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Kangra News: अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने अपील लंबित रहने तक सजा पर लगाई रोक
Sun, 12 Apr 2026 05:23 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Sun, 12 Apr 2026 05:23 AM IST
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निचली अदालत ने दोषी महिला को 14 लाख रुपये मुआवजा देने के दिए हैं आदेश
संवाद न्यूज एजेंसी
धर्मशाला। चेक बाउंस मामले में दोषी ठहराई एक महिला को अदालत से राहत मिली है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश देहरा की अदालत ने अपील लंबित रहने तक महिला की सजा पर रोक लगा दी है। महिला को अतिरिक्त मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी देहरा की अदालत ने 16 फरवरी 2026 को चेक बाउंस के मामले में दोषी करार दिया था।
अदालत ने 23 फरवरी 2026 को सजा सुनाते हुए उसे छह महीने के साधारण कारावास और 14 लाख रुपये मुआवजा अदा करने के आदेश दिए। साथ ही मुआवजा राशि जमा न करने की स्थिति में एक माह की अतिरिक्त सजा का प्रावधान किया था।
इस फैसले के खिलाफ दोषी महिला ने अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश देहरा की अदालत में अपील दायर की। अदालत ने अपील को स्वीकार करते हुए सुनवाई के लिए मंजूर कर लिया। सुनवाई के दौरान अदालत ने माना कि अपील के निपटारे में समय लगेगा, ऐसे में न्यायहित में सजा को फिलहाल स्थगित किया जाना उचित है।
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अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि आरोपी को राहत शर्तों के साथ दी गई है। आरोपी को डेढ़ लाख रुपये का निजी मुचलका और इतनी ही राशि का एक जमानती प्रस्तुत करना होगा। साथ ही महिला को मुआवजा राशि का 20 फीसदी एक महीने के भीतर ट्रायल कोर्ट में जमा करवाना होगा। यह भी निर्देश दिया कि यदि अपील खारिज होती है तो आरोपी को स्वयं अदालत में उपस्थित होकर सजा भुगतनी होगी।
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संवाद न्यूज एजेंसी
धर्मशाला। चेक बाउंस मामले में दोषी ठहराई एक महिला को अदालत से राहत मिली है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश देहरा की अदालत ने अपील लंबित रहने तक महिला की सजा पर रोक लगा दी है। महिला को अतिरिक्त मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी देहरा की अदालत ने 16 फरवरी 2026 को चेक बाउंस के मामले में दोषी करार दिया था।
अदालत ने 23 फरवरी 2026 को सजा सुनाते हुए उसे छह महीने के साधारण कारावास और 14 लाख रुपये मुआवजा अदा करने के आदेश दिए। साथ ही मुआवजा राशि जमा न करने की स्थिति में एक माह की अतिरिक्त सजा का प्रावधान किया था।
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इस फैसले के खिलाफ दोषी महिला ने अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश देहरा की अदालत में अपील दायर की। अदालत ने अपील को स्वीकार करते हुए सुनवाई के लिए मंजूर कर लिया। सुनवाई के दौरान अदालत ने माना कि अपील के निपटारे में समय लगेगा, ऐसे में न्यायहित में सजा को फिलहाल स्थगित किया जाना उचित है।
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अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि आरोपी को राहत शर्तों के साथ दी गई है। आरोपी को डेढ़ लाख रुपये का निजी मुचलका और इतनी ही राशि का एक जमानती प्रस्तुत करना होगा। साथ ही महिला को मुआवजा राशि का 20 फीसदी एक महीने के भीतर ट्रायल कोर्ट में जमा करवाना होगा। यह भी निर्देश दिया कि यदि अपील खारिज होती है तो आरोपी को स्वयं अदालत में उपस्थित होकर सजा भुगतनी होगी।