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जब गणेश भगवान को मिला गणाध्यक्ष होने का वरदान : सुमित शास्त्री

Wed, 05 Feb 2025 12:48 AM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा Updated Wed, 05 Feb 2025 12:48 AM IST
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When Lord Ganesha got the boon of being Ganadhyaksha: Sumit Shastri
स्वस्थानी माता मंदिर रक्कड़ पंजपीरी में भगवती व्रत कथा  के पांचवें दिन नाचते हुए संगत
रक्कड़ (कांगड़ा)। श्री स्वस्थानी माता मंदिर रक्कड़ पंजपीरी में भगवती व्रत कथा के पांचवें दिन पंडित सुमित शास्त्री ने कथा सुनाई। इस दौरान उन्होंने कहा कि गणेश भगवान को गणाध्यक्ष होने का वरदान मिला था। माता पार्वती ने एक दिन अपने शरीर से निकली उबटन से एक मूर्ति बनाई और अपनी शक्ति से उसे बालक बना दिया और फिर पहरेदारी के लिए उसे खड़ा कर दिया। जब उस बालक ने भगवान शिव को अंदर जाने से रोका तो क्रोध में आकर उसकी गर्दन काट दी।
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इस पर माता पार्वती ने बड़ा शोक किया। तब भोलेनाथ ने अपनी कृपा से उसे हाथी का सिर लगाकर पुन जीवित कर दिया। महादेव ने पार्वती के उस पुत्र को अपने गणों का अधिपति बनाते हुए उसका नाम गणेश रख दिया। इस बीच में सुंदर भजन गौरी पुत्र गणेश प्रथम प्रणाम करूं और शिव नाथ तेरी महिमा जब तीन लोक गाएं ने भक्तों को आनंद विभोर कर दिया। कथा के बाद यहां गणेश जी की सुंदर झांकी निकाली गई। कथा में शिवू, मोहित, सतीश कुमार, दीप कुमार, इंदु देवी, अनु कुमारी, निशा और सोनू ने भाग लिया।
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