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Kangra News: तकनीकी शिक्षा बोर्ड अब क्यूआर कोड वाले वाटरप्रूफ डिप्लोमा करेगा जारी
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धर्मशाला। हिमाचल प्रदेश तकनीकी शिक्षा बोर्ड अब विद्यार्थियों को क्यूआर कोड से लैस वाटरप्रूफ डिप्लोमा जारी करेगा। एन-2022 योजना के तहत तैयार किए जा रहे ये आधुनिक डिप्लोमा नॉन-टियरबल सामग्री से बने हैं, जिससे ये न तो पानी से खराब होंगे और न ही फटेंगे। डिप्लोमा पर अंकित क्यूआर कोड की मदद से दस्तावेजों का सत्यापन अब पहले से कहीं अधिक सरल, त्वरित और विश्वसनीय तरीके से हो सकेगा।
तकनीकी शिक्षा बोर्ड के सचिव रविंद्र शर्मा ने बताया कि पारंपरिक कागजी डिप्लोमा की तुलना में नए प्रमाण-पत्रों की गुणवत्ता और सुरक्षा काफी बेहतर होगी। इससे छात्रों के महत्वपूर्ण शैक्षणिक दस्तावेज लंबे समय तक सुरक्षित रहेंगे। इसके साथ ही नेशनल एकेडमिक डिपॉजिटरी (एनएडी) अथॉरिटी, नई दिल्ली के दिशा-निर्देशों के तहत इन डिप्लोमा को डिजिलॉकर पर भी अपलोड किया जाएगा।
इससे विद्यार्थी अपने शैक्षणिक दस्तावेज डिजिटल रूप में सुरक्षित रख सकेंगे और जरूरत पड़ने पर उन्हें तुरंत उपलब्ध करा सकेंगे। सचिव ने कहा कि तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी के निर्देशों के तहत बोर्ड में कई तकनीकी सुधार किए जा रहे हैं।
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वहीं, शिमला में हुई बैठक के दौरान तकनीकी शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव डॉ. अभिषेक जैन ने परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी बनाने और डिजिटल माध्यमों से नकल पर अंकुश लगाने के निर्देश दिए थे। एन-22 स्कीम के तहत यह पहल दस्तावेजों की सुरक्षा और पारदर्शिता में अहम साबित होगी।
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तकनीकी शिक्षा बोर्ड के सचिव रविंद्र शर्मा ने बताया कि पारंपरिक कागजी डिप्लोमा की तुलना में नए प्रमाण-पत्रों की गुणवत्ता और सुरक्षा काफी बेहतर होगी। इससे छात्रों के महत्वपूर्ण शैक्षणिक दस्तावेज लंबे समय तक सुरक्षित रहेंगे। इसके साथ ही नेशनल एकेडमिक डिपॉजिटरी (एनएडी) अथॉरिटी, नई दिल्ली के दिशा-निर्देशों के तहत इन डिप्लोमा को डिजिलॉकर पर भी अपलोड किया जाएगा।
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इससे विद्यार्थी अपने शैक्षणिक दस्तावेज डिजिटल रूप में सुरक्षित रख सकेंगे और जरूरत पड़ने पर उन्हें तुरंत उपलब्ध करा सकेंगे। सचिव ने कहा कि तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी के निर्देशों के तहत बोर्ड में कई तकनीकी सुधार किए जा रहे हैं।
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वहीं, शिमला में हुई बैठक के दौरान तकनीकी शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव डॉ. अभिषेक जैन ने परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी बनाने और डिजिटल माध्यमों से नकल पर अंकुश लगाने के निर्देश दिए थे। एन-22 स्कीम के तहत यह पहल दस्तावेजों की सुरक्षा और पारदर्शिता में अहम साबित होगी।