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नाटक मुत्युंजय में दिखी महाभारत की झलक
Updated Sat, 24 Mar 2018 09:40 PM IST
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कुल्लू कॉलेज में सृजन कार्यक्रम समापन अवसर पर नाटी डालती छात्राएं।
- फोटो : अमर उजाला
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अमर उजाला ब्यूरो
कुल्लू। ऐतिहासिक कलाकेंद्र में छह दिवसीय हिमाचल नाट्य महोत्सव का आगाज हो गया है। महोत्सव का शुभारंभ नवज्योति कला मंच मंडी के मृत्युंजय नाटक की शानदार प्रस्तुति से हुआ। उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र पटियाला, भाषा एवं संस्कृति विभाग तथा संस्कार भारती कुल्लू के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किए जा रहे इस नाट्योत्सव का शुभारंभ उपायुक्त कुल्लू यूनुस ने किया।
निर्देशक इंद्रराज इंदु की ओर से निर्देशित नाटक महाभारत के कर्ण की जन्म से लेकर देह त्यागने तक की यात्रा को दिखाता है। प्रख्यात मराठी नाटककार शिवाजी सावंत के उपन्यास पर आधारित यह नाटक कर्ण के जीवन संग्राम के बहाने महाभारत की कई महत्वपूर्ण झलकियों को पेश किया। नाटक में शुुरुआती दौर में कर्ण, कौरव और पांडव दोनों पक्षों की ओर से समान व्यवहार को दिखाता है। नाटक में कर्ण को मृत्यु को जीतने वाले मृत्युंजय के रूप में दिखाया गया है। इसमें कार्तिक, निशांत, नूतन, शुभम, विनयकांत, दिपाली, अक्की चौहान, जगजीत और देवा ने मंच पर अपने शानदार किरदार से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। संगीत भारत, विशाल और इंद्र राज इंदु ने दिया। इस अवसर जिला भाषा अधिकारी प्रोमिला गुलेरिया, हिमाचल कला भाषा एवं संस्कृति अकादमी के सदस्य डॉ. सूरत ठाकुर, संस्कार भारती कुल्लू के अध्यक्ष डॉ. महेश शर्मा तथा नाट्योत्सव के संयोजक प्रसिद्ध रंगकर्मी केहर सिंह ठाकुर आदि गण्यमान्य लोग उपस्थित रहे।
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कुल्लू। ऐतिहासिक कलाकेंद्र में छह दिवसीय हिमाचल नाट्य महोत्सव का आगाज हो गया है। महोत्सव का शुभारंभ नवज्योति कला मंच मंडी के मृत्युंजय नाटक की शानदार प्रस्तुति से हुआ। उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र पटियाला, भाषा एवं संस्कृति विभाग तथा संस्कार भारती कुल्लू के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किए जा रहे इस नाट्योत्सव का शुभारंभ उपायुक्त कुल्लू यूनुस ने किया।
निर्देशक इंद्रराज इंदु की ओर से निर्देशित नाटक महाभारत के कर्ण की जन्म से लेकर देह त्यागने तक की यात्रा को दिखाता है। प्रख्यात मराठी नाटककार शिवाजी सावंत के उपन्यास पर आधारित यह नाटक कर्ण के जीवन संग्राम के बहाने महाभारत की कई महत्वपूर्ण झलकियों को पेश किया। नाटक में शुुरुआती दौर में कर्ण, कौरव और पांडव दोनों पक्षों की ओर से समान व्यवहार को दिखाता है। नाटक में कर्ण को मृत्यु को जीतने वाले मृत्युंजय के रूप में दिखाया गया है। इसमें कार्तिक, निशांत, नूतन, शुभम, विनयकांत, दिपाली, अक्की चौहान, जगजीत और देवा ने मंच पर अपने शानदार किरदार से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। संगीत भारत, विशाल और इंद्र राज इंदु ने दिया। इस अवसर जिला भाषा अधिकारी प्रोमिला गुलेरिया, हिमाचल कला भाषा एवं संस्कृति अकादमी के सदस्य डॉ. सूरत ठाकुर, संस्कार भारती कुल्लू के अध्यक्ष डॉ. महेश शर्मा तथा नाट्योत्सव के संयोजक प्रसिद्ध रंगकर्मी केहर सिंह ठाकुर आदि गण्यमान्य लोग उपस्थित रहे।
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