{"_id":"621670fd6506bd5ca2273277","slug":"three-days-police-remand-to-the-accused-caught-with-white-sandalwood-kangra-news-sml4005550197","type":"story","status":"publish","title_hn":"सफेद चंदन के साथ पकड़े गए आरोपी युवकों को तीन दिन का पुलिस रिमांड","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सफेद चंदन के साथ पकड़े गए आरोपी युवकों को तीन दिन का पुलिस रिमांड
विज्ञापन
देहरागोपीपुर (कांगड़ा)। चिंतपूर्णी-समनोली संपर्क मार्ग पर नाके के दौरान 39 किलो सफेद चंदन के साथ पकड़े गए तीनों युवकों को देहरा कोर्ट में पेश किया गया। जहां तीनों आरोपी युवकों को कोर्ट ने तीन दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया है।
तीनों युवकों की पहचान ऋषभ कुमार (26) निवासी रोड़ी कोड़ी, आशीष कुमार (26) निवासी चिंतपूर्णी और सुरेंद्र कुमार (27) निवासी बसलाहड़ के तौर पर हुई है। डीएसपी देहरा अंकित शर्मा ने बताया कि कोर्ट ने आरोपियों को तीन दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
वन विभाग के पास आधिकारिक आंकड़ा नहीं: सन्नी
ज्वालामुखी अब तक चंदन तस्करी का सबसे बड़ा गढ़ रहा है। साथ ही रक्कड़ के पंजपीरी क्षेत्र में चंदन के पेड़ पाए जाते हैं। इन पर चंदन तस्करों की नजर रहती है। बताया जाता है कि ज्वालामुखी के कालीधार के जंगल में चंदन के सैकड़ों पेड़ थे, जो अब न के बराबर रहे हैं। 1983 में वन भूमि पर कालीधार और आसपास के इलाके में चंदन के 26 पेड़ दर्ज किए गए थे। 1986 में यह बढ़कर 65 हुए। 1994 में 184, 1996 में 272 जबकि 2006 तक इनकी संख्या 9000 के करीब पहुंच गई। इसके अलावा निजी भूमि पर भी चंदन के हजारों पेड़ पाए गए, जिन्हें तस्करों ने धीरे-धीरे काट डाला। ज्वालामुखी में 1942 में चंदन का पहला पौधा उगाया था। उधर, इस बारे में डीएफओ सन्नी वर्मा का कहना है कि अभी तक वन विभाग के पास चंदन के पेड़ों का कोई आधिकारिक आंकड़ा नहीं है।
विज्ञापन
विज्ञापन
तीनों युवकों की पहचान ऋषभ कुमार (26) निवासी रोड़ी कोड़ी, आशीष कुमार (26) निवासी चिंतपूर्णी और सुरेंद्र कुमार (27) निवासी बसलाहड़ के तौर पर हुई है। डीएसपी देहरा अंकित शर्मा ने बताया कि कोर्ट ने आरोपियों को तीन दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
विज्ञापन
वन विभाग के पास आधिकारिक आंकड़ा नहीं: सन्नी
ज्वालामुखी अब तक चंदन तस्करी का सबसे बड़ा गढ़ रहा है। साथ ही रक्कड़ के पंजपीरी क्षेत्र में चंदन के पेड़ पाए जाते हैं। इन पर चंदन तस्करों की नजर रहती है। बताया जाता है कि ज्वालामुखी के कालीधार के जंगल में चंदन के सैकड़ों पेड़ थे, जो अब न के बराबर रहे हैं। 1983 में वन भूमि पर कालीधार और आसपास के इलाके में चंदन के 26 पेड़ दर्ज किए गए थे। 1986 में यह बढ़कर 65 हुए। 1994 में 184, 1996 में 272 जबकि 2006 तक इनकी संख्या 9000 के करीब पहुंच गई। इसके अलावा निजी भूमि पर भी चंदन के हजारों पेड़ पाए गए, जिन्हें तस्करों ने धीरे-धीरे काट डाला। ज्वालामुखी में 1942 में चंदन का पहला पौधा उगाया था। उधर, इस बारे में डीएफओ सन्नी वर्मा का कहना है कि अभी तक वन विभाग के पास चंदन के पेड़ों का कोई आधिकारिक आंकड़ा नहीं है।
विज्ञापन