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पोक्सो एक्ट में किए गए हैं कड़े प्रावधान: एडीसी
Updated Wed, 06 Sep 2017 09:27 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
कुल्लू। किशोर न्याय अधिनियम-2015, लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम- 2012 (पोक्सो एक्ट), समेकित बाल संरक्षण योजना, बाल-बालिका सुरक्षा योजना और बच्चों-किशोरों से संबंधित अन्य योजनाओं के प्रति जागरूकता के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग ने बुधवार को बचत भवन में एक कार्यशाला का आयोजन किया। कार्यशाला की अध्यक्षता एडीसी राकेश शर्मा ने की। उन्होंने कहा कि पोक्सो एक्ट और किशोर न्याय अधिनियम में कड़े प्रावधान किए गए हैं। एडीसी ने कार्यशाला के सभी प्रतिभागियों से इन महत्वपूर्ण अधिनियमों और विभिन्न बाल कल्याण योजनाओं की जानकारी आम जनता तक पहुंचाने की अपील भी की। उन्होंने बताया कि बेसहारा, अनाथ, आपदा पीड़ित और अन्य विपदाओं से ग्रस्त बच्चों के कल्याण के लिए महिला एवं बाल विभाग ने समेकित बाल संरक्षण और बाल-बालिका सुरक्षा योजना चलाई है। अत्याचार के शिकार बच्चों को राहत प्रदान करने के लिए जिला स्तर पर बाल कल्याण समिति का गठन किया गया है। एसपी शालिनी अग्निहोत्री ने बच्चों के साथ होने वाले अपराधों और बाल अपराधियों से संबंधित जांच प्रक्रियाओं की जानकारी दी। जिला न्यायवादी एनएस कटोच ने पोक्सो एक्ट के विभिन्न प्रावधानों से अवगत करवाया। उन्होंने कहा कि बच्चों के साथ होने वाले लैंगिक अपराधों की जानकारी छिपाना भी अपराध है और पोक्सो एक्ट में इसके लिए भी कड़ी सजा का प्रावधान है। जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण के सचिव एवं अतिरिक्त मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी मोहित बंसल ने किशोर न्याय अधिनियम पर प्रकाश डाला। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुशील चंद्र शर्मा ने कन्या भ्रूण हत्या विरोधी कानून पीएनडीटी एक्ट की जानकारी दी। कार्यशाला में उच्च शिक्षा उपनिदेशक जगदीश, जिला बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष शिव सिंह, अन्य पदाधिकारी और विभिन्न सरकारी व निजी शिक्षण संस्थानों के प्रधानाचार्य भी उपस्थित थे।
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कुल्लू। किशोर न्याय अधिनियम-2015, लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम- 2012 (पोक्सो एक्ट), समेकित बाल संरक्षण योजना, बाल-बालिका सुरक्षा योजना और बच्चों-किशोरों से संबंधित अन्य योजनाओं के प्रति जागरूकता के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग ने बुधवार को बचत भवन में एक कार्यशाला का आयोजन किया। कार्यशाला की अध्यक्षता एडीसी राकेश शर्मा ने की। उन्होंने कहा कि पोक्सो एक्ट और किशोर न्याय अधिनियम में कड़े प्रावधान किए गए हैं। एडीसी ने कार्यशाला के सभी प्रतिभागियों से इन महत्वपूर्ण अधिनियमों और विभिन्न बाल कल्याण योजनाओं की जानकारी आम जनता तक पहुंचाने की अपील भी की। उन्होंने बताया कि बेसहारा, अनाथ, आपदा पीड़ित और अन्य विपदाओं से ग्रस्त बच्चों के कल्याण के लिए महिला एवं बाल विभाग ने समेकित बाल संरक्षण और बाल-बालिका सुरक्षा योजना चलाई है। अत्याचार के शिकार बच्चों को राहत प्रदान करने के लिए जिला स्तर पर बाल कल्याण समिति का गठन किया गया है। एसपी शालिनी अग्निहोत्री ने बच्चों के साथ होने वाले अपराधों और बाल अपराधियों से संबंधित जांच प्रक्रियाओं की जानकारी दी। जिला न्यायवादी एनएस कटोच ने पोक्सो एक्ट के विभिन्न प्रावधानों से अवगत करवाया। उन्होंने कहा कि बच्चों के साथ होने वाले लैंगिक अपराधों की जानकारी छिपाना भी अपराध है और पोक्सो एक्ट में इसके लिए भी कड़ी सजा का प्रावधान है। जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण के सचिव एवं अतिरिक्त मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी मोहित बंसल ने किशोर न्याय अधिनियम पर प्रकाश डाला। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुशील चंद्र शर्मा ने कन्या भ्रूण हत्या विरोधी कानून पीएनडीटी एक्ट की जानकारी दी। कार्यशाला में उच्च शिक्षा उपनिदेशक जगदीश, जिला बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष शिव सिंह, अन्य पदाधिकारी और विभिन्न सरकारी व निजी शिक्षण संस्थानों के प्रधानाचार्य भी उपस्थित थे।