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क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू में चिकित्सकों के 16 पद खाली
Updated Thu, 15 Mar 2018 07:32 PM IST
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क्षेत्रीय अस्पताल में डॉक्टरों के 16 पद खाली
कई महीनों से छह विशेषज्ञों के पद रिक्त, चार जिलों के मरीज बेहाल
अस्पताल में रोजाना उपचार को पहुंच रहे 1100 से अधिक मरीज
अमर उजाला ब्यूरो
कुल्लू। ट्रामा सेंटर, डायलिसिस, कैंसर की सीबी नेट सहित तमाम टेस्टों की सुविधा से लैस क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू में डॉक्टरों के कई पद खाली चल रहे हैं। हालांकि एक साल पूर्व यहां पर दो से तीन गायनी विशेषज्ञ, चार हड्डी रोग और तीन सर्जन तैनात थे। अब इन दिनों यहां एक भी गायनी विशेषज्ञ नहीं है। जिससे यहां उपचार के लिए आने वाले सैकड़ों मरीजों को परेशान होना पड़ रहा है।
कुल्लू जिला के साथ मंडी के बालीचौकी तथा द्रंग विधानसभा के लोगों के साथ यहां जनजातीय जिला लाहौल-स्पीति और चंबा के पांगी के मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं परंतु मरीज अस्पताल की ओपीडी तथा वार्डों से लेकर ओटी तक बेहाल है। ऐसी हालत में मरीजों को मंडी, शिमला या फिर निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है। हालांकि गायनी विशेषज्ञों के नहीं होने से गर्भवती महिलाओं के सिजेरियन के लिए अस्पताल प्रशासन ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत दो निजी चिकित्सकों को हायर किया है।
300 बेड के क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू में उपचाराधीन मरीजों को भी समय पर सही उपचार नहीं मिल रहा है। प्रदेश में भाजपा सरकार को बने ढाई माह का समय हो गया है बावजूद जिला अस्पताल की स्वास्थ्य सुविधा तस की जस है। उपचार के लिए आए राम लाल, चमन लाल, मेघ सिंह, अमर चंद, योगेश कुमार, वेद ठाकुर, नरेश कुमार, सीमा देवी, शिवानी, लता देवी, स्नेहलता तथा रामेश्वरी ने कहा कि वह सुबह नौ बजे से डॉक्टरों का इंतजार में हैं लेकिन उनका उपचार दोपहर बाद हुआ है। एक मात्र सर्जन होने से मरीजों को तीन से चार माह के डेट दी मिल रही है। क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू के चिकित्सा अधीक्षक कुल्लू डॉ केएस मल्होत्रा ने कहा कि अस्पताल में छह विशेषज्ञों सहित चिकित्सकों के 16 पद रिक्त चल रहे हैं। पदों को भरने के लिए सरकार से पत्राचार किया गया है।
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क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू में दो गायनी विशेषज्ञों के अलावा एक सर्जन, एक हड्डी, एक रेडियोलॉजिस्ट और एक मेडिसन विशेषज्ञ के साथ एमबीबीएस के दस चिकित्सकों के पद खाली पड़े हैं। पैरामेडिकल स्टाफ में 43 पदों में से 38 पद भरे है। फार्मासिस्ट के सभी नौ पद भरे गए हैं।
क्षेत्रीय अस्पताल में सोमवार और मंगलवार को मरीजों की संख्या 1000 से 1100 तक रहती है जबकि शेष दिनों में मरीजों की छह से आठ सौ तक रहती है। लेकिन पर्याप्त चिकित्सकों के नहीं होने से कई बार मरीजों को बिना उपचार के ही घर लौटना पड़ता है या फिर निजी अस्पतालों में उपचार करने को मजबूर हैं।
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कई महीनों से छह विशेषज्ञों के पद रिक्त, चार जिलों के मरीज बेहाल
अस्पताल में रोजाना उपचार को पहुंच रहे 1100 से अधिक मरीज
अमर उजाला ब्यूरो
कुल्लू। ट्रामा सेंटर, डायलिसिस, कैंसर की सीबी नेट सहित तमाम टेस्टों की सुविधा से लैस क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू में डॉक्टरों के कई पद खाली चल रहे हैं। हालांकि एक साल पूर्व यहां पर दो से तीन गायनी विशेषज्ञ, चार हड्डी रोग और तीन सर्जन तैनात थे। अब इन दिनों यहां एक भी गायनी विशेषज्ञ नहीं है। जिससे यहां उपचार के लिए आने वाले सैकड़ों मरीजों को परेशान होना पड़ रहा है।
कुल्लू जिला के साथ मंडी के बालीचौकी तथा द्रंग विधानसभा के लोगों के साथ यहां जनजातीय जिला लाहौल-स्पीति और चंबा के पांगी के मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं परंतु मरीज अस्पताल की ओपीडी तथा वार्डों से लेकर ओटी तक बेहाल है। ऐसी हालत में मरीजों को मंडी, शिमला या फिर निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है। हालांकि गायनी विशेषज्ञों के नहीं होने से गर्भवती महिलाओं के सिजेरियन के लिए अस्पताल प्रशासन ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत दो निजी चिकित्सकों को हायर किया है।
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300 बेड के क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू में उपचाराधीन मरीजों को भी समय पर सही उपचार नहीं मिल रहा है। प्रदेश में भाजपा सरकार को बने ढाई माह का समय हो गया है बावजूद जिला अस्पताल की स्वास्थ्य सुविधा तस की जस है। उपचार के लिए आए राम लाल, चमन लाल, मेघ सिंह, अमर चंद, योगेश कुमार, वेद ठाकुर, नरेश कुमार, सीमा देवी, शिवानी, लता देवी, स्नेहलता तथा रामेश्वरी ने कहा कि वह सुबह नौ बजे से डॉक्टरों का इंतजार में हैं लेकिन उनका उपचार दोपहर बाद हुआ है। एक मात्र सर्जन होने से मरीजों को तीन से चार माह के डेट दी मिल रही है। क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू के चिकित्सा अधीक्षक कुल्लू डॉ केएस मल्होत्रा ने कहा कि अस्पताल में छह विशेषज्ञों सहित चिकित्सकों के 16 पद रिक्त चल रहे हैं। पदों को भरने के लिए सरकार से पत्राचार किया गया है।
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क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू में दो गायनी विशेषज्ञों के अलावा एक सर्जन, एक हड्डी, एक रेडियोलॉजिस्ट और एक मेडिसन विशेषज्ञ के साथ एमबीबीएस के दस चिकित्सकों के पद खाली पड़े हैं। पैरामेडिकल स्टाफ में 43 पदों में से 38 पद भरे है। फार्मासिस्ट के सभी नौ पद भरे गए हैं।
क्षेत्रीय अस्पताल में सोमवार और मंगलवार को मरीजों की संख्या 1000 से 1100 तक रहती है जबकि शेष दिनों में मरीजों की छह से आठ सौ तक रहती है। लेकिन पर्याप्त चिकित्सकों के नहीं होने से कई बार मरीजों को बिना उपचार के ही घर लौटना पड़ता है या फिर निजी अस्पतालों में उपचार करने को मजबूर हैं।