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Kangra News: डल के जख्म भरे, अब भर रहा जल
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डलझील मैक्लोडगंज
धर्मशाला। पर्यटन नगरी मैक्लोडगंज की प्रसिद्ध डल झील में पानी के रिसाव की समस्या अब काफी हद तक हल हो चुकी है। इससे झील अब फिर से जीवन मिलता दिखाई दे रहा है। अगर हालात ठीक रहे तो बरसात में झील में पर्यटक नाव की सवारी का आनंद लेंगे। जीर्णोद्धार के कार्य के दौरान काम में जुटे कामगारों को झील के भीतर पानी के कई छोटे-छोटे प्राकृतिक स्रोत भी नजर आए हैं।
बरसात के मौसम से पहले पानी के रिसाव को पूरी तरह रोकने समेत अन्य सभी विकास के कार्य पूरे कर लिए जाएंगे। जानकारी के अनुसार प्रशासन ने डल झील को सुंदर और आकर्षक बनाने का कार्य खंड विकास अधिकारी धर्मशाला को सौंपा है। टेंडर की औपचारिकताएं पूरी करने के बाद विकास कार्य जारी हैं। बरसात में जैसे ही यह झील पानी से लबालब भर जाएगी, उसके बाद इस झील में दो सीटर और चार सीटर नाव चलाईं जाएंगी, ताकि यहां आने वाले पर्यटक यहां प्रकृति के नजारे का आनंद उठा सकें। उल्लेखनीय है कि पिछले डेढ़ साल से यह झील सूख रही है। एक समय तो पानी के रिसाव के चलते यहां पानी पूरी तरह सूख गया। इस झील का पर्यटन के साथ धार्मिक महत्व भी है। हर साल राधाष्टमी को दूर-दूर से श्रद्धालु यहां आकर स्नान करते हैं।
डल झील से होने वाले पानी के रिसाव को रोकने का काम काफी हद तक पूरा कर लिया गया है। बरसात में जब डल झील पूरी पानी से लबालब लो जाएगी तो इसमें पैडल से चलने वाली नाव भी डाली जाएंगी।
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हेमराज बैरवा, उपायुक्त कांगड़ा
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बरसात के मौसम से पहले पानी के रिसाव को पूरी तरह रोकने समेत अन्य सभी विकास के कार्य पूरे कर लिए जाएंगे। जानकारी के अनुसार प्रशासन ने डल झील को सुंदर और आकर्षक बनाने का कार्य खंड विकास अधिकारी धर्मशाला को सौंपा है। टेंडर की औपचारिकताएं पूरी करने के बाद विकास कार्य जारी हैं। बरसात में जैसे ही यह झील पानी से लबालब भर जाएगी, उसके बाद इस झील में दो सीटर और चार सीटर नाव चलाईं जाएंगी, ताकि यहां आने वाले पर्यटक यहां प्रकृति के नजारे का आनंद उठा सकें। उल्लेखनीय है कि पिछले डेढ़ साल से यह झील सूख रही है। एक समय तो पानी के रिसाव के चलते यहां पानी पूरी तरह सूख गया। इस झील का पर्यटन के साथ धार्मिक महत्व भी है। हर साल राधाष्टमी को दूर-दूर से श्रद्धालु यहां आकर स्नान करते हैं।
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डल झील से होने वाले पानी के रिसाव को रोकने का काम काफी हद तक पूरा कर लिया गया है। बरसात में जब डल झील पूरी पानी से लबालब लो जाएगी तो इसमें पैडल से चलने वाली नाव भी डाली जाएंगी।
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हेमराज बैरवा, उपायुक्त कांगड़ा