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सख्ती से लागू हो श्रम कानून, आउॅटसोर्स की जगह मिले नियमित रोजगार
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केंद्र के खिलाफ सड़कों पर उतरे लोग
कुल्लू में आउट सोर्स प्रथा बंद करने, श्रम कानूनों को लेकर किया प्रदर्शन
प्रधानमंत्री को भेजा ज्ञापन, न्यूनतम वेतन 18000 रुपये देने की मांग
अमर उजाला ब्यूरो
कुल्लू। केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के आह्वान पर कुल्लू में संयुक्त केंद्रीय ट्रेड यूनियनों की संयुक्त समन्वय समिति के नेतृत्व में सैकड़ों मजदूरों, किसानों ने ढालपुर में धरना प्रदर्शन किया। इस दौरान सरवरी से लेकर उपायुक्त कार्यालय तक रैली निकाली और केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई। उपायुक्त के माध्यम से मजदूरों और कर्मचारियों की मांगों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ज्ञापन भेजा।
खेतिहर किसान यूनियन के प्रधान चंद्र वल्लभ नेगी ने कहा कि मोदी सरकार की गलत नीतियों के कारण महंगाई चरम सीमा तक पहुंच गई है। मोदी सरकार ने पूंजीपतियों को फायदा पहुंचाने के लिए श्रम कानूनों को उनके पक्ष में करने का काम किया है। उन्होंने कहा कि नोटबंदी के कारण कई किसान आत्महत्या करने को मजबूर हो गए। जब किसानों व मजदूरों ने नोटबंदी के चलते अपनी मेहनत की कमाई बैंकों में जमा की तो नीरव मोदी सारा पैसा डकार कर देश से भाग गया। सरकार आउट सोर्स प्रथा के माध्यम से देश के पढ़े लिखे बेरोजगारों के साथ छल कर रही है। उन्होंने कहा कि देश के युवा, प्रशिक्षित बेरोजगारों को आउट सोर्स पर रखा जा रहा है। इसके खिलाफ यूनियन अपना संघर्ष जारी रखेगी। इंटक के जिला प्रधान खीमी राम चौहान ने कहा कि न्यूनतम वेतन 18000 रुपये मासिक किया जाए। इसे उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के साथ जोड़ा जाए। समान काम के लिए समान वेतन दिया जाए। आउट सोर्स की जगह नियमित रोजगार देने के साथ सभी योजन कर्मियों, आंगनबाड़ी, मिड-डे-मील आदि को सरकारी कर्मचारी घोषित किया जाए। मनरेगा को 120 दिन का रोजगार दिया जाए। श्रम कानूनों को सख्ती से लागू किया जाए। बढ़ती महंगाई पर रोक लगाने के साथ पेट्रोल डीजल के दाम कर किए जाएं। इस दौरान संयुक्त समन्वय समिति संयोजक राजेश ठाकुर, सीटू जिला उपाध्यक्ष सरचंद ठाकुर, मिड-डे मील राज्य अध्यक्ष कांता महंत, निर्माण मजदूर यूनियन सीटू जिला प्रधान राम चंद, सचिव चमन ठाकुर, इंटक महासचिव संजय शर्मा आदि मौजूद रहे।
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कुल्लू में आउट सोर्स प्रथा बंद करने, श्रम कानूनों को लेकर किया प्रदर्शन
प्रधानमंत्री को भेजा ज्ञापन, न्यूनतम वेतन 18000 रुपये देने की मांग
अमर उजाला ब्यूरो
कुल्लू। केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के आह्वान पर कुल्लू में संयुक्त केंद्रीय ट्रेड यूनियनों की संयुक्त समन्वय समिति के नेतृत्व में सैकड़ों मजदूरों, किसानों ने ढालपुर में धरना प्रदर्शन किया। इस दौरान सरवरी से लेकर उपायुक्त कार्यालय तक रैली निकाली और केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई। उपायुक्त के माध्यम से मजदूरों और कर्मचारियों की मांगों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ज्ञापन भेजा।
खेतिहर किसान यूनियन के प्रधान चंद्र वल्लभ नेगी ने कहा कि मोदी सरकार की गलत नीतियों के कारण महंगाई चरम सीमा तक पहुंच गई है। मोदी सरकार ने पूंजीपतियों को फायदा पहुंचाने के लिए श्रम कानूनों को उनके पक्ष में करने का काम किया है। उन्होंने कहा कि नोटबंदी के कारण कई किसान आत्महत्या करने को मजबूर हो गए। जब किसानों व मजदूरों ने नोटबंदी के चलते अपनी मेहनत की कमाई बैंकों में जमा की तो नीरव मोदी सारा पैसा डकार कर देश से भाग गया। सरकार आउट सोर्स प्रथा के माध्यम से देश के पढ़े लिखे बेरोजगारों के साथ छल कर रही है। उन्होंने कहा कि देश के युवा, प्रशिक्षित बेरोजगारों को आउट सोर्स पर रखा जा रहा है। इसके खिलाफ यूनियन अपना संघर्ष जारी रखेगी। इंटक के जिला प्रधान खीमी राम चौहान ने कहा कि न्यूनतम वेतन 18000 रुपये मासिक किया जाए। इसे उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के साथ जोड़ा जाए। समान काम के लिए समान वेतन दिया जाए। आउट सोर्स की जगह नियमित रोजगार देने के साथ सभी योजन कर्मियों, आंगनबाड़ी, मिड-डे-मील आदि को सरकारी कर्मचारी घोषित किया जाए। मनरेगा को 120 दिन का रोजगार दिया जाए। श्रम कानूनों को सख्ती से लागू किया जाए। बढ़ती महंगाई पर रोक लगाने के साथ पेट्रोल डीजल के दाम कर किए जाएं। इस दौरान संयुक्त समन्वय समिति संयोजक राजेश ठाकुर, सीटू जिला उपाध्यक्ष सरचंद ठाकुर, मिड-डे मील राज्य अध्यक्ष कांता महंत, निर्माण मजदूर यूनियन सीटू जिला प्रधान राम चंद, सचिव चमन ठाकुर, इंटक महासचिव संजय शर्मा आदि मौजूद रहे।
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