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Kangra News: जिला परिषद अध्यक्ष के लिए भाजपा समर्थित महिलाओं का रहेगा दबदबा
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धर्मशाला। कांगड़ा में जिला परिषद चुनाव के नतीजे घोषित होने के साथ ही अब अध्यक्ष पद को लेकर सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। आरक्षण रोस्टर के तहत इस बार जिला परिषद अध्यक्ष का पद अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) महिला के लिए आरक्षित है। इस समीकरण के चलते अध्यक्ष पद की दौड़ कुछ चुनिंदा चेहरों तक सिमट गई है। इसमें भाजपा समर्थित निर्वाचित सदस्यों का पलड़ा सबसे भारी माना जा रहा है।
कांगड़ा जिला परिषद चुनावों में प्रमुख दलों की स्थिति पर नजर डालें तो यहां कुल निर्वाचित महिला सदस्यों में से भाजपा समर्थित 16, कांग्रेस समर्थित चार और सात निर्दलीय प्रत्याशी विजयी रही हैं। अध्यक्ष पद के लिए सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि ओबीसी वर्ग से निर्वाचित महिला सदस्यों में पूरी तरह भाजपा का दबदबा है, जबकि कांग्रेस की ओर से ओबीसी वर्ग की कोई भी महिला सदस्य चुनाव नहीं जीत सकी है।
यह मौजूदा अंकगणित भाजपा को स्वाभाविक रूप से रेस में सबसे आगे रखता है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार अध्यक्ष के चयन में जातीय आरक्षण के साथ-साथ संगठनात्मक अनुभव, क्षेत्रीय संतुलन और भविष्य की रणनीति भी अहम होगी। इस दौड़ में भाजपा में कई नामों पर प्रमुखता से चर्चा हो रही है।
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भाजपा समर्थित इन प्रत्याशियों का पलड़ा भारी
सीमा कुमारी (कलियाड़ा) : लंबे समय से पार्टी से जुड़ी हैं और वर्तमान में लदवाड़ा महिला मोर्चा मंडल अध्यक्ष हैं। संगठन में सक्रियता इनकी बड़ी मजबूती है।
नीलम कुमारी (कोपड़ा) : भाजपा महिला मोर्चा की उपाध्यक्ष हैं और लंबे समय से पार्टी की मुख्य गतिविधियों में सक्रिय रही हैं।
अनुपमा कुमारी (बारी): भाजपा मंडल महिला मोर्चा की सचिव हैं और पंचायत स्तर पर सामाजिक-राजनीतिक रूप से खासी सक्रिय रही हैं।
मधुबाला (बड़ोह) व सुनीता देवी : मजबूत संगठनात्मक पकड़, क्षेत्रीय प्रभाव और पार्टी के भीतर अपनी स्वीकार्यता के चलते ये दोनों भी संभावित दावेदारों में शामिल हैं।
जोड़-तोड़ हुई तो निर्दलीय भी निभाएंगी अहम भूमिका
हालांकि भाजपा बहुमत के आंकड़े के बेहद करीब है, लेकिन यदि अध्यक्ष पद के चुनाव में कोई नया सियासी उलटफेर या जोड़-तोड़ की स्थिति बनती है तो ओबीसी वर्ग से जीतकर आईं तीन निर्दलीय महिला सदस्यों की भूमिका अहम हो जाएगी। इनमें निशा कुमारी, मधु बाला और सीमा देवी का नाम शामिल है, जिनके नाम पर भी सहमति बनने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। फिलहाल यह पूरी तरह साफ है कि कांगड़ा जिला परिषद की कमान इस बार ओबीसी महिला के हाथ में होगी। अब सभी की नजरें भाजपा नेतृत्व और नवनिर्वाचित सदस्यों की आगामी बैठकों पर टिकी हैं, जहां से अंतिम नाम पर मुहर लगेगी।
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कांगड़ा जिला परिषद चुनावों में प्रमुख दलों की स्थिति पर नजर डालें तो यहां कुल निर्वाचित महिला सदस्यों में से भाजपा समर्थित 16, कांग्रेस समर्थित चार और सात निर्दलीय प्रत्याशी विजयी रही हैं। अध्यक्ष पद के लिए सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि ओबीसी वर्ग से निर्वाचित महिला सदस्यों में पूरी तरह भाजपा का दबदबा है, जबकि कांग्रेस की ओर से ओबीसी वर्ग की कोई भी महिला सदस्य चुनाव नहीं जीत सकी है।
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यह मौजूदा अंकगणित भाजपा को स्वाभाविक रूप से रेस में सबसे आगे रखता है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार अध्यक्ष के चयन में जातीय आरक्षण के साथ-साथ संगठनात्मक अनुभव, क्षेत्रीय संतुलन और भविष्य की रणनीति भी अहम होगी। इस दौड़ में भाजपा में कई नामों पर प्रमुखता से चर्चा हो रही है।
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भाजपा समर्थित इन प्रत्याशियों का पलड़ा भारी
सीमा कुमारी (कलियाड़ा) : लंबे समय से पार्टी से जुड़ी हैं और वर्तमान में लदवाड़ा महिला मोर्चा मंडल अध्यक्ष हैं। संगठन में सक्रियता इनकी बड़ी मजबूती है।
नीलम कुमारी (कोपड़ा) : भाजपा महिला मोर्चा की उपाध्यक्ष हैं और लंबे समय से पार्टी की मुख्य गतिविधियों में सक्रिय रही हैं।
अनुपमा कुमारी (बारी): भाजपा मंडल महिला मोर्चा की सचिव हैं और पंचायत स्तर पर सामाजिक-राजनीतिक रूप से खासी सक्रिय रही हैं।
मधुबाला (बड़ोह) व सुनीता देवी : मजबूत संगठनात्मक पकड़, क्षेत्रीय प्रभाव और पार्टी के भीतर अपनी स्वीकार्यता के चलते ये दोनों भी संभावित दावेदारों में शामिल हैं।
जोड़-तोड़ हुई तो निर्दलीय भी निभाएंगी अहम भूमिका
हालांकि भाजपा बहुमत के आंकड़े के बेहद करीब है, लेकिन यदि अध्यक्ष पद के चुनाव में कोई नया सियासी उलटफेर या जोड़-तोड़ की स्थिति बनती है तो ओबीसी वर्ग से जीतकर आईं तीन निर्दलीय महिला सदस्यों की भूमिका अहम हो जाएगी। इनमें निशा कुमारी, मधु बाला और सीमा देवी का नाम शामिल है, जिनके नाम पर भी सहमति बनने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। फिलहाल यह पूरी तरह साफ है कि कांगड़ा जिला परिषद की कमान इस बार ओबीसी महिला के हाथ में होगी। अब सभी की नजरें भाजपा नेतृत्व और नवनिर्वाचित सदस्यों की आगामी बैठकों पर टिकी हैं, जहां से अंतिम नाम पर मुहर लगेगी।