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बंजार घाटी में बूढ़ी दिवाली की धूम
Updated Mon, 20 Nov 2017 09:45 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
बंजार (कुल्लू)। उपमंडल बंजार में बूढ़ी दिवाली का पर्व मनाया गया। मार्गशीष अमावस्या की देर रात को उपमंडल के कई गांवों में बूढ़ी दिवाली की धूम रही। जलती मशालों के साथ नाच गाने का दौर देर रात तक जारी रहा। घाटी के चेत्थर, गुशैणी, शपनील, हिड्ब, थाटा डाहर व शिल्ही में इस पर्व को मनाया गया। लोगों ने ढोल नगाड़ों की थाप पर कबीरी नामक गीत गाकर नृत्य किया और एक विशेष स्थान पर एकत्रित हुए। जहां मशालों को एक अग्नि कुंड में जलाया गया और ग्रामीणों द्वारा गीत गाकर नृत्य किया। कई जगहों पर इन जलती मशालों से क्षेत्र की परिक्रमा की और भूत प्रेत व अन्य बुरी आत्माओं को भगाया गया। जगदीश, मोहन लाल, रंजना, यशपाल, रमेश तथा बालक राम आदि का कहना है कि यह परंपरा सदियों से चली आ रही है। उन्होंने कहा कि इस दौरान मेहमानबाजी का भी खूब दौर रहता है।
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बंजार (कुल्लू)। उपमंडल बंजार में बूढ़ी दिवाली का पर्व मनाया गया। मार्गशीष अमावस्या की देर रात को उपमंडल के कई गांवों में बूढ़ी दिवाली की धूम रही। जलती मशालों के साथ नाच गाने का दौर देर रात तक जारी रहा। घाटी के चेत्थर, गुशैणी, शपनील, हिड्ब, थाटा डाहर व शिल्ही में इस पर्व को मनाया गया। लोगों ने ढोल नगाड़ों की थाप पर कबीरी नामक गीत गाकर नृत्य किया और एक विशेष स्थान पर एकत्रित हुए। जहां मशालों को एक अग्नि कुंड में जलाया गया और ग्रामीणों द्वारा गीत गाकर नृत्य किया। कई जगहों पर इन जलती मशालों से क्षेत्र की परिक्रमा की और भूत प्रेत व अन्य बुरी आत्माओं को भगाया गया। जगदीश, मोहन लाल, रंजना, यशपाल, रमेश तथा बालक राम आदि का कहना है कि यह परंपरा सदियों से चली आ रही है। उन्होंने कहा कि इस दौरान मेहमानबाजी का भी खूब दौर रहता है।