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शिक्षक आत्मनिर्भर विश्वविद्यालय और विकसित भारत के निर्माता : बंसल
Sun, 06 Sep 2026 07:03 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Sun, 06 Sep 2026 07:03 AM IST
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कहा, शोध को समाज की समस्याओं से जोड़ें, विद्यार्थियों को रोजगार सृजक बनाएं
अमर उजाला ब्यूरो
धर्मशाला। शिक्षक केवल ज्ञान देने वाले नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण, नवाचार, शोध और राष्ट्र निर्माण के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। कृत्रिम बुद्धिमत्ता के दौर में भी शिक्षक की भूमिका अहम है। एआई जवाब दे सकती है, लेकिन सही सवाल पूछना शिक्षक सिखाता है। यह बात केंद्रीय विश्वविद्यालय हिमाचल प्रदेश (सीयू) के कुलपति प्रो. (डॉ.) एसपी बंसल ने शिक्षक दिवस पर विश्वविद्यालय परिवार को संबोधित करते हुए कही।
उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री देना नहीं, बल्कि ज्ञान, विवेक, संवेदनशीलता, नैतिकता और सामाजिक उत्तरदायित्व से युक्त व्यक्तित्व तैयार करना है। तकनीक शिक्षा की सहयोगी हो सकती है, लेकिन मानवीय संवेदना और मूल्य आधारित निर्णय का स्थान नहीं ले सकती।
कुलपति ने आत्मनिर्भर विश्वविद्यालय के निर्माण पर कहा कि शिक्षकों की प्रतिभा, शोधार्थियों की जिज्ञासा और विद्यार्थियों की ऊर्जा को संस्थागत शक्ति में बदलना होगा। शोध केवल शोध पत्रों तक सीमित न रहे, बल्कि समाज की वास्तविक समस्याओं के समाधान का माध्यम बने।
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उन्होंने कहा कि हिमालयी क्षेत्र में स्थित सीयू अपनी अकादमिक पहचान भी हिमालय केंद्रित शोध से बना सकता है। हिमालयी पारिस्थितिकी, जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता, आपदा प्रबंधन, पर्वतीय कृषि और सतत पर्यटन जैसे क्षेत्रों में शोध को बढ़ावा देने की जरूरत है। उन्होंने विद्यार्थियों से रोजगार तलाशने के साथ रोजगार सृजक, नवाचारी और उद्यमी बनने का आह्वान किया।
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अमर उजाला ब्यूरो
धर्मशाला। शिक्षक केवल ज्ञान देने वाले नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण, नवाचार, शोध और राष्ट्र निर्माण के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। कृत्रिम बुद्धिमत्ता के दौर में भी शिक्षक की भूमिका अहम है। एआई जवाब दे सकती है, लेकिन सही सवाल पूछना शिक्षक सिखाता है। यह बात केंद्रीय विश्वविद्यालय हिमाचल प्रदेश (सीयू) के कुलपति प्रो. (डॉ.) एसपी बंसल ने शिक्षक दिवस पर विश्वविद्यालय परिवार को संबोधित करते हुए कही।
उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री देना नहीं, बल्कि ज्ञान, विवेक, संवेदनशीलता, नैतिकता और सामाजिक उत्तरदायित्व से युक्त व्यक्तित्व तैयार करना है। तकनीक शिक्षा की सहयोगी हो सकती है, लेकिन मानवीय संवेदना और मूल्य आधारित निर्णय का स्थान नहीं ले सकती।
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कुलपति ने आत्मनिर्भर विश्वविद्यालय के निर्माण पर कहा कि शिक्षकों की प्रतिभा, शोधार्थियों की जिज्ञासा और विद्यार्थियों की ऊर्जा को संस्थागत शक्ति में बदलना होगा। शोध केवल शोध पत्रों तक सीमित न रहे, बल्कि समाज की वास्तविक समस्याओं के समाधान का माध्यम बने।
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उन्होंने कहा कि हिमालयी क्षेत्र में स्थित सीयू अपनी अकादमिक पहचान भी हिमालय केंद्रित शोध से बना सकता है। हिमालयी पारिस्थितिकी, जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता, आपदा प्रबंधन, पर्वतीय कृषि और सतत पर्यटन जैसे क्षेत्रों में शोध को बढ़ावा देने की जरूरत है। उन्होंने विद्यार्थियों से रोजगार तलाशने के साथ रोजगार सृजक, नवाचारी और उद्यमी बनने का आह्वान किया।