{"_id":"60f1d47c8ebc3ec84762bb46","slug":"vijay-fought-to-the-death-for-six-hours-kangra-news-sml3771517169","type":"story","status":"publish","title_hn":"छह घंटे तक मौत से लड़ते रहे थे विजय कुमार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
छह घंटे तक मौत से लड़ते रहे थे विजय कुमार
विज्ञापन
शाहपुर (कांगड़ा)। कांगड़ा की वोह घाटी में भारी बारिश से सोमवार को मची तबाही का मंजर विजय कुमार की आंखों में रह रहकर तैर रहा है। शाहपुर अस्पताल में उपचाराधीन विजय मौत से छह घंटे तक जूझते रहे। किस्मत से वह पत्नी और एक बेटी समेत मौत के चुंगल से छूटने में कामयाब रहे। हालांकि, इस तबाही में डेढ़ साल की बेटी के हमेशा के लिए चले जाने का गम उन्हें जिंदगीभर सालता रहेगा।
वोह घाटी में सोमवार को आई आपदा में भारी तबाही के बीच 10 लोग मलबे में दब गए थे। नौ लोगों के शव बरामद किए जा चुके हैं। हादसे में गंभीर घायल छह लोग सिविल अस्पताल शाहपुर में उपचाराधीन हैं। मूल रूप से चंबा की सिंहुता तहसील के भियोरा गांव के निवासी 40 वर्षीय विजय कुमार भी इनमें से एक है। रोजी-रोटी के लिए विजय वोह में परिवार के साथ किराये के मकान में रह रहा था। बताया कि आपदा के समय वह परिवार सहित घर पर ही थे। सोमवार सुबह तेज बारिश के बाद करीब 10:30 बजे भूस्खलन हुआ। भारी भूस्खलन की आहट से जब तक वह संभल पाते मलबा उनके घर के ऊपर आ चुका था। घटना से कुछ देर पहले ही उन्होंने अपनी डेढ़ साल की बेटी शबनम को कमरे में सुलाया था। वह अपनी पत्नी रचना (30) और बेटी वंशिका (8) के साथ बरामदे में ही बैठे थे। एकदम से मलबा उनके घर के ऊपर आ गया था। उन्हें भागने तक का मौका नहीं मिला। मासूम शबनम को कमरे से उठा तक नहीं सके।
बकौल विजय उनका पूरा शरीर मलबे में दब चुका था। केवल कंधे से ऊपर का हिस्सा ही बचा था। तत्काल रिश्तेदारों और आसपास के लोगों को घटना के बारे में सूचित किया। कुछ देर बाद मोबाइल ने भी साथ छोड़ दिया। मलबे में करीब छह घंटे तक वह मौत से लड़ते रहे। सूचना पाकर मौके पर पहुंचे स्थानीय लोगों ने उनको और उनकी पत्नी रचना व वंशिका को मलबे से निकाला। विजय ने बताया कि उनकी पत्नी रचना भी उनके साथ सिविल अस्पताल शाहपुर में दाखिल है। उनके शरीर पर पत्थर गिरने के कारण टांग में गंभीर चोटें आई है। डबडबाती आंखों से उन्होंने बताया कि तबाही का वह भयानक मंजर रह-रहकर उन्हें रुला रहा है। डेढ़ साल की बेटी को न बचा पाने का दुख अब उनके लिए जिंदगी भर का दर्द बन गया है। कड़ी मेहनत से जो कुछ भी सामान और पैसे जोड़े थे, वह सब मलबे में दब गए हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
वोह घाटी में सोमवार को आई आपदा में भारी तबाही के बीच 10 लोग मलबे में दब गए थे। नौ लोगों के शव बरामद किए जा चुके हैं। हादसे में गंभीर घायल छह लोग सिविल अस्पताल शाहपुर में उपचाराधीन हैं। मूल रूप से चंबा की सिंहुता तहसील के भियोरा गांव के निवासी 40 वर्षीय विजय कुमार भी इनमें से एक है। रोजी-रोटी के लिए विजय वोह में परिवार के साथ किराये के मकान में रह रहा था। बताया कि आपदा के समय वह परिवार सहित घर पर ही थे। सोमवार सुबह तेज बारिश के बाद करीब 10:30 बजे भूस्खलन हुआ। भारी भूस्खलन की आहट से जब तक वह संभल पाते मलबा उनके घर के ऊपर आ चुका था। घटना से कुछ देर पहले ही उन्होंने अपनी डेढ़ साल की बेटी शबनम को कमरे में सुलाया था। वह अपनी पत्नी रचना (30) और बेटी वंशिका (8) के साथ बरामदे में ही बैठे थे। एकदम से मलबा उनके घर के ऊपर आ गया था। उन्हें भागने तक का मौका नहीं मिला। मासूम शबनम को कमरे से उठा तक नहीं सके।
विज्ञापन
बकौल विजय उनका पूरा शरीर मलबे में दब चुका था। केवल कंधे से ऊपर का हिस्सा ही बचा था। तत्काल रिश्तेदारों और आसपास के लोगों को घटना के बारे में सूचित किया। कुछ देर बाद मोबाइल ने भी साथ छोड़ दिया। मलबे में करीब छह घंटे तक वह मौत से लड़ते रहे। सूचना पाकर मौके पर पहुंचे स्थानीय लोगों ने उनको और उनकी पत्नी रचना व वंशिका को मलबे से निकाला। विजय ने बताया कि उनकी पत्नी रचना भी उनके साथ सिविल अस्पताल शाहपुर में दाखिल है। उनके शरीर पर पत्थर गिरने के कारण टांग में गंभीर चोटें आई है। डबडबाती आंखों से उन्होंने बताया कि तबाही का वह भयानक मंजर रह-रहकर उन्हें रुला रहा है। डेढ़ साल की बेटी को न बचा पाने का दुख अब उनके लिए जिंदगी भर का दर्द बन गया है। कड़ी मेहनत से जो कुछ भी सामान और पैसे जोड़े थे, वह सब मलबे में दब गए हैं।
विज्ञापन