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आग की लपटों के बीच सुरक्षित निकाला देवता का रथ
Updated Sun, 18 Nov 2018 06:47 PM IST
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देव रथ
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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कुल्लू। वर्ष 2015 में सैंज के शांघड़ गांव में भीषण अग्निकांड से देवता शंगचूल महादेव का मंदिर भी जलकर राख हो गया था। ग्रामीण इस भीषण अग्निकांड से उभर भी नहीं पाए थे कि अब शांघड़ के साथ सटे बरशांघड़ गांव में एक चार मंजिला निर्माणाधीन मंदिर जल गया है। इस अग्निकांड ने शांघड़ व बरशांघड़ गांव के लोगों को झकझोर कर रख दिया है।
हालांकि ग्रामीणों ने आग की लपटों के बीच अपने अधिष्ठाता देवता के रथ को सुरक्षित बचा लिया। ऐसा ही मंजर वर्ष 2015 को शांघड़ में हुआ था। यहां देवता शंगचूल महादेव का भव्य चार मंजिला देवालय भीषण अग्निकांड में जलकर राख हो गया है। इसमें जोगनी के मूर्तियां भी जल गई थी। इसमें भी कई परिवार बेघर हो गए थे। लेकिन बरशांघड़ की घटना ने शांघड़ के हादसे के जख्मों को ताजा कर दिया है। जिले में साल दर साल आग की घटनाओं से करोड़ों की संपत्ति जलकर राख हो रही है। नवंबर 2015 को बंजार घाटी के कोटला गांव में लगी आग से 100 से अधिक परिवारों के सिर से छत छीन गई थी। इस अग्निकांड में भी देवता बड़ा छमाहू का मंदिर समेत गांव में चार अन्य मंदिर भी जल गए थे। बंजार के घियागी गांव में मई 2018 को लगी आग से 21 परिवार बेघर हुए थे। इसमें आठ मकान व एक दर्जन से अधिक गौशालाएं राख के ढेर में तबदील हो गई थी। दिसंबर 2017 को बाहू गांव में 11 परिवार के अलावा बंजार के मोहनी, सोलंग गांव ऊझी घाटी के धामा, खराहल के गाहर, दिवाली के दिन पारली पंचायत के आईशा में करोड़ों की संपत्ति राख हो गई थी। इन घटनाओं में कई मवेशी जिंदा जल गए थे। जिला कुल्लू आपदा के जोन पांच में आता है। इनमें बाढ़, भूकंप व आग की घटनाएं शामिल हैं। एडीएम कुल्लू अक्षय सूद ने कहा कि सर्दी के दिनों में आग की वारदातें अधिक होती हैं। ऐसे में लोगों को पशुओं के चारे को गांव से दूर रखना चाहिए। इससे आग के नुकसान को कम किया जा सकता है।
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हालांकि ग्रामीणों ने आग की लपटों के बीच अपने अधिष्ठाता देवता के रथ को सुरक्षित बचा लिया। ऐसा ही मंजर वर्ष 2015 को शांघड़ में हुआ था। यहां देवता शंगचूल महादेव का भव्य चार मंजिला देवालय भीषण अग्निकांड में जलकर राख हो गया है। इसमें जोगनी के मूर्तियां भी जल गई थी। इसमें भी कई परिवार बेघर हो गए थे। लेकिन बरशांघड़ की घटना ने शांघड़ के हादसे के जख्मों को ताजा कर दिया है। जिले में साल दर साल आग की घटनाओं से करोड़ों की संपत्ति जलकर राख हो रही है। नवंबर 2015 को बंजार घाटी के कोटला गांव में लगी आग से 100 से अधिक परिवारों के सिर से छत छीन गई थी। इस अग्निकांड में भी देवता बड़ा छमाहू का मंदिर समेत गांव में चार अन्य मंदिर भी जल गए थे। बंजार के घियागी गांव में मई 2018 को लगी आग से 21 परिवार बेघर हुए थे। इसमें आठ मकान व एक दर्जन से अधिक गौशालाएं राख के ढेर में तबदील हो गई थी। दिसंबर 2017 को बाहू गांव में 11 परिवार के अलावा बंजार के मोहनी, सोलंग गांव ऊझी घाटी के धामा, खराहल के गाहर, दिवाली के दिन पारली पंचायत के आईशा में करोड़ों की संपत्ति राख हो गई थी। इन घटनाओं में कई मवेशी जिंदा जल गए थे। जिला कुल्लू आपदा के जोन पांच में आता है। इनमें बाढ़, भूकंप व आग की घटनाएं शामिल हैं। एडीएम कुल्लू अक्षय सूद ने कहा कि सर्दी के दिनों में आग की वारदातें अधिक होती हैं। ऐसे में लोगों को पशुओं के चारे को गांव से दूर रखना चाहिए। इससे आग के नुकसान को कम किया जा सकता है।
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