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शैड में चल रहा रशौल स्कूल, बैठने के लिए टाट पट्टी तक नहीं
Updated Sat, 04 Aug 2018 06:28 PM IST
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शेड में चल रहा स्कूल, बैठने के लिए घर से लाते हैं बोरियां
मिडल स्कूल रशौल के पास भवन नहीं, लोगों ने अपने खर्चे पर बनाया है टीन का शेड
एक ही शेड में चल रहीं तीन कक्षाएं, मिड-डे मील का काम
अमर उजाला ब्यूरो
कुल्लू। सरकार स्कूलों को अपग्रेड तो कर देती है पर वहां पर सुविधाएं मुहैया नहीं करवाई जाती। पार्वती घाटी के कसोल के साथ लगते क्षेत्र रशौल में प्रदेश सरकार की बेहतरीन शिक्षा सुविधाओं के दावों की पोल खुल रही है। यहां शिक्षा विभाग अभी तक स्कूल भवन नहीं बनवा पाया, जबकि इसके लिए जमीन भी उपलब्ध है। रशौल स्कूल का हाल खराब है। यहां पर करीब 33 छात्रों को बैठने के लिए कमरे और डेस्क तो दूर पर टाट पट्टी तक नहीं मिल रही। बच्चों को घर से बोरी लेकर आना पड़ता है।
ग्रामीणों ने अपने स्तर पर पैसे जुटाकर रशौल मिडल स्कूल के लिए शेड बनवाया है। ऐसे में यहां पर छठी से लेकर आठवीं कक्षा तक की कक्षाएं लग रही हैं। इतना ही नहीं इसी शेड में छात्रों के लिए मिड-डे मील भी बन रहा है। कसोल से करीब दस किलोमीटर दूर रशौल गांव में मिडल स्कूल को दो वर्ष पहले स्तरोन्नत किया गया है। यहां टीन शेड में मिडल स्कूल चल रहा है। स्कूल में बैठने के लिए टाट पट्टी तक उपलब्ध नहीं है। बैठने के लिए बच्चे अपने घरों से बोरियां लाते हैं। यहां पर अध्यापकों की भी कमी है। स्कूल दो शिक्षक के सहारे चल रहा है। विद्यालय में एक ही ब्लैक बोर्ड है। बिजली, पानी व शौचालय तक की सुविधा नहीं है। पार्वती वैली युवा समिति अध्यक्ष बिजेंद्र शर्मा, उपाध्यक्ष राजेश ठाकुर, योगेश शर्मा, उज्जवल शर्मा, सुरेश कुमार, राकेश ठाकुर, दिव्यांशु, सुरेंद्र ठाकुर, परमानंद, विकास ठाकुर, तरुण सोनी, राहुल ठाकुर, विकास, योगराज लीलाधर, गुड्डू ठाकुर व अन्य ने कहा कि रशौल स्कूल में हालत खराब है। लेकिन इस ओर सरकार व प्रशासन ध्यान नहीं दे रहे। यहां पर छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है। कहा कि इस मुद्दे को लेकर सीएम जयराम ठाकुर को ज्ञापन भेजा गया है। उधर, प्रारंभिक शिक्षा विभाग के उपनिदेशक कुलवंत पठानिया ने कहा कि मामला ध्यान में नहीं है। स्कूल से मांग करने पर सभी सुविधाएं मुहैया करवाई जाएंगी।
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मिडल स्कूल रशौल के पास भवन नहीं, लोगों ने अपने खर्चे पर बनाया है टीन का शेड
एक ही शेड में चल रहीं तीन कक्षाएं, मिड-डे मील का काम
अमर उजाला ब्यूरो
कुल्लू। सरकार स्कूलों को अपग्रेड तो कर देती है पर वहां पर सुविधाएं मुहैया नहीं करवाई जाती। पार्वती घाटी के कसोल के साथ लगते क्षेत्र रशौल में प्रदेश सरकार की बेहतरीन शिक्षा सुविधाओं के दावों की पोल खुल रही है। यहां शिक्षा विभाग अभी तक स्कूल भवन नहीं बनवा पाया, जबकि इसके लिए जमीन भी उपलब्ध है। रशौल स्कूल का हाल खराब है। यहां पर करीब 33 छात्रों को बैठने के लिए कमरे और डेस्क तो दूर पर टाट पट्टी तक नहीं मिल रही। बच्चों को घर से बोरी लेकर आना पड़ता है।
ग्रामीणों ने अपने स्तर पर पैसे जुटाकर रशौल मिडल स्कूल के लिए शेड बनवाया है। ऐसे में यहां पर छठी से लेकर आठवीं कक्षा तक की कक्षाएं लग रही हैं। इतना ही नहीं इसी शेड में छात्रों के लिए मिड-डे मील भी बन रहा है। कसोल से करीब दस किलोमीटर दूर रशौल गांव में मिडल स्कूल को दो वर्ष पहले स्तरोन्नत किया गया है। यहां टीन शेड में मिडल स्कूल चल रहा है। स्कूल में बैठने के लिए टाट पट्टी तक उपलब्ध नहीं है। बैठने के लिए बच्चे अपने घरों से बोरियां लाते हैं। यहां पर अध्यापकों की भी कमी है। स्कूल दो शिक्षक के सहारे चल रहा है। विद्यालय में एक ही ब्लैक बोर्ड है। बिजली, पानी व शौचालय तक की सुविधा नहीं है। पार्वती वैली युवा समिति अध्यक्ष बिजेंद्र शर्मा, उपाध्यक्ष राजेश ठाकुर, योगेश शर्मा, उज्जवल शर्मा, सुरेश कुमार, राकेश ठाकुर, दिव्यांशु, सुरेंद्र ठाकुर, परमानंद, विकास ठाकुर, तरुण सोनी, राहुल ठाकुर, विकास, योगराज लीलाधर, गुड्डू ठाकुर व अन्य ने कहा कि रशौल स्कूल में हालत खराब है। लेकिन इस ओर सरकार व प्रशासन ध्यान नहीं दे रहे। यहां पर छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है। कहा कि इस मुद्दे को लेकर सीएम जयराम ठाकुर को ज्ञापन भेजा गया है। उधर, प्रारंभिक शिक्षा विभाग के उपनिदेशक कुलवंत पठानिया ने कहा कि मामला ध्यान में नहीं है। स्कूल से मांग करने पर सभी सुविधाएं मुहैया करवाई जाएंगी।
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