{"_id":"6a7084e471a95ea3be091e39","slug":"staff-reduced-consumers-increased-accidents-occurring-due-to-work-pressure-kangra-news-c-95-1-kng1034-248321-2026-08-03","type":"story","status":"publish","title_hn":"स्टाफ घटा और उपभोक्ता बढ़े, काम के दबाव में हो रहे हादसे : पेंशनर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
स्टाफ घटा और उपभोक्ता बढ़े, काम के दबाव में हो रहे हादसे : पेंशनर
Tue, 04 Aug 2026 05:38 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Tue, 04 Aug 2026 05:38 AM IST
विज्ञापन
मैरा में बैठक के दौरान विद्युत पेंशनर फोरम जवाली इकाई के सदस्य। -संवाद
राजा का तालाब (कांगड़ा)। हिमाचल प्रदेश राज्य बिजली बोर्ड में कर्मचारियों की भारी कमी और उपभोक्ताओं की लगातार बढ़ती संख्या के कारण काम के भारी दबाव में कर्मचारी आए दिन हादसों का शिकार हो रहे हैं। सोमवार को मैरा में हुई विद्युत पेंशनर फोरम जवाली इकाई की मासिक बैठक में पेंशनरों ने यह चिंता जताते हुए सरकार से तुरंत नियमित भर्ती प्रक्रिया शुरू करने की मांग की।
बैठक की अध्यक्षता इकाई प्रधान राम लुभाया ने की। बैठक में पेंशनरों ने कहा कि वर्ष 1990 में बिजली बोर्ड में करीब 43 हजार कर्मचारी थे और उपभोक्ताओं की संख्या लगभग 9 लाख थी। वर्तमान में उपभोक्ताओं की संख्या बढ़कर 29 लाख हो चुकी है, जबकि कर्मचारियों की संख्या घटकर महज 12 हजार रह गई है। इस कारण कर्मचारियों पर काम का दबाव अत्यधिक बढ़ गया है और वे लगातार दुर्घटनाओं का शिकार हो रहे हैं।
फोरम ने ठेकेदारों के माध्यम से की जा रही भर्तियों का कड़ा विरोध किया। इसके अलावा फोरम के राज्य उपाध्यक्ष पवन मोहल ने बिजली बोर्ड प्रबंधन के चार अप्रैल के उस आदेश पर रोष जताया, जिसके तहत वर्कचार्ज अवधि को सेवानिवृत्ति के वित्तीय लाभों में शामिल न करने का निर्णय लिया गया है। इससे पेंशनरों को प्रतिमाह 1,000 से 2,500 रुपये तक की चपत लगेगी।
विज्ञापन
पेंशनरों ने कहा कि बोर्ड प्रबंधन के इस फैसले के खिलाफ हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय में याचिका दायर की जाएगी। पेंशनरों ने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू से बोर्ड में भी शीघ्र पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) लागू करने की मांग दोहराई। बैठक में संयुक्त सचिव सुखदेव धीमान, वरिष्ठ उपाध्यक्ष चैन सिंह पठानिया, कमल सिंह ठाकुर, मुख्य सलाहकार मदन दीवान, ऑडिटर कृष्ण धीमान, कोषाध्यक्ष केवल सिंह चौधरी, संगठन सचिव पूरन सिंह और गणेश चौधरी सहित कई पेंशनर मौजूद रहे।
विज्ञापन
बैठक की अध्यक्षता इकाई प्रधान राम लुभाया ने की। बैठक में पेंशनरों ने कहा कि वर्ष 1990 में बिजली बोर्ड में करीब 43 हजार कर्मचारी थे और उपभोक्ताओं की संख्या लगभग 9 लाख थी। वर्तमान में उपभोक्ताओं की संख्या बढ़कर 29 लाख हो चुकी है, जबकि कर्मचारियों की संख्या घटकर महज 12 हजार रह गई है। इस कारण कर्मचारियों पर काम का दबाव अत्यधिक बढ़ गया है और वे लगातार दुर्घटनाओं का शिकार हो रहे हैं।
विज्ञापन
फोरम ने ठेकेदारों के माध्यम से की जा रही भर्तियों का कड़ा विरोध किया। इसके अलावा फोरम के राज्य उपाध्यक्ष पवन मोहल ने बिजली बोर्ड प्रबंधन के चार अप्रैल के उस आदेश पर रोष जताया, जिसके तहत वर्कचार्ज अवधि को सेवानिवृत्ति के वित्तीय लाभों में शामिल न करने का निर्णय लिया गया है। इससे पेंशनरों को प्रतिमाह 1,000 से 2,500 रुपये तक की चपत लगेगी।
विज्ञापन
पेंशनरों ने कहा कि बोर्ड प्रबंधन के इस फैसले के खिलाफ हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय में याचिका दायर की जाएगी। पेंशनरों ने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू से बोर्ड में भी शीघ्र पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) लागू करने की मांग दोहराई। बैठक में संयुक्त सचिव सुखदेव धीमान, वरिष्ठ उपाध्यक्ष चैन सिंह पठानिया, कमल सिंह ठाकुर, मुख्य सलाहकार मदन दीवान, ऑडिटर कृष्ण धीमान, कोषाध्यक्ष केवल सिंह चौधरी, संगठन सचिव पूरन सिंह और गणेश चौधरी सहित कई पेंशनर मौजूद रहे।