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Kangra News: मैक्लो़डगंज में भूकंप के एपिसेंटर पर बना दिए दो होटल
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धर्मशाला। पर्यटन नगरी मैक्लोडंगज में बिना विशेषज्ञों की राय लिए अवैज्ञानिक तरीके से हो रहे निर्माण का खामियाजा लोगों को किसी भी समय भुगतना पड़ सकता है। मैक्लोडगंज में दो होटल ऐसी जगह बनाए गए हैं, जो भूकंप के एपिसेंटर हैं। अगर वहां पर तेज भूकंप आता है तो होटल की इमारत तो तहस-नहस होगी ही, साथ ही होटल में रहने वाले पर्यटकों को भी जानमाल का नुकसान हो सकता है। इसके अलावा होटल के आसपास के क्षेत्र को भी काफी क्षति पहुंचेगी। यह बात हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय के जियोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. अंबरीश महाजन ने वर्ष 1998 में ही अपनी रिपोर्ट में कह दी थी।
उन्होंने अपनी रिपोर्ट में साफ लिखा था कि जिस तरह से पहाड़ी क्षेत्र में निर्माण हो रहे हैं और निकासी का कोई साधन नहीं है तो आने वाले समय में मैक्लोडगंज जरूर धंसेगा। उन्होंने कहा है कि जिस जगह दो होटलों का निर्माण हुआ है, वहां पर भूकंप का एपिसेंटर है। उन्होंने उदाहरण के तौर पर बताया कि अगर किसी कुर्सी के पैर काट दिए जाएं तो कुर्सी एकदम से गिर जाती है। इसी तरह उन दो एपिसेंटर पर भूकंप आया तो इससे काफी नुकसान होगा।
हाल ही में धर्मशाला में आए भूकंप के बाद जिला प्रशासन भी हरकत में आया है। अब जियोलॉजिस्ट की याद आई। अब जियोलॉजिस्ट के साथ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर स्थिति को नियंत्रण करने की सलाह मांग रहे हैं। डॉ. अंबरीश का कहना है कि अगर उनसे रिपोर्ट मांगी जाती है तो वह जरूर प्रशासन को दी जाएगी। धर्मशाला में जून से हो रही लगातार बारिश से मैक्लोडगंज कई जगह से धंस रहा है। इससे कई जगह खतरा पैदा हो गया है। समय रहते अगर कोई उपाय नहीं किया गया तो भविष्य में भयानक परिणाम देखने को मिल सकते हैं।
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धर्मशाला में हुए भूकंप और लगातार हो रहे भूस्खलन को लेकर निरीक्षण किया जा रहा है। केंद्रीय विश्वविद्यालय के डॉ. अंबरीश ने काफी सुझाव दिए हैं। एक बार उनकी 1998 वाली रिपोर्ट की स्टडी की जाएगी, जिससे कोई प्लान तैयार किया जा सके।
- गिरी राज ठाकुर, तहसीलदार, धर्मशाला।
- अगर जल्द धर्मशाला-मैक्लोडगंज में ड्रेनेज सिस्टम को दुरुस्त नहीं किया गया तो आने वाले समय में यहां जोशी मठ जैसे हालात बन सकते हैं। 1998 में सौंपी गई रिपोर्ट में शहर की समस्या के बारे में काफी कुछ है। अगर प्रशासन को रिपोर्ट चाहिए होगी को उपलब्ध करवा दी जाएगी। मैक्लोडगंज में दो जगह होटल भूकंप के एपिसेंटर पर बनाए गए हैं जो किसी भी समय तबाही कर सकते हैं।
- डॉ. अंबरीश महाजन, विभागाध्यक्ष, जियोलॉजी विभाग, हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय
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उन्होंने अपनी रिपोर्ट में साफ लिखा था कि जिस तरह से पहाड़ी क्षेत्र में निर्माण हो रहे हैं और निकासी का कोई साधन नहीं है तो आने वाले समय में मैक्लोडगंज जरूर धंसेगा। उन्होंने कहा है कि जिस जगह दो होटलों का निर्माण हुआ है, वहां पर भूकंप का एपिसेंटर है। उन्होंने उदाहरण के तौर पर बताया कि अगर किसी कुर्सी के पैर काट दिए जाएं तो कुर्सी एकदम से गिर जाती है। इसी तरह उन दो एपिसेंटर पर भूकंप आया तो इससे काफी नुकसान होगा।
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हाल ही में धर्मशाला में आए भूकंप के बाद जिला प्रशासन भी हरकत में आया है। अब जियोलॉजिस्ट की याद आई। अब जियोलॉजिस्ट के साथ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर स्थिति को नियंत्रण करने की सलाह मांग रहे हैं। डॉ. अंबरीश का कहना है कि अगर उनसे रिपोर्ट मांगी जाती है तो वह जरूर प्रशासन को दी जाएगी। धर्मशाला में जून से हो रही लगातार बारिश से मैक्लोडगंज कई जगह से धंस रहा है। इससे कई जगह खतरा पैदा हो गया है। समय रहते अगर कोई उपाय नहीं किया गया तो भविष्य में भयानक परिणाम देखने को मिल सकते हैं।
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धर्मशाला में हुए भूकंप और लगातार हो रहे भूस्खलन को लेकर निरीक्षण किया जा रहा है। केंद्रीय विश्वविद्यालय के डॉ. अंबरीश ने काफी सुझाव दिए हैं। एक बार उनकी 1998 वाली रिपोर्ट की स्टडी की जाएगी, जिससे कोई प्लान तैयार किया जा सके।
- गिरी राज ठाकुर, तहसीलदार, धर्मशाला।
- अगर जल्द धर्मशाला-मैक्लोडगंज में ड्रेनेज सिस्टम को दुरुस्त नहीं किया गया तो आने वाले समय में यहां जोशी मठ जैसे हालात बन सकते हैं। 1998 में सौंपी गई रिपोर्ट में शहर की समस्या के बारे में काफी कुछ है। अगर प्रशासन को रिपोर्ट चाहिए होगी को उपलब्ध करवा दी जाएगी। मैक्लोडगंज में दो जगह होटल भूकंप के एपिसेंटर पर बनाए गए हैं जो किसी भी समय तबाही कर सकते हैं।
- डॉ. अंबरीश महाजन, विभागाध्यक्ष, जियोलॉजी विभाग, हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय