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ढाई दशकों में भी नहीं बनी इलाके में पक्की कूहलें
Updated Mon, 25 Jun 2018 10:00 PM IST
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ढाई दशकों में नहीं बनी पक्की कूहलें
28 साल पहले बनी है न्योली-थरमाण उठाऊ सिंचाई
कूहल के अभाव में नहीं हो पा रही खेतों की सिंचाई
अमी चंद भंडारी
कुल्लू/खराहल। जिला कुल्लू के साथ सटी खराहल घाटी की दो पंचायतों के लिए बनी न्योली-थरमाण उठाऊ सिंचाई योजना के तहत 28 साल बाद भी पक्की कूहलों का निर्माण नहीं हो पाया है। ऐसे किसानों के खेतों तक भरपूर पानी नहीं पहुंच पाता है। योजना 1990 में यूएसए की सहायता से बनाई गई है।
इस संबंध में इलाके के किसानों का कहना है कि सिंचाई के लिए रबड़ की चार इंच की पाइपों का अपने स्तर पर जुगाड़ कर खेतों तक पानी पहुंच रहे हैं। योजना की मुख्य पाइप भी कई जगह पर टूटी-फूटी है। जिसके कारण पानी जगह-जगह पर रिस जाता है। वही, योजना का एक पंप दो साल खराब पड़ा हुआ है। जिससे एक पंप से सिंचाई लगातार नहीं होती है। लोगों ने सिंचाई एवं जनस्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।
उन्होंने रोष जताते हुए कहा कि इसके बारे में विभाग के अधिकारियों को कई बार जानकारी दी गई, बावजूद इसके आज भी समस्या बरकरार है। इसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है। इलाके के किसान अमित, दुनी चंद, गिरधारी लाल, देवेंद्र कुमार, रितेश, नवीन कुमार, अनिश, अनूप, जय चंद, मोहर सिंह, चमन ठाकुर, संजीव, सुशील और देवराज आदि का कहना है कि योजना 1990 में बनी है। लेकिन पक्की कूहलें कई जगहों पर क्षतिग्रस्त हुई हैं। इनकी मरम्मत न होने से पानी खेतों तक पूरी तरह पहुंच नहीं पाता है। जिस घाटी की करीब 1200 बीघा खेती को पानी नहीं मिल रहा है। ऐसे में बारिश पर ही खेती टिकी हुई है। बारिश न हो तो सूखे की नौबत आ जाती है।
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योजना को व्यवस्थित ढंग से चलाने के लिए कूहलों और अन्य खामियों को दूर करने के लिए विभाग को दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसके लिए विभाग भी प्रयासरत है। किसान के खेतों तक सिंचाई के लिए पानी सुचारु रूप से उपलब्ध हो। -सुंदर सिंह ठाकुर, विधायक सदर कुल्लू
योजना को नए सिरे से बनाने के लिए विभाग ने एक करोड़ 86 लाख का एस्टीमेट नाबार्ड को भेजा है। कुछ खामियां होने के कारण ऑब्जेक्शन लगा है। इसको दोबारा भेजा गया है। धन की स्वीकृति होने पर योजना का नए सिरे से निर्माण होगा। योजना का पंप को कुछ दिनों में ठीक किया जाएगा।- केआर कुल्वी, अधिशाषी अभियंता आईपीएच कुल्लू
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28 साल पहले बनी है न्योली-थरमाण उठाऊ सिंचाई
कूहल के अभाव में नहीं हो पा रही खेतों की सिंचाई
अमी चंद भंडारी
कुल्लू/खराहल। जिला कुल्लू के साथ सटी खराहल घाटी की दो पंचायतों के लिए बनी न्योली-थरमाण उठाऊ सिंचाई योजना के तहत 28 साल बाद भी पक्की कूहलों का निर्माण नहीं हो पाया है। ऐसे किसानों के खेतों तक भरपूर पानी नहीं पहुंच पाता है। योजना 1990 में यूएसए की सहायता से बनाई गई है।
इस संबंध में इलाके के किसानों का कहना है कि सिंचाई के लिए रबड़ की चार इंच की पाइपों का अपने स्तर पर जुगाड़ कर खेतों तक पानी पहुंच रहे हैं। योजना की मुख्य पाइप भी कई जगह पर टूटी-फूटी है। जिसके कारण पानी जगह-जगह पर रिस जाता है। वही, योजना का एक पंप दो साल खराब पड़ा हुआ है। जिससे एक पंप से सिंचाई लगातार नहीं होती है। लोगों ने सिंचाई एवं जनस्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।
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उन्होंने रोष जताते हुए कहा कि इसके बारे में विभाग के अधिकारियों को कई बार जानकारी दी गई, बावजूद इसके आज भी समस्या बरकरार है। इसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है। इलाके के किसान अमित, दुनी चंद, गिरधारी लाल, देवेंद्र कुमार, रितेश, नवीन कुमार, अनिश, अनूप, जय चंद, मोहर सिंह, चमन ठाकुर, संजीव, सुशील और देवराज आदि का कहना है कि योजना 1990 में बनी है। लेकिन पक्की कूहलें कई जगहों पर क्षतिग्रस्त हुई हैं। इनकी मरम्मत न होने से पानी खेतों तक पूरी तरह पहुंच नहीं पाता है। जिस घाटी की करीब 1200 बीघा खेती को पानी नहीं मिल रहा है। ऐसे में बारिश पर ही खेती टिकी हुई है। बारिश न हो तो सूखे की नौबत आ जाती है।
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योजना को व्यवस्थित ढंग से चलाने के लिए कूहलों और अन्य खामियों को दूर करने के लिए विभाग को दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसके लिए विभाग भी प्रयासरत है। किसान के खेतों तक सिंचाई के लिए पानी सुचारु रूप से उपलब्ध हो। -सुंदर सिंह ठाकुर, विधायक सदर कुल्लू
योजना को नए सिरे से बनाने के लिए विभाग ने एक करोड़ 86 लाख का एस्टीमेट नाबार्ड को भेजा है। कुछ खामियां होने के कारण ऑब्जेक्शन लगा है। इसको दोबारा भेजा गया है। धन की स्वीकृति होने पर योजना का नए सिरे से निर्माण होगा। योजना का पंप को कुछ दिनों में ठीक किया जाएगा।- केआर कुल्वी, अधिशाषी अभियंता आईपीएच कुल्लू