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कुल्लू के किसान लहसुन को औने-पौने दाम पर बचने को मजबूर

Sat, 23 Jun 2018 10:24 PM IST
Updated Sat, 23 Jun 2018 10:24 PM IST
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कुल्लू के किसान लहसुन को औने-पौने दाम पर बचने को मजबूर
कुल्लू के किसान लहसुन को
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कम दाम पर बचने को मजबूर
रेट नहीं मिलने से जिला के सैकड़ों लहसुन उत्पादकों में मायूसी
लागत भी नहीं हो रही वसूल, राजस्थान की तर्ज पर मांगा समर्थन मूल्य
अमर उजाला ब्यूरो
कुल्लू/खराहल। सब्जी मंडियों में नकदी लहसुन कौड़ियों के भाव बिकने से किसान बैकफुट पर आ गए हैं। किसानों की साल भर की मेहनत पर पानी फिर गया है। खेती का खर्चा भी पूरा नहीं हो रहा है। खाद, दवा और मजदूरी का खर्चा अपनी जेब से वहन करना पड़ रहा है। एक महीने तक किसानों ने लहसुन को अपने घरों में रेट बढ़ने के इंतजार मेें स्टोर किया था। अब कीमत में उछाल के बजाए गिरावट ही आई है।
बताया जा रहा है कि इस साल देश के मध्य प्रदेश, राजस्थान, यूपी और हरियाणा तथा दक्षिण भारत में लहसुन का उत्पादन बहुत ज्यादा हुआ है। बड़े व्यापारियों को घरद्वार पर ही लहसुन की खेप सस्ती दरों पर उपलब्ध हो रही है। लिहाजा, प्रदेश सहित कुल्लू में लहसुन की खरीद करने बाहरी व्यापारी नहीं पहुंचे हैं। जिसके चलते लहसुन के दाम गत साल की अपेक्षा चार गुना कम मिल रहे हैं।
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किसान अमित, सुरेश कुमार, अमन कुमार, चमन, रामनाथ, देवराज, मोहर सिंह, दवेंद्र, ज्ञान ठाकुुर और जयचंद आदि के अनुसार मंडियों में ए और बी श्रेणी के लहसुन की कीमत 12 से 17 रुपयेे और सी ग्रेड 5 रुपये प्रति किलो बिक रहा है। कम मूल्य मिलने से किसानों का फसल पर किया खर्चा भी पूरा नहीं हो रहा है। किसान सभा के उपाध्यक्ष देवराज नेगी के अनुसार कम दाम से किसान के बीज, खाद और मजदूरी का खर्चा भी जेब से वहन करना पड़ रहा है। उन्होंने सरकार से राजस्थान की तर्ज पर समर्थन मूल्य घोषित करने की मांग की है। राजस्थान में 32 रुपये प्रतिकिलो समर्थन मूल्य दिया जा रहा है।
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हिमाचल सरकार को लहसुन उत्पादकों के लिए समर्थन मूल्य निर्धारित करना चाहिए। इससे किसानों को कुछ राहत हो जाएगी। जो फसल पर खर्चा हुआ है वह किसानों का पूरा हो सके। खेद है कि सरकार इस ओर गंभीरता से पहल ही नहीं कर रही है। इससे किसानों में काफी रोष है।- सुंदर सिंह ठाकुर, विधायक सदर कुल्लू।
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