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अटल सदन की जिम्मेदारी लेने को नहीं कोई तैयार
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अमर उजाला ब्यूरो
कुल्लू। ढालपुर में करीब 23 करोड़ की लागत से बना भव्य अटल सदन अभी लावारिस पड़ा है। 700 लोगों की क्षमता वाले ऑडिटोरियम और डेढ़ दर्जन कमरों वाले भवन को संभालने के लिए कोई भी विभाग जिम्मेदारी नहीं लेने को तैयार नहीं है। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने करीब चार माह पूर्व इसका उद्घाटन हुआ है। लेकिन किसी भी विभाग को इसकी पूर्ण रूप से जिम्मेवारी नहीं दी जा रही। इससे अटल सदन का सही तरीके से कार्यान्वयन नहीं हो रहा है।
अटल सदन का फिलहाल लोक निर्माण विभाग के पास ही जिम्मा है। ऐसे में भाषा एवं संस्कृति विभाग भी इसमें रुचि नहीं ले रहा है। इसका खामियाजा यहां पर कार्यक्रम करवाने वाले आयोजकों को भुगतना पड़ रहा है। यहां तक कि सरकारी कार्यक्रम में भी यहां परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। दो दिन पूर्व ही पुलिस विभाग की ओर से यहां पर सहभागिता हमारी और आपकी कार्यक्रम करवाया गया। आयोजक सुबह नौ बजे ही ऑडिटोरियम में पहुंच गए थे। लेकिन ऑडिटोरियम में बिजली आते-आते करीब 12 बज गए। इससे यहां आए हुए लोगों को कार्यक्रम के लिए तीन घंटों का इंतजार करना पड़ा। अटल सदन में कार्यक्रम करवाने के लिए एक दिन का करीब 25000 हजार रुपये किराया वसूला जाता है। लेकिन इसकी जिम्मेदारी किसी विशेष विभाग को न दिए जाने से इसका असर इसकी देखरेख पर भी पड़ सकता है। अब सवाल यह उठता है कि अगर करोड़ों के बनाए गए भवन की अच्छे तरीके से देखरेख न हो तो यह महज पैसों की बरबादी है। जिला भाषा एवं संस्कृति विभाग की जिला भाषा अधिकारी सुनीला ठाकुर ने कहा कि अटल सदन की देखरेख अभी भाषा एवं संस्कृति विभाग के पास नहीं है।
अटल सदन के पास बिजली ट्रांसफार्मर का निर्माण किया जाना है। इसके लिए लोनिवि ने बिजली बोर्ड को 40 लाख रुपये जमा कर दिए हैं। लेकिन चुनावी आचार संहित लगने से इसकी प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है। इसके बाद इसे भाषा, कला एवं संस्कृति विभाग को सौंपा जाएगा।
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- एसके धीमान, अधिशासी अभियंता, लोनिवि कुल्लू
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कुल्लू। ढालपुर में करीब 23 करोड़ की लागत से बना भव्य अटल सदन अभी लावारिस पड़ा है। 700 लोगों की क्षमता वाले ऑडिटोरियम और डेढ़ दर्जन कमरों वाले भवन को संभालने के लिए कोई भी विभाग जिम्मेदारी नहीं लेने को तैयार नहीं है। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने करीब चार माह पूर्व इसका उद्घाटन हुआ है। लेकिन किसी भी विभाग को इसकी पूर्ण रूप से जिम्मेवारी नहीं दी जा रही। इससे अटल सदन का सही तरीके से कार्यान्वयन नहीं हो रहा है।
अटल सदन का फिलहाल लोक निर्माण विभाग के पास ही जिम्मा है। ऐसे में भाषा एवं संस्कृति विभाग भी इसमें रुचि नहीं ले रहा है। इसका खामियाजा यहां पर कार्यक्रम करवाने वाले आयोजकों को भुगतना पड़ रहा है। यहां तक कि सरकारी कार्यक्रम में भी यहां परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। दो दिन पूर्व ही पुलिस विभाग की ओर से यहां पर सहभागिता हमारी और आपकी कार्यक्रम करवाया गया। आयोजक सुबह नौ बजे ही ऑडिटोरियम में पहुंच गए थे। लेकिन ऑडिटोरियम में बिजली आते-आते करीब 12 बज गए। इससे यहां आए हुए लोगों को कार्यक्रम के लिए तीन घंटों का इंतजार करना पड़ा। अटल सदन में कार्यक्रम करवाने के लिए एक दिन का करीब 25000 हजार रुपये किराया वसूला जाता है। लेकिन इसकी जिम्मेदारी किसी विशेष विभाग को न दिए जाने से इसका असर इसकी देखरेख पर भी पड़ सकता है। अब सवाल यह उठता है कि अगर करोड़ों के बनाए गए भवन की अच्छे तरीके से देखरेख न हो तो यह महज पैसों की बरबादी है। जिला भाषा एवं संस्कृति विभाग की जिला भाषा अधिकारी सुनीला ठाकुर ने कहा कि अटल सदन की देखरेख अभी भाषा एवं संस्कृति विभाग के पास नहीं है।
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अटल सदन के पास बिजली ट्रांसफार्मर का निर्माण किया जाना है। इसके लिए लोनिवि ने बिजली बोर्ड को 40 लाख रुपये जमा कर दिए हैं। लेकिन चुनावी आचार संहित लगने से इसकी प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है। इसके बाद इसे भाषा, कला एवं संस्कृति विभाग को सौंपा जाएगा।
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- एसके धीमान, अधिशासी अभियंता, लोनिवि कुल्लू