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Kangra News: लाइनमैन की माैत पर गरजे कर्मी और पेंशनर, सरकार और बोर्ड प्रबंधन को ठहराया जिम्मेदार
Wed, 05 Mar 2025 12:01 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Wed, 05 Mar 2025 12:01 AM IST
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नूरपुर (कांगड़ा)। हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड के कर्मचारियों और पेंशनरों ने सोमवार को इंदौरा में करंट लगने से लाइनमैन की मौत को लेकर गहरा रोष प्रकट किया। उन्होंने मौत का जिम्मेदार प्रदेश सरकार और बोर्ड प्रबंधन वर्ग को ठहराया है। नूरपुर के चौगान मैदान में सभी ने मृतक अजय कुमार की आत्मिक शांति के लिए दो मिनट का मौन रखा। इसके बाद विद्युत पेंशनर फोरम के उपाध्यक्ष पवन मोहल के नेतृत्व में रैली चौगान मैदान से अस्पताल तक निकाली।
इस दौरान पवन मोहल ने प्रदेश सरकार और बोर्ड प्रबंधन को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि लगभग सात दिनों के भीतर प्रदेश में तीन विद्युत कर्मचारी बिजली हादसे का शिकार हो चुके हैं। कर्मचारियों की मौत का ग्राफ बढ़ने का सबसे बड़ा कारण फील्ड में कर्मचारियों की भारी कमी है। वर्तमान में स्थिति यह है कि एक-एक कर्मचारी के हिस्से 25 से 30 ट्रांसफार्मर की देखरेख और उसके रखखाव की जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि वर्ष 1990 में विद्युत बोर्ड में कर्मचारियों की संख्या 43 हजार थी और उपभोक्ता मात्र नौ लाख थे। आज कर्मचारियों की संख्या घटकर मात्र 13 हजार रह गई है और उपभोक्ता 29 लाख के करीब हैं। विद्युत बोर्ड में आठ हजार पद रिक्त पड़े हैं, जिनको तुरंत भरने की जरूरत है। इसके साथ यूनियन ने सरकार से मांग की है कि जिस तरह फौजी भाइयों को ड्यूटी के दौरान बलिदानी होने पर सम्मान दिया जाता है उसी तर्ज पर बिजली बोर्ड के कर्मचारी को दुर्घटना में जान गंवाने पर सम्मान दिया जाए।
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इस दौरान पवन मोहल ने प्रदेश सरकार और बोर्ड प्रबंधन को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि लगभग सात दिनों के भीतर प्रदेश में तीन विद्युत कर्मचारी बिजली हादसे का शिकार हो चुके हैं। कर्मचारियों की मौत का ग्राफ बढ़ने का सबसे बड़ा कारण फील्ड में कर्मचारियों की भारी कमी है। वर्तमान में स्थिति यह है कि एक-एक कर्मचारी के हिस्से 25 से 30 ट्रांसफार्मर की देखरेख और उसके रखखाव की जिम्मेदारी है।
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उन्होंने कहा कि वर्ष 1990 में विद्युत बोर्ड में कर्मचारियों की संख्या 43 हजार थी और उपभोक्ता मात्र नौ लाख थे। आज कर्मचारियों की संख्या घटकर मात्र 13 हजार रह गई है और उपभोक्ता 29 लाख के करीब हैं। विद्युत बोर्ड में आठ हजार पद रिक्त पड़े हैं, जिनको तुरंत भरने की जरूरत है। इसके साथ यूनियन ने सरकार से मांग की है कि जिस तरह फौजी भाइयों को ड्यूटी के दौरान बलिदानी होने पर सम्मान दिया जाता है उसी तर्ज पर बिजली बोर्ड के कर्मचारी को दुर्घटना में जान गंवाने पर सम्मान दिया जाए।
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