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Kangra News: धर्मशाला के टीबी रोगियों को मिला पोषण का संबल
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धर्मशाला में पोषण किटों के वाहन को रवाना करते उपायुक्त हेमराज बैरवा। -स्रोत : विभाग
धर्मशाला। उपायुक्त हेमराज बैरवा ने टीबी हारेगा कांगड़ा जीतेगा कार्यक्रम के तहत टीबी रोगियों के लिए तैयार पोषण किटों से भरे वाहन को रवाना किया। वाहन में विकास खंड धर्मशाला के टीबी रोगियों के लिए पोषण किटें भेजी गईं। उन्होंने कहा कि धर्मशाला ऐसा पहला विकास खंड है, जिसने 15वें वित्त आयोग के धन से टीबी रोगियों को पोषण किट प्रदान करने की पहल की है।
उपायुक्त ने बताया कि पंचायतों के 15वें वित्त आयोग के अनुदानों की मदद से टीबी रोगियों को नियमित पोषण उपलब्ध करवाया जा रहा है। इससे टीबी रोगियों के उपचार को पूरा करने की संभावना बढ़ती है और ड्रॉपआउट दर कम होती है। जिला प्रशासन का लक्ष्य है कि जिले के सभी टीबी रोगियों तक यह सुविधा पहुंचे।
उपायुक्त ने बताया कि एनआरएलएम के तहत स्वयं सहायता समूहों को चिह्नित टीबी रोगियों के लिए निक्षय मित्र की भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है, ताकि रोगियों को निरंतर परामर्श मिलता रहे और वे बिना बाधा अपना उपचार पूरा कर सकें।
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किट में दालें, सोयाबीन, फोर्टिफाइड खाद्य पदार्थ, चावल, आटा, तेल, स्किम्ड दूध और च्यवनप्राश जैसे पोषक तत्व शामिल हैं, ताकि लंबी उपचार अवधि में रोगियों को संतुलित आहार मिल सके। छह माह के उपचार चरण के लिए यह सहायता विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों पर केंद्रित है। इस अवसर पर एडीएम कांगड़ा शिल्पी बेक्टा, जिला पंचायत अधिकारी विक्रम ठाकुर सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
पोषण किट में है ये सामग्री
खंड विकास अधिकारी अभिनीत कात्यायन ने बताया कि 27 टीबी रोगियों के लिए तैयार की गई इन पोषण किटों में 4 किलो साबुत माह, 5 किलो चने की दाल, 4 किलो लाल मसूर, 4 किलो मूंग दाल, 5 किलो गेहूं आटा, 1 किलो मूंगफली, 1 किलो सोया चंक्स, 2 लीटर सरसों तेल, 6 किलो मोंगरा चावल, स्किम्ड दूध और च्यवनप्राश पैक शामिल हैं। इन किटों की कुल लागत 1.28 लाख रुपये है, जिसे 15वें वित्त आयोग के पंचायत स्तरीय अनुदान से वहन किया गया है।
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उपायुक्त ने बताया कि पंचायतों के 15वें वित्त आयोग के अनुदानों की मदद से टीबी रोगियों को नियमित पोषण उपलब्ध करवाया जा रहा है। इससे टीबी रोगियों के उपचार को पूरा करने की संभावना बढ़ती है और ड्रॉपआउट दर कम होती है। जिला प्रशासन का लक्ष्य है कि जिले के सभी टीबी रोगियों तक यह सुविधा पहुंचे।
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उपायुक्त ने बताया कि एनआरएलएम के तहत स्वयं सहायता समूहों को चिह्नित टीबी रोगियों के लिए निक्षय मित्र की भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है, ताकि रोगियों को निरंतर परामर्श मिलता रहे और वे बिना बाधा अपना उपचार पूरा कर सकें।
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किट में दालें, सोयाबीन, फोर्टिफाइड खाद्य पदार्थ, चावल, आटा, तेल, स्किम्ड दूध और च्यवनप्राश जैसे पोषक तत्व शामिल हैं, ताकि लंबी उपचार अवधि में रोगियों को संतुलित आहार मिल सके। छह माह के उपचार चरण के लिए यह सहायता विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों पर केंद्रित है। इस अवसर पर एडीएम कांगड़ा शिल्पी बेक्टा, जिला पंचायत अधिकारी विक्रम ठाकुर सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
पोषण किट में है ये सामग्री
खंड विकास अधिकारी अभिनीत कात्यायन ने बताया कि 27 टीबी रोगियों के लिए तैयार की गई इन पोषण किटों में 4 किलो साबुत माह, 5 किलो चने की दाल, 4 किलो लाल मसूर, 4 किलो मूंग दाल, 5 किलो गेहूं आटा, 1 किलो मूंगफली, 1 किलो सोया चंक्स, 2 लीटर सरसों तेल, 6 किलो मोंगरा चावल, स्किम्ड दूध और च्यवनप्राश पैक शामिल हैं। इन किटों की कुल लागत 1.28 लाख रुपये है, जिसे 15वें वित्त आयोग के पंचायत स्तरीय अनुदान से वहन किया गया है।