए है।
सरकार की ओर से वर्षों से किसानों को अनुदान पर दी जाने वाली मटर बीज की प्रजाति आजाद पी-वन की जगह नई वैरायटी पीबी-89 को यहां की जमीन के लिए बेहतर परखा है। कृषि विज्ञान केंद्र कुकुमसेरी के वैज्ञानिकों ने आलू व मटर के इन दो किस्मों के बीजों का सफल परीक्षण के बाद यह दावा किया है। लाहौल के किसानों को अब यहां के लिए नई बीज आलू व मटर की किस्में हिमालिनी और पीबी-89 मटर बीज को परखना चाहिए। कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि इस बारे में प्रदेश सरकार से बात की जाऐगी। बावजूद कृषि विज्ञान केंद्र कुकुमसेरी के वैज्ञानिक लाहौल घाटी में अब बीज आलू की नई किस्म हिमालिनी की बड़े स्तर पर उत्पादन करने की तैयारी में है। इसके सकारात्मक परिणाम सामने आने के बाद वैज्ञानिकों ने यहां की जमीन के लिए हिमालिनी बीज आलू को कुफरी ज्योति बीज आलू से बेहतर बताया है।
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कृषि विज्ञान केंद्र कुकुमसेरी के प्रभारी वैज्ञानिक डॉ सुरेंद्र ठाकुर ने बताया कि उनकी टीम ने सीपीआरआई शिमला से कुफरी गिरिराज, गिरधारी और हिमालिनी बीज आलू की तीन किस्में लाकर सीधे किसानों के खेतों में तैयार किया है। जिसमें हिमालिनी यहां की जमीन के लिए सबसे उपयुक्त पाया है। यहां उत्पादित कुफरी बीज आलू को किसान 48 सालों से बीजते आ रहे हैं लेकिन उसमें लेट ब्लाइट की शिकायत ज्यादा रही है। जबकि हिमालिनी बीज आलू में कुुफरी ज्योति के मुकाबले पैदावार अधिक और लेट ब्लाईट की शिकायत न के बराबर है। इसको लेकर प्रदेश सरकार से बात की जाएगी जिससे यहां पर बड़े स्तर पर हिमालिनी बीज आलू को तैयार किया जा सके।
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