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योचे गांव करेेगा विधानसभा चुनाव का बहिष्कार
Updated Sat, 28 Oct 2017 10:25 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
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केलांग (लाहौल-स्पीति)।
हिमस्खलन के साये में जी रहे योचे गांव के लोग प्रशासन ओर सरकार की अनदेखी से खफा होकर विधानसभा चुनाव का बहिष्कार करेंगे। सलपट के बाद योचे लाहौल-स्पीति विधानसभा क्षेत्र का दूसरा गांव है जिसने चुनाव का बहिष्कार करने की चेेतावनी दी है।
ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने योचे गांव से 5 किलोमीटर दूर सुरक्षित सरकारी जमीन पर मकान निर्माण को आवेदन किया था, लेकिन जमीन हस्तांतरण की प्रक्रिया अटक जाने से ग्रामीणों में रोष है। दरअसल तोद घाटी के योचे गांव में 2015 में हिमस्खलन से कई घर दब गए थे। इस घटना के बाद ग्रामीणों में दहशत है। लिहाजा सर्दियों में अस्थायी तौर पर घर बनाने के लिए ग्रामीणों ने सुरक्षित सरकारी भूमि आवंटन को आवेदन किया था, लेकिन भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया बीच में रुक जाने से ग्रामीणों की परेशानियां बढ़ गई है। आरोप है कि इसके लिए एनओसी नहीं मिलने से काम लटक गया है।
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ग्रामीण सेवानिवृत्त कैप्टन रविंद्र, शेर सिंह, रामनाथ, बलदेव, ज्ञाल्सन, सोनम, तंदुप, दोरजे, अंगयाल, पलजोर, रामलाल, लजंग ने बताया कि 2015 में हिमस्खलन गिरने की घटना के बाद से ग्रामीण दहशत के साये में जी रहे हैं। ग्रामीणों ने हर परिवार को मकान बनाने के लिए 10.10 बिस्वा जमीन उपलब्ध करने की प्रशासन से मांग की थी। ये भूमि सरकारी है। हिमस्खलन की लिहाज से सुरक्षित है।
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भूमि आवंटन के लिए हालांकि कानूनी प्रक्रिया शुरू की गई, लेकिन एनओसी के चक्कर में प्रक्रिया लटक गई। पलजोर ने बताया कि योचे में फिर हिमखंड की आशंका से भयभीत ग्रामीण सर्दियों में वहां रहने नहीं चाहते हैं। इसीलिए ग्रामीणों को सर्दियों में मजबूरन कुल्लू मनाली पलायन करना पड़ रहा है। व्यवस्था से नाराज ग्रामीणों ने विधानसभा चुनाव का बहिष्कार करने का निर्णय लिया है। इसको लेकर ग्रामीणों ने जिला प्रशासन को लिखित तौर पर अवगत करा दिया है। गांव की आबादी करीब 200 है। उपायुक्त लाहौल-स्पीति देवा सिंह नेगी ने मामले की पुष्टि की है।