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स्कूली दिनों से ही मन में सेना में जाने की इच्छा रखते थे राकेश सिंह

Wed, 09 Feb 2022 11:57 PM IST
Shimla	 Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Wed, 09 Feb 2022 11:57 PM IST
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wanted to join the army since childhood
शहीद राकेश सिंह अपनी पत्नी अंजलि के साथ फाइल फोटो - फोटो : Kangra
बैजनाथ (कांगड़ा)। उपमंडल के तीन दर्जन घरों के छोटे से गांव महेशगढ़ के 26 वर्षीय राकेश सिंह की बचपन से ही सेना में जाना चाहते थे। वे हंस मुख और सामाजिक गतिविधियों में अपने आप को शामिल रखने वाले व्यक्तित्व के धनी थे।
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2014 में जमा दो की परीक्षा राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल कुंदराल से पास करने के बाद उसके अगले वर्ष ही वे सेना में भर्ती हो गए थे। पिता जिगरी राम पूर्व सैनिक हैं । क्षेत्र के युवाआें का कहना है राकेश सिंह शुरू में ही सेना में जाने की इच्छा पाले हुए थे। स्कूल के दिनों में राकेश सिंह एथलेटिक्स में बढ़-चढ़कर भाग लेते थे। गांव में युवाओं की ओर से आयोजित सामाजिक गतिविधियों में कार्य करने के लिए राकेश सिंह सदैव आगे रहते थे। रविवार सुबह पिता जिगरी राम से हुई थोड़ी सी बातचीत में राकेश सिंह ने पूरे परिवार का हाल जाना था। तीन माह पूर्व ही राकेश सिंह अपने 6 माह के बेटे को छोड़ कर दिल्ली में ड्यूटी के लिए गए थे। राकेश सिंह की पत्नी अंजलि पति की मौत की खबर के बाद इतनी सहम गई है कि उसने 6 माह के अपने बच्चे रियांश के साथ अपने आप को कमरे में बंद कर लिया है। गांव में राकेश के साथ अधिकांश समय व्यतीत करने वाले उनके दोस्तों सुमित, अजय, लकी ,अनिल, राजकुमार, सुरेंद्र ,पंकज आदि का कहना है कि राकेश गांव के लिए पक्की सड़क और अन्य मूलभूत सुविधाओं को लेकर अक्सर बातें करते रहते थे और जब भी गांव में कोई सामाजिक कार्य होता था तो उसमें अपनी उपस्थिति दर्ज करवाते थे। उनका कहना है कि गांव के रास्ते को पक्का कर उसका नामकरण शहीद के नाम पर करना ही शहीद के लिए सच्ची श्रद्धांजलि होगी। गांव के रविंद्र राव का कहना है कि गांव के रास्ते का निर्माण राजनीति से ऊपर उठकर किया जाना चाहिए और गांव के श्मशानघाट की दयनीय हालत को ठीक किया जाना आवश्यक है। राकेश के पिता जिगरी राम ने भी गांव को पक्के रास्ते की सुविधा प्रदान करने और उसका नामकरण शहीद राकेश के नाम पर करने का आग्रह किया है।
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