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धौलाधार पहाड़ की ऊंची चोटियों ने ओढ़ी बर्फ की चादर
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पैराग्लाइडिंग के विश्व प्रसिद्ध साइट बीड़ बिलिंग के टेक आफ प्वाइंट पर हुई सीजन की पहली बर्फबारी?
धर्मशाला/मुल्थान(कांगड़ा)। जिला कांगड़ा में सोमवार सुबह कई हिस्सों में हल्की बारिश हुई। वहीं, धौलाधार पर्वत की ऊपरी चोटियों ने बर्फ की चादर ओढ़ ली है। हल्की बारिश और पहाड़ों पर बर्फबारी के चलते जिला कांगड़ा में ठंड बढ़ गई है। हालांकि पर्याप्त बारिश न होने के कारण निचले क्षेत्रों के किसानों के हाथ एक बार फिर से मायूसी लगी है।
गौरतलब है कि 25 अक्तूबर के बाद नूरपुर, इंदौरा, गंगथ, फतेहपुर, जवाली, देहरा आदि क्षेत्रों में बड़ी बारिश नहीं हुई है। क्षेत्र के किसान शमशेर सिंह, अंग्रेज सिंह, तरसेम सिंह, सेवा सिंह, हंसराज आदि ने बताया कि गेहूं बिजाई के इक्कीस दिनों के अंदर बारिश की जरूरत होती है। दिसंबर के पहले सप्ताह में बार-बार बादल छाने के बावजूद इन निचले इलाकों में कोई बड़ी बारिश नहीं हुई है। ऐसे में किसानों में मायूसी छाई हुई है।
वहीं, छोटा भंगाल क्षेत्र में बीती रात से ऊंचाई पर बसे गांवों में सुबह तक 2 सेंटीमीटर से 4 सेंटीमीटर तक बर्फबारी हुई। इसके साथ ही निचले इलाकों में दिनभर ओलों के साथ बारिश होती रही। राजगुंधा, कोठीकोढ़, बड़ागांव, भुजलिंग, बडधारनी माता, पोलिंग, जधार, छेरना रोलिंग, मियोट आदि गांवों ताजा हिमपात हुआ है। निचले इलाकों में दिनभर बारिश लगी रही। किसान राम सिंह, सीता राम, भजन सिंह, मंगत राम ने बताया कि काफी दिनों से बारिश की जरूरत थी। सरसों, लहुसन, जौ और गेहूं की फसलों के लिए इस बारिश से लाभ होगा। बागबानों को तौलिया बनाने लिए भी बारिश जरूरी थी।
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गेहूं की फसल के लिए अच्छी है बारिश
कृषि विभाग जिला कांगड़ा के उपनिदेशक डॉ. जीत सिंह ने बताया कि सोमवार को कांगड़ा के ऊपरी क्षेत्रों में हुई बारिश गेहूं की फसल के लिए लाभदायक है। हालांकि निचले क्षेत्रों में उम्मीद से कम बारिश हुई है। इन निचले क्षेत्रों में भी इस समय अच्छी बारिश की जरूरत है।
बिलिंग में बर्फबारी, बड़ा भंगाल का रास्ता हुआ बंद
बैजनाथ (कांगड़ा)। पैराग्लाइडिंग के लिए विश्व प्रसिद्ध बिलिंग घाटी में सोमवार दोपहर बाद करीब आठ सेंटीमीटर तक बर्फबारी हुई। बिलिंग घाटी में समय पर बर्फबारी होने के कारण पर्यटन व्यवसाय को पंख लगेंगे। बर्फबारी के चलते आने वाले दिनों में घाटी में बाहरी प्रदेशों के पर्यटकों की संख्या का आंकड़ा बढ़ने की उम्मीद है। दूसरी तरफ अब बड़ा भंगाल को थमसर जोत से जाने वाला रास्ता पूर्ण रूप से बंद हो गया है। अब बड़ा भंगाल को इस रास्ते से मई माह में ही जाना संभव हो सकता है। आने वाले दिनों में चंबा के होली से जाने वाला रास्ता भी बर्फबारी से बंद हो सकता है।
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गौरतलब है कि 25 अक्तूबर के बाद नूरपुर, इंदौरा, गंगथ, फतेहपुर, जवाली, देहरा आदि क्षेत्रों में बड़ी बारिश नहीं हुई है। क्षेत्र के किसान शमशेर सिंह, अंग्रेज सिंह, तरसेम सिंह, सेवा सिंह, हंसराज आदि ने बताया कि गेहूं बिजाई के इक्कीस दिनों के अंदर बारिश की जरूरत होती है। दिसंबर के पहले सप्ताह में बार-बार बादल छाने के बावजूद इन निचले इलाकों में कोई बड़ी बारिश नहीं हुई है। ऐसे में किसानों में मायूसी छाई हुई है।
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वहीं, छोटा भंगाल क्षेत्र में बीती रात से ऊंचाई पर बसे गांवों में सुबह तक 2 सेंटीमीटर से 4 सेंटीमीटर तक बर्फबारी हुई। इसके साथ ही निचले इलाकों में दिनभर ओलों के साथ बारिश होती रही। राजगुंधा, कोठीकोढ़, बड़ागांव, भुजलिंग, बडधारनी माता, पोलिंग, जधार, छेरना रोलिंग, मियोट आदि गांवों ताजा हिमपात हुआ है। निचले इलाकों में दिनभर बारिश लगी रही। किसान राम सिंह, सीता राम, भजन सिंह, मंगत राम ने बताया कि काफी दिनों से बारिश की जरूरत थी। सरसों, लहुसन, जौ और गेहूं की फसलों के लिए इस बारिश से लाभ होगा। बागबानों को तौलिया बनाने लिए भी बारिश जरूरी थी।
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गेहूं की फसल के लिए अच्छी है बारिश
कृषि विभाग जिला कांगड़ा के उपनिदेशक डॉ. जीत सिंह ने बताया कि सोमवार को कांगड़ा के ऊपरी क्षेत्रों में हुई बारिश गेहूं की फसल के लिए लाभदायक है। हालांकि निचले क्षेत्रों में उम्मीद से कम बारिश हुई है। इन निचले क्षेत्रों में भी इस समय अच्छी बारिश की जरूरत है।
बिलिंग में बर्फबारी, बड़ा भंगाल का रास्ता हुआ बंद
बैजनाथ (कांगड़ा)। पैराग्लाइडिंग के लिए विश्व प्रसिद्ध बिलिंग घाटी में सोमवार दोपहर बाद करीब आठ सेंटीमीटर तक बर्फबारी हुई। बिलिंग घाटी में समय पर बर्फबारी होने के कारण पर्यटन व्यवसाय को पंख लगेंगे। बर्फबारी के चलते आने वाले दिनों में घाटी में बाहरी प्रदेशों के पर्यटकों की संख्या का आंकड़ा बढ़ने की उम्मीद है। दूसरी तरफ अब बड़ा भंगाल को थमसर जोत से जाने वाला रास्ता पूर्ण रूप से बंद हो गया है। अब बड़ा भंगाल को इस रास्ते से मई माह में ही जाना संभव हो सकता है। आने वाले दिनों में चंबा के होली से जाने वाला रास्ता भी बर्फबारी से बंद हो सकता है।