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Kangra News: विकास की डगर में खो गया रास्ता, ग्रामीणों ने पहाड़ी काटकर ढूंढ निकाला
Fri, 19 Jul 2024 05:02 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Fri, 19 Jul 2024 05:02 AM IST
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कोटला (कांगड़ा)। त्रिलोकपुर के स्थानीय लोगों ने श्रमदान के जरिये पहाड़ी को काटकर रास्ता बनाकर एक मिसाल कायम की है। पठानकोट-मंडी राष्ट्रीय राजमार्ग पर प्राकृतिक शिव मंदिर त्रिलोकपुर के पास हुए फोरलेन निर्माण कार्य के कारण त्रिलोकपुर गांव को जाने वाला सदियों पुराना रास्ता ध्वस्त हो गया था। इसके बाद फोरलेन निर्माण कंपनी ने निर्माण कार्य पूरा होने पर इस रास्ते के निर्माण का वादा किया था, लेकिन फोरलेन निर्माण कार्य पूरा हो जाने के बाद भी रास्ते का निर्माण नहीं किया और न ही इस रास्ते की कोई सुध ली।
अब त्रिलोकपुर के स्थानीय निवासी रवि कुमार ने इस पैदल रास्ते के निर्माण के लिए श्रमदान शुरू किया, उसके बाद गांव के लोग उनसे जुड़ते चले गए। पूर्व प्रधान सरूप कृष्ण, छोटू राम, रवि कुमार, सुनील कुमार, करतार सिंह, कपिल देव, दिनेश कुमार और धर्मेंद्र शर्मा आदि इस अभियान के साथ जुड़े और एक सप्ताह मेहनत कर पहाड़ी को काटकर इस रास्ते को ठीक कर दिया।
75 साल छोटू राम भी रहे शामिल
त्रिलोकपुर के निवासी छोटूराम ने 75 वर्ष की उम्र में श्रमदान कर एक मिसाल पेश की। इस उम्र में उन्होंने रास्ता बनाने की ठानी और अब एक हफ्ते में रास्ता तैयार हो गया है।
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अब आसानी से घर तक पहुंच सकेंगे लोग
इसी रास्ते के बंद हो जाने से लोगों को प्राकृतिक शिव मंदिर त्रिलोकपुर तक पहुंचने 32 मील या कोटला तक का लंबा सफर तय जाना पड़ रहा था, जबकि इस रास्ते से लोग आसानी से पहुंच जाया करते थे।
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अब त्रिलोकपुर के स्थानीय निवासी रवि कुमार ने इस पैदल रास्ते के निर्माण के लिए श्रमदान शुरू किया, उसके बाद गांव के लोग उनसे जुड़ते चले गए। पूर्व प्रधान सरूप कृष्ण, छोटू राम, रवि कुमार, सुनील कुमार, करतार सिंह, कपिल देव, दिनेश कुमार और धर्मेंद्र शर्मा आदि इस अभियान के साथ जुड़े और एक सप्ताह मेहनत कर पहाड़ी को काटकर इस रास्ते को ठीक कर दिया।
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75 साल छोटू राम भी रहे शामिल
त्रिलोकपुर के निवासी छोटूराम ने 75 वर्ष की उम्र में श्रमदान कर एक मिसाल पेश की। इस उम्र में उन्होंने रास्ता बनाने की ठानी और अब एक हफ्ते में रास्ता तैयार हो गया है।
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अब आसानी से घर तक पहुंच सकेंगे लोग
इसी रास्ते के बंद हो जाने से लोगों को प्राकृतिक शिव मंदिर त्रिलोकपुर तक पहुंचने 32 मील या कोटला तक का लंबा सफर तय जाना पड़ रहा था, जबकि इस रास्ते से लोग आसानी से पहुंच जाया करते थे।