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साडा के चलते नहीं हो रहा होटलों का पंजीकरण
Updated Fri, 08 Dec 2017 10:02 PM IST
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Manali City
- फोटो : amarujala
कुल्लू। धार्मिक नगरी मणिकर्ण के साथ लगते प्रसिद्ध पर्यटन स्थल कसोल के करीब 44 होटलों का पंजीकरण नहीं होने पर प्रदेश हाईकोर्ट सख्त हो गया है। वहीं मणिकर्ण वैली होटल एसोसिएशन का कहना है कि कसोल मेें साडा लगने से होटल, गेस्ट हाउस व होम स्टे का पंजीकरण नहीं हो रहा है। एसोसिएशन ने बैठक कर इस मसले को लेकर विचार-विमर्श किया। बैठक के बाद कुल्लू में मणिकर्ण वैली होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष किशन ठाकुर ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि साल 2002 में मणिकर्ण तथा कसोल को साडा के तहत लाया गया है। जिसकी औपचारिकता पूरी नहीं हो पा रही हैं। ऐसे में एसोसिएशन ने प्रदेश सरकार व हाईकोर्ट से साडा को खत्म करने या फिर इसमें विशेष छूट देने की मांग की है। जिन होटलों, गेस्ट हाउसों और होम स्टे को पंजीकरण नहीं हुआ है और नियमानुसार होटलों पंजीकरण होना चाहिए।
एसोसिएशन के अध्यक्ष किशन ठाकुर, उपाध्यक्ष संजय शर्मा, गुलाब सिंह, मुख्य सलाहकार नौमी राम, महासचिव हुकम चंद, महिला मंडल प्रधान कौशल्या, सचिव प्रेम कायस्था, सदस्य हरि राम, प्रतिभा, चेतन ठाकुर, यशवंत सोनी तथा चित्रदेव ने कहा है कि सरकार ने मणिकर्ण और कसोल में 2002 में साडा लगाया है कि लेकिन उन्हें इसका कोई भी लाभ नहीं मिल रहा है। न उन्हें सीवरेज सुविधा मिली, न ही डंपिंग के लिए जगह मिली है। वह इसके लिए पांच-छह सालों से लड़ रहे हैं लेकिन कोई भी हल नहीं निकल पाया है। एक ओर सरकार पर्यटन को बढ़ावा देने की बात करती है लेकिन अब घाटी के होटलों, गेस्ट हाउस व होम स्टे की बिजली व पानी बंद करने युवाओं को रोजगार छिना जा रहा है। उन्होंने अब सरकार व हाईकोर्ट से घाटी के उन होटलों के पंजीकरण को समय देने की मांग की है जो पर्यटन विभाग के पास पंजीकृत नहीं हुए हैं। मणिकर्ण वैली होटल एसोसिएशन का कहना है कि घाटी में सिंथेटिक ड्रग्स व चरस की खेप कहां से आ रही है? हिमाचल में सिंथेटिक ड्रग्स नहीं होती है ऐसे में बाहरी राज्यों से यह पार्वती वैली में कैसे पहुंच रही है? वहीं मलाणा सहित कुल्लू जिला में भांग की खेती को नष्ट किया गया है बावजूद चरस बड़ी मात्रा में पकड़ी जा रही है। एसोसिएशन के अध्यक्ष किशन ठाकुर ने आरोप लगाया कि घाटी में चरस में पुलिस के लोग भी शामिल हैं जो घाटी के युवाओं को उकसा रहे हैं। पुलिस कर्मचारी स्वयं ग्राहक बन कर युवाओं को चरस लाने की बात करते हैं और अपने टारगेट पूरा करने पर गिरफ्तार कर रही है।
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एसोसिएशन के अध्यक्ष किशन ठाकुर, उपाध्यक्ष संजय शर्मा, गुलाब सिंह, मुख्य सलाहकार नौमी राम, महासचिव हुकम चंद, महिला मंडल प्रधान कौशल्या, सचिव प्रेम कायस्था, सदस्य हरि राम, प्रतिभा, चेतन ठाकुर, यशवंत सोनी तथा चित्रदेव ने कहा है कि सरकार ने मणिकर्ण और कसोल में 2002 में साडा लगाया है कि लेकिन उन्हें इसका कोई भी लाभ नहीं मिल रहा है। न उन्हें सीवरेज सुविधा मिली, न ही डंपिंग के लिए जगह मिली है। वह इसके लिए पांच-छह सालों से लड़ रहे हैं लेकिन कोई भी हल नहीं निकल पाया है। एक ओर सरकार पर्यटन को बढ़ावा देने की बात करती है लेकिन अब घाटी के होटलों, गेस्ट हाउस व होम स्टे की बिजली व पानी बंद करने युवाओं को रोजगार छिना जा रहा है। उन्होंने अब सरकार व हाईकोर्ट से घाटी के उन होटलों के पंजीकरण को समय देने की मांग की है जो पर्यटन विभाग के पास पंजीकृत नहीं हुए हैं। मणिकर्ण वैली होटल एसोसिएशन का कहना है कि घाटी में सिंथेटिक ड्रग्स व चरस की खेप कहां से आ रही है? हिमाचल में सिंथेटिक ड्रग्स नहीं होती है ऐसे में बाहरी राज्यों से यह पार्वती वैली में कैसे पहुंच रही है? वहीं मलाणा सहित कुल्लू जिला में भांग की खेती को नष्ट किया गया है बावजूद चरस बड़ी मात्रा में पकड़ी जा रही है। एसोसिएशन के अध्यक्ष किशन ठाकुर ने आरोप लगाया कि घाटी में चरस में पुलिस के लोग भी शामिल हैं जो घाटी के युवाओं को उकसा रहे हैं। पुलिस कर्मचारी स्वयं ग्राहक बन कर युवाओं को चरस लाने की बात करते हैं और अपने टारगेट पूरा करने पर गिरफ्तार कर रही है।
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