{"_id":"67d70f587e83b8c33c0c9385","slug":"steviol-glycoside-powder-will-be-made-from-dried-stevia-leaves-in-una-kangra-news-c-399-1-sml1046-276216-2025-03-16","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kangra News: ऊना में बनेगा स्टीविया के सूखे पत्तों से स्टेविओल ग्लाइकोसाइड पाउडर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kangra News: ऊना में बनेगा स्टीविया के सूखे पत्तों से स्टेविओल ग्लाइकोसाइड पाउडर
विज्ञापन
पालमपुर (कांगड़ा)। अब मधुमेह के रोगी स्टीविया के सूखे पत्तों का उपयोग भी कर सकेंगे, क्योंकि ऊना जिले के सिंघा में स्टीविया प्रसंस्करण संयंत्र स्थापित किया गया है। इसमें स्टीविया के सूखे पतों से स्टेविओल ग्लाइकोसाइड पाउडर बनाया जाएगा। इस संयंत्र का उद्घाटन वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) की महानिदेशक डॉ. एन कलैसेल्वी ने किया। इसे सीएसआईआर-आईएचबीटी संस्थान, पालमपुर के तकनीकी सहयोग से विकसित किया गया है।
यह संयंत्र सूखे स्टीविया के पतों को प्रोसेस कर एक प्राकृतिक स्वीटनर पाउडर बनाएगा, जो मधुमेह के मरीजों के लिए एक स्वस्थ और कम कैलोरी विकल्प साबित होगा। स्टीविया का पाउडर सुक्रोज से करीब 300 गुना मीठा होता है और इसे मधुमेह के रोगी बिना किसी चिंता के इस्तेमाल कर सकते हैं।
इस अवसर पर, डॉ. कलैसेल्वी ने स्टीविया के खेतों का दौरा किया, जहां संस्थान की ओर से विकसित हिम स्टीविया किस्म को 200 एकड़ से अधिक के क्षेत्र में लगाया गया है। इस दौरान, उन्होंने नवीनतम खेत प्रबंधन तकनीकों का अवलोकन किया, जिसमें ड्रोन का उपयोग भी शामिल था। सीएसआईआर के निदेशक, डॉ. सुदेश कुमार यादव ने इस पहल को देश में बढ़ते डायबिटीज के मामलों के संदर्भ में महत्वपूर्ण बताया और कहा कि स्टीविया एक बेहतरीन मीठा विकल्प है, जिसे डायबिटीज के मरीज भी अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं। इस मौके पर एक तकनीकी ब्रोचर का विमोचन भी किया गया और प्रगतिशील किसानों को गुणवत्तापूर्ण पौध सामग्री वितरित की गई।
विज्ञापन
विज्ञापन
यह संयंत्र सूखे स्टीविया के पतों को प्रोसेस कर एक प्राकृतिक स्वीटनर पाउडर बनाएगा, जो मधुमेह के मरीजों के लिए एक स्वस्थ और कम कैलोरी विकल्प साबित होगा। स्टीविया का पाउडर सुक्रोज से करीब 300 गुना मीठा होता है और इसे मधुमेह के रोगी बिना किसी चिंता के इस्तेमाल कर सकते हैं।
विज्ञापन
इस अवसर पर, डॉ. कलैसेल्वी ने स्टीविया के खेतों का दौरा किया, जहां संस्थान की ओर से विकसित हिम स्टीविया किस्म को 200 एकड़ से अधिक के क्षेत्र में लगाया गया है। इस दौरान, उन्होंने नवीनतम खेत प्रबंधन तकनीकों का अवलोकन किया, जिसमें ड्रोन का उपयोग भी शामिल था। सीएसआईआर के निदेशक, डॉ. सुदेश कुमार यादव ने इस पहल को देश में बढ़ते डायबिटीज के मामलों के संदर्भ में महत्वपूर्ण बताया और कहा कि स्टीविया एक बेहतरीन मीठा विकल्प है, जिसे डायबिटीज के मरीज भी अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं। इस मौके पर एक तकनीकी ब्रोचर का विमोचन भी किया गया और प्रगतिशील किसानों को गुणवत्तापूर्ण पौध सामग्री वितरित की गई।
विज्ञापन