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Kangra News: संजीव और अचल की नियुक्तियों से सियासत में हलचल
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परागपुर(कांगड़ा)। जसवां-परागपुर विधानसभा क्षेत्र में भाजपा ने दो अहम संगठनात्मक नियुक्तियों के जरिए राजनीतिक संतुलन साधने की कोशिश की है। पार्टी ने परागपुर क्षेत्र से पूर्व जिला भाजपा अध्यक्ष संजीव शर्मा को प्रदेश का सह-मीडिया प्रभारी और जसवां क्षेत्र से अचल पठानिया को प्रदेश भाजपा कार्यसमिति का सदस्य नियुक्त किया है। अचल पठानिया पूर्व में भाजयुमो के प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष रह चुके हैं और युवाओं में उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है। वहीं संजीव शर्मा परागपुर क्षेत्र में संगठन के अनुभवी और सक्रिय चेहरों में गिने जाते हैं। पार्टी की यह जोड़ी अब जसवां-परागपुर की सियासत में नया संतुलन बनाने की दिशा में देखी जा रही है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि भाजपा ने यह कदम क्षेत्र में संगठन को फिर से सक्रिय करने और स्थानीय स्तर पर मजबूती लाने के उद्देश्य से उठाया है।
वर्तमान में जसवां-परागपुर का प्रतिनिधित्व पूर्व उद्योग एवं परिवहन मंत्री बिक्रम ठाकुर कर रहे हैं, जिनकी पकड़ क्षेत्र में काफी मजबूत मानी जाती है। ऐसे में यह भी चर्चा है कि इन तीनों नेताओं बिक्रम ठाकुर, संजीव शर्मा और अचल पठानिया की आस्थाएं किन-किन नेताओं और खेमों से जुड़ी हैं, यह क्षेत्र के लोग भली-भांति जानते हैं। तीनों के बीच तालमेल कितना है, यह बात भी किसी से छिपी नहीं है। यही कारण है कि इन नियुक्तियों के बाद स्थानीय राजनीति में नए समीकरण बनने और पुराने रिश्तों के परखे जाने की संभावना जताई जा रही है। स्थानीय राजनीतिक गलियारों में यह भी माना जा रहा है कि पार्टी की यह रणनीति आगामी चुनावों से पहले क्षेत्र में संगठन को फिर से जोश दिलाने का प्रयास है।
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वर्तमान में जसवां-परागपुर का प्रतिनिधित्व पूर्व उद्योग एवं परिवहन मंत्री बिक्रम ठाकुर कर रहे हैं, जिनकी पकड़ क्षेत्र में काफी मजबूत मानी जाती है। ऐसे में यह भी चर्चा है कि इन तीनों नेताओं बिक्रम ठाकुर, संजीव शर्मा और अचल पठानिया की आस्थाएं किन-किन नेताओं और खेमों से जुड़ी हैं, यह क्षेत्र के लोग भली-भांति जानते हैं। तीनों के बीच तालमेल कितना है, यह बात भी किसी से छिपी नहीं है। यही कारण है कि इन नियुक्तियों के बाद स्थानीय राजनीति में नए समीकरण बनने और पुराने रिश्तों के परखे जाने की संभावना जताई जा रही है। स्थानीय राजनीतिक गलियारों में यह भी माना जा रहा है कि पार्टी की यह रणनीति आगामी चुनावों से पहले क्षेत्र में संगठन को फिर से जोश दिलाने का प्रयास है।
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