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महिलाओं के रथ उठाते ही जोगणियों ने छोड़ी नागकन्या
Updated Wed, 29 Nov 2017 07:22 PM IST
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देवी कोटली वशिष्ट में पवित्र स्नान के बाद लौटते हुए।
- फोटो : amarujala
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मनाली/हरिपुर। देवभूमि कुल्लू के मनाली स्थित वामतट पर सोयल गांव में देवी कोटली के भंडार की प्राण प्रतिष्ठा वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूर्ण हुई। प्रतिष्ठा में देवता माधो राय, माता नीला सुरी, माता दोचा मोचा और देवता नारायण ने भी अपने हारियानों के साथ हिस्सा लिया। सैकड़ों श्रद्धालुओं ने देवताओं के समक्ष हाजिरी भरी और माता कोटली से सुख समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त किया। इससे पहले 27 नवंबर को माता कोटली अपने हारियानों के साथ वशिष्ठ गांव पहुंची। जहां पर बुधवार सुबह ब्रह्म मुहूर्त में माता कोटली ने पवित्र स्नान किया। स्नान के बाद जब माता कोटली अपने देवालय की ओर रवाना होने लगी तो माता का रथ अपने स्थान पर स्थिर हो गया। ढोल नगाड़ों और नरसिंगों की स्वरलहरियों के बीच माता के रथ देवधुनों पर आगे ले जाने की कवायद शुरू हो गई लेकिन जोगणियों ने माता कोटली को पकड़ कर रख दिया।
गौर रहे कि माता कोटली अठारह नाग के पिता वासुकी नाग की बहन है। माता कोटली नागकन्या है और अविवाहित हैं। दो घंटे बीत जाने के बाद माता कोटली के रथ को गांव की महिलाओं, सोयल गांव की बेटियों ने जब माता के रथ को कंधों पर उठाया तो जोगणियों ने माता के रथ को छोड़ दिया। इसके बाद माता सोयल अपने स्थान पहुंची। जहां भंडार में वैदिक मंत्रों उच्चारणों के साथ ब्राह्मणों द्वारा भंडार की प्राण प्रतिष्ठा की तथा भंडार में सूत्र फेरा किया गया। सोयल पंचायत की प्रधान सुनीता गुप्ता ने बताया कि भंडार की प्रतिष्ठा के सोयल, मनसारी, चकलाडी, हरिपुर, गजां, करजां महिला और पुरूषों ने अपनी सेवाएं दी। दिनभर गांव में श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला लगा रहा।
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गौर रहे कि माता कोटली अठारह नाग के पिता वासुकी नाग की बहन है। माता कोटली नागकन्या है और अविवाहित हैं। दो घंटे बीत जाने के बाद माता कोटली के रथ को गांव की महिलाओं, सोयल गांव की बेटियों ने जब माता के रथ को कंधों पर उठाया तो जोगणियों ने माता के रथ को छोड़ दिया। इसके बाद माता सोयल अपने स्थान पहुंची। जहां भंडार में वैदिक मंत्रों उच्चारणों के साथ ब्राह्मणों द्वारा भंडार की प्राण प्रतिष्ठा की तथा भंडार में सूत्र फेरा किया गया। सोयल पंचायत की प्रधान सुनीता गुप्ता ने बताया कि भंडार की प्रतिष्ठा के सोयल, मनसारी, चकलाडी, हरिपुर, गजां, करजां महिला और पुरूषों ने अपनी सेवाएं दी। दिनभर गांव में श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला लगा रहा।
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