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Kangra News: नियम 7ए हटाने के विरोध में कर्मचारी संघ ने सौंपा ज्ञापन
Mon, 08 Sep 2025 08:37 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Mon, 08 Sep 2025 08:37 AM IST
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कांगड़ा में अराजपत्रित कर्मचारी संघ के पदाधिकारियों से बातचीत करते विधायक आरएस बाली। -स्रोत : स
कांगड़ा। वित्त विभाग की ओर से हिमाचल प्रदेश सिविल सेवा (संशोधित वेतन) नियम, 2022 के नियम 7ए को हटाने के विरोध में रविवार को अराजपत्रित कर्मचारी संघ उपायुक्त कार्यालय धर्मशाला ने कांगड़ा में विधायक आरएस बाली को ज्ञापन सौंपा। इस मौके पर धर्मशाला के कर्मचारियों और अन्य विभागों के कर्मचारी मौजूद रहे।
कर्मचारियों ने बताया कि इस एकतरफा फैसले से सरकारी कर्मचारियों में व्यापक आक्रोश और अशांति पैदा हो गई है। नियम 7ए हटाने से प्रत्येक कर्मचारी को 15,000 से 20,000 रुपये प्रतिमाह का नुकसान होगा। इससे राज्य में हजारों परिवारों को गंभीर वित्तीय कठिनाई का सामना करना पड़ेगा।
कर्मचारी संघ ने कहा कि इस संशोधन को पूर्वव्यापी रूप से लागू करना अन्यायपूर्ण है, क्योंकि कर्मचारी पहले ही उक्त नियम के तहत वेतन और लाभ प्राप्त कर चुके हैं। सरकार के इस फैसले से कर्मचारियों का मनोबल, दक्षता और विश्वास प्रभावित हो रहा है। संघ ने सरकार से अधिसूचना पर पुनर्विचार करने और इसे तुरंत प्रभाव से वापस लेने का अनुरोध किया।
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इसी के साथ, राजकीय संस्कृत शिक्षक परिषद जिला कांगड़ा के अध्यक्ष दीप कुमार शास्त्री ने भी उच्च वेतनमान की नई अधिसूचना को वापस लेने की मांग की है।
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कर्मचारियों ने बताया कि इस एकतरफा फैसले से सरकारी कर्मचारियों में व्यापक आक्रोश और अशांति पैदा हो गई है। नियम 7ए हटाने से प्रत्येक कर्मचारी को 15,000 से 20,000 रुपये प्रतिमाह का नुकसान होगा। इससे राज्य में हजारों परिवारों को गंभीर वित्तीय कठिनाई का सामना करना पड़ेगा।
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कर्मचारी संघ ने कहा कि इस संशोधन को पूर्वव्यापी रूप से लागू करना अन्यायपूर्ण है, क्योंकि कर्मचारी पहले ही उक्त नियम के तहत वेतन और लाभ प्राप्त कर चुके हैं। सरकार के इस फैसले से कर्मचारियों का मनोबल, दक्षता और विश्वास प्रभावित हो रहा है। संघ ने सरकार से अधिसूचना पर पुनर्विचार करने और इसे तुरंत प्रभाव से वापस लेने का अनुरोध किया।
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इसी के साथ, राजकीय संस्कृत शिक्षक परिषद जिला कांगड़ा के अध्यक्ष दीप कुमार शास्त्री ने भी उच्च वेतनमान की नई अधिसूचना को वापस लेने की मांग की है।