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Himachal: 30 शर्तों वाला सत्यापित शपथ पत्र देने के फैसले का तकनीकी सहायक संघ ने किया विरोध
Thu, 16 Oct 2025 04:26 PM IST
Krishan Singh
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
Published by: Krishan Singh
Updated Thu, 16 Oct 2025 04:26 PM IST
सार
तकनीकी सहायकों के साथ मनरेगा के अंतर्गत तैनात ग्राम रोजगार सेवक, कंप्यूटर ऑपरेटर, कनिष्ठ लेखापाल को एक तानाशाही फरमान जारी करते हुए एक एग्रीमेंट साइन करने को कहा है।
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प्रदर्शन (सांकेतिक )
- फोटो : Adobe Stock
विस्तार
हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य के जिला परिषद में तैनात 400 तकनीकी सहायकों के साथ मनरेगा के अंतर्गत तैनात ग्राम रोजगार सेवक, कंप्यूटर ऑपरेटर, कनिष्ठ लेखापाल को एक तानाशाही फरमान जारी करते हुए एक एग्रीमेंट साइन करने को कहा है। इसके अनुसार मनरेगा कर्मचारियों को अब 30 शर्तों वाला सत्यापित शपथ पत्र जमा करना होगा। इसमें ग्रामीण विकास विभाग ने मानकीकृत अनुबंध प्रपत्र भरने के निर्देश जारी किए हैं। कर्मचारियों को लिखित रूप में स्वीकार करना होगा कि उनकी नियुक्ति अस्थायी, परियोजना विशिष्ट और संविदात्मक है। यह राज्य सरकार के सिविल पद के अंतर्गत नहीं आती व वे नियमितीकरण, पेंशन, जीपीएफ या अन्य सरकारी लाभों के पात्र नहीं होंगे।
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इस मामले को लेकर प्रदेश तकनीकी सहायक संघ ने गूगल मीट की, जिसमें सभी जिला के तकनीकी सहायकों ने भाग लिया। इस बैठक में सभी तकनीकी सहायकों ने विभाग के इस फैसले की कड़ी निंदा की है और सरकार से फैसले को तुरंत प्रभाव से वापस लेने की मांग की है। संघ की प्रदेश अध्यक्ष संजना वर्मा ने कहा कि विभाग की ओर से अब इन कर्मचारियों को संविदात्मक अनुबंध पर हस्ताक्षर करने के लिए पत्र जारी किया जाना पूर्णत अनुचित है। यह योजना न केवल कर्मचारियों के वेतन और सेवा सुरक्षा के अधिकारों का उल्लंघन है, बल्कि उनकी वर्तमान नियमित सेवा को अस्थायी और अनिश्चित स्थिति में डालना है, जो किसी भी मानवीय या कानूनी दायरे में स्वीकार्य नहीं है।
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संघ ने मांग की है कि सभी तकनीकी सहायकों को जिला परिषद से वेतन दिया जाए और यदि आवश्यक हो तो कर्मचारियों के मुद्दे पर विभाग और संघ के बीच पारदर्शी वार्ता आयोजित की जाए। संघ सरकार से अपील करता है कि वह तत्काल इस नीति को वापस लेकर कर्मचारियों के अधिकारों की सुरक्षा करे व कर्मचारियों के हितों को प्राथमिकता दे। तकनीकी सहायकों को चरणबद्ध आंदोलन करने के लिए बाध्य ना करे और मुख्यमंत्री इस मुद्दे पर संज्ञान ले और इस पत्र को बापिस लेने के विभाग को आदेश जारी करें (
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