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अब लाहौल में बनेंगे भूकंप रोधी लाइट स्टील गेज भवन
Updated Mon, 26 Feb 2018 06:52 PM IST
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लाहौल में बनेंगे भूकंप रोधी लाइट स्टील गेज भवन
केलांग में 2 करोड़ 30 लाख से निर्मित होगा ट्रेजरी भवन
भूकंप रोधी होने के साथ फायर और साउंड प्रूफ होंगी इमारतें
अशोक राणा
केलांग (लाहौल-स्पीति)। भूकंप के विनाश से बचने के लिए हिमाचल में सीमेंट कंक्रीट की बजाए अब प्री फेब्रिकेटिड स्ट्रक्चर तकनीक से तैयार भवनों को आजमाया जाएगा। आईआईटी खड़गपुर की एक रिसर्च में इस तकनीक से तैयार भवन को बिलकुल सुरक्षित पाया गया है, लिहाजा सरकार अब चरणबद्ध तरीके से प्रदेश में इस तरह के भवनों को तैयार करने जा रही है।
इस तकनीक में भवनों को लाइट स्टील गेज से तैयार किए जाते हैं, जो पूरी तरह भूकंप रोधी होने के साथ ही साउंड और फायर प्रूफ होंगे। लोनिवि का मेकेनिकल विंग लाहौल-स्पीति में पहली बार इस तकनीक से दो मंजिला ट्रेजरी भवन बनाने जा रहा है। भवन निर्माण के लिए सरकार ने बजट भी जारी कर दिया है। लाइट स्टील गेज के भवन सीमेंट कंक्रीट से बनने वाली भवनों से 20 फीसदी सस्ता और अधिक टिकाऊ होंगे। जबकि, इस तरह के भवन सौ फीसदी इन्वायरनमेंट फ्रेंडली भी हैं। मेकेनिकल विंग का दावा है कि ट्रेजरी भवन को एक साल के भीतर तैयार किया जाएगा। मेकेनिकल विंग के कुल्लू में तैनात अधिशासी अभियंता जीएल ठाकुर ने बताया कि लाहौल में लाइट स्टील गेज से पहला सरकारी भवन बनने जा रहा है, जो दो मंजिला होगा। सरकार ने इस भवन के लिए 2 करोड़ 30 लाख रुपये का बजट जारी भी कर दिया है। बताया कि सर्दियों में बर्फबारी को देखते हुए भवन के डिजाइन पर काम चल रहा है। भवन निर्माण से पहले घाटी की भौगोलिक पृष्ठभूमि को स्टडी किया जाएगा। जीएल ठाकुर ने बताया कि लाहौल घाटी भूकंप के लिहाज से अति संवेदनशील जोन-5 में आता है। भूकंप के विनाश से बचने के लिए इस तकनीक से तैयार भवन और मकान सबसे सुरक्षित हैं। लाइट स्टील गेज फेब्रिकेटिड भवन कंक्रीट से तैयार भवनों के मुकाबले किफायती होने के साथ फायर और साउंड प्रूफ भी हैं।
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केलांग में 2 करोड़ 30 लाख से निर्मित होगा ट्रेजरी भवन
भूकंप रोधी होने के साथ फायर और साउंड प्रूफ होंगी इमारतें
अशोक राणा
केलांग (लाहौल-स्पीति)। भूकंप के विनाश से बचने के लिए हिमाचल में सीमेंट कंक्रीट की बजाए अब प्री फेब्रिकेटिड स्ट्रक्चर तकनीक से तैयार भवनों को आजमाया जाएगा। आईआईटी खड़गपुर की एक रिसर्च में इस तकनीक से तैयार भवन को बिलकुल सुरक्षित पाया गया है, लिहाजा सरकार अब चरणबद्ध तरीके से प्रदेश में इस तरह के भवनों को तैयार करने जा रही है।
इस तकनीक में भवनों को लाइट स्टील गेज से तैयार किए जाते हैं, जो पूरी तरह भूकंप रोधी होने के साथ ही साउंड और फायर प्रूफ होंगे। लोनिवि का मेकेनिकल विंग लाहौल-स्पीति में पहली बार इस तकनीक से दो मंजिला ट्रेजरी भवन बनाने जा रहा है। भवन निर्माण के लिए सरकार ने बजट भी जारी कर दिया है। लाइट स्टील गेज के भवन सीमेंट कंक्रीट से बनने वाली भवनों से 20 फीसदी सस्ता और अधिक टिकाऊ होंगे। जबकि, इस तरह के भवन सौ फीसदी इन्वायरनमेंट फ्रेंडली भी हैं। मेकेनिकल विंग का दावा है कि ट्रेजरी भवन को एक साल के भीतर तैयार किया जाएगा। मेकेनिकल विंग के कुल्लू में तैनात अधिशासी अभियंता जीएल ठाकुर ने बताया कि लाहौल में लाइट स्टील गेज से पहला सरकारी भवन बनने जा रहा है, जो दो मंजिला होगा। सरकार ने इस भवन के लिए 2 करोड़ 30 लाख रुपये का बजट जारी भी कर दिया है। बताया कि सर्दियों में बर्फबारी को देखते हुए भवन के डिजाइन पर काम चल रहा है। भवन निर्माण से पहले घाटी की भौगोलिक पृष्ठभूमि को स्टडी किया जाएगा। जीएल ठाकुर ने बताया कि लाहौल घाटी भूकंप के लिहाज से अति संवेदनशील जोन-5 में आता है। भूकंप के विनाश से बचने के लिए इस तकनीक से तैयार भवन और मकान सबसे सुरक्षित हैं। लाइट स्टील गेज फेब्रिकेटिड भवन कंक्रीट से तैयार भवनों के मुकाबले किफायती होने के साथ फायर और साउंड प्रूफ भी हैं।
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